झांसी, जेएनएन। इंटरनेट मीडिया पर हुई बिजली चोरी की शिकायत जल संस्थान के एक अधिकारी पर भारी पड़ गई। शिकायत का संज्ञान लेकर बिजली विभाग की टीम ने चेकिंग की तो बिजली चोरी पकड़ी गई। अधिकारी के विरुद्ध मुकदमा दर्ज करा दिया गया है। वहीं, अधिकारी का कहना है कि वह पैसा जमा कर चुके हैं। कई बार प्रार्थना पत्र देने के बाद भी उनके घर पर मीटर नहीं लगाया गया। हालांकि बिजली विभाग ने साफ किया है कि अधिकारी ने कनेक्शन के लिए आवेदन किया ही नहीं।

जल संस्थान कर्मचारी यूनियन के पूर्व जिला महामंत्री संजीव साहू ने ट्विटर पर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ व बिजली विभाग के अधिकारियों को टैग करते हुए शिकायत की थी कि जल संस्थान के अधिशासी अभियंता कुलदीप सिंह अपने घर पर बिजली चोरी कर रहे हैं। अधिशासी अभियंता के घर का एक वीडियो भी सोशल मीडिया पर वायरल हुआ था। शिकायत को संज्ञान में लेते हुए शासन व दक्षिणांचल विद्युत वितरण निगम के प्रबंध निदेशक द्वारा जांच का आदेश दिया गया।

इधर, डीएम कंट्रोल रूम से भी विभागीय अधिकारियों को जांच के लिए कहा गया। इस पर उप खंड अधिकारी आलोक प्रकाश, हाइडिल कालोनी बिजली घर के अवर अभियंता अनिल कुमार व विजिलेंस टीम के साथ जीवनशाह-बीकेडी रोड स्थित अधिशासी अभियंता के आवास पर जांच करने पहुंचे। यहां टीम को डायरेक्ट केबल के जरिये बिजली चोरी होती मिली। टीम ने केबल को जब्त कर अधिशासी अभियंता के विरुद्ध बिजली थाने में तहरीर दी, जिस पर संबंधित धाराओं में मुकदमा दर्ज कर लिया गया।

बिजली विभाग के अधिकारियों के अनुसार अधिकारी के आवास पर कनेक्शन का मामला पुराना है। पहले यहां कनेक्शन था, जिसे बकाया जमा न करने की स्थिति में खत्म कर दिया गया था। इसके बाद यहां से कनेक्शन के लिए कोई आवेदन नहीं किया गया। इधर, अधिशासी अभियंता कुलदीप सिंह की ओर से कहा गया कि उन्होंने बीते दिसंबर माह में बकाया जमा किया था और साथ ही मीटर लगवाने के लिए कई पत्र बिजली विभाग को लिखे, जिस पर कोई कार्यवाही नहीं हुई।

उप खंड अधिकारी विद्युत वितरण खंड प्रथम आलोक प्रकाश ने कहा कि किसी भी परिसर से यदि मीटर उखाड़ लिया जाए तो कनेक्शन के लिए दोबारा आवेदन करना पड़ता है। पुराना बकाया तो जमा हुआ है, लेकिन अधिशासी अभियंता के आवास से कनेक्शन का आवेदन नहीं किया गया, इसलिए बिजली का उपयोग अवैध माना जाएगा। उनके विरुद्ध मुकदमा दर्ज करा दिया गया है। राजस्व वसूली की कार्यवाही की जाएगी।

जल संस्थान के अधिशासी अभियंता कुलदीप सिंह ने बताया कि वर्ष 2015 में पूर्व के अधिकारी के कार्यकाल में मीटर उखाड़ दिया गया था, तभी से बंद मीटर का बिल आ रहा है। बिजली विभाग के पुराने अधिकारियों को मीटर लगवाने के लिए कई बार पत्र लिखा था। बीते दिसंबर माह में पुराने बकाये के रूप में 48 हजार रुपये जमा भी किये थे। इसके साथ ही बंद मीटर का बिल आता है, जिसे लगातार जमा किया जाता रहा है। हाल ही में लगभग 96 हजार रुपए बिजली बकाये के रूप में जमा किये हैं।

 

Edited By: Umesh Tiwari