झांसी वोटर लिस्ट में गड़बड़ी पर चुनाव आयोग सख्त, अधिकारियों से मांगा स्पष्टीकरण; प्रशासन में अफरातफरी
झांसी-इलाहाबाद स्नातक निर्वाचन क्षेत्र की मतदाता सूची में गड़बड़ी के बाद चुनाव आयोग सख्त हो गया है।

HighLights
चुनाव आयोग ने मतदाता सूची की त्रुटियों पर सख्ती दिखाई।
दो दिन में तीन पत्र जारी कर अधिकारियों से जवाब मांगा।
जिम्मेदार अधिकारी-कर्मचारियों के नाम तलब किए गए हैं।
जागरण संवाददाता, झांसी। झांसी-इलाहाबाद स्नातक निर्वाचन क्षेत्र की मतदाता सूची में मिली त्रुटियों के बाद लगे साख पर बट्टे के बाद निर्वाचन आयोग सख्ती के मूड में आ गया है। महज 2 दिन के अंदर आयोग द्वारा 3 पत्र जारी किये जाने के बाद प्रशासनिक हल्के में अफरातफरी की स्थिति बन गई है। रिटर्निंग अधिकारी के बाद जिलाधिकारी से स्पष्टीकरण तलब के बाद आयोग सीधे उस अधिकारी और कर्मचारी का नाम माँग रहा है जिसके कारण उसकी जगहँसाई हुई है।
झांसी-इलाहाबाद स्नातक निर्वाचन क्षेत्र में 10 जनपद आते हैं और रिटर्निंग अधिकारी द्वारा 2,64,233 मतदाताओं की सूची जारी की थी। मतदाता सूची प्रकाशित होने के बाद ही सोशल मीडिया पर त्रुटियों का उल्लेख होना प्रारम्भ हो गया था। मतदान के पहले ही आयोग ने इस सूची पर रिटर्निंग अधिकारी/मंडलायुक्त से स्पष्टीकरण तलब कर लिया था, लेकिन 24 अक्टूबर को मतदान के समय भी इस कारण कई मतदाता अपने मताधिकार से वंचित रह गए थे।
व्यापक स्तर पर जगह-जगह से मिली शिकायतों के बाद आयोग गम्भीर हो गया और उसने 2 दिन में 3 पत्र जारी कर दिये। दूसरे पत्र में सभी जिलों के जिला निर्वाचन अधिकारियों से कहा गया कि सूची शुद्ध प्रकाशित करना उनकी जिम्मेवारी थी, इसका निर्वहन क्यों नहीं किया अपना स्पष्टीकरण दें, जबकि तीसरे पत्र में संयुक्त मुख्य निर्वाचन अधिकारी अमित सिंह ने कहा कि निर्वाचक नामावलियों की शुद्धता की जांच न किए जाने हेतु उत्तरदायी अधिकारी/कर्मचारी का उत्तरदायित्व निर्धारित करते हुए जांच आख्या भेजें।
इस बात पर अधिक है नाराजगी
एमएलसी चुनाव में हुई किरकिरी के बाद आयोग की नाराजगी का मुख्य कारण त्रुटिपूर्ण मतदाता सूची है। आयोग द्वारा जारी किए गए आदेश में कहा गया है कि सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर शिकायतें मिली थीं कि सूची में कई मतदाताओं के नाम व उनके संबंधियों के नाम त्रुटिपूर्ण हैं।
इसमें कहा गया कि निर्वाचक नामावली का अन्तिम प्रकाशन 6 जनवरी 2026 को हुआ था। उसके बाद जांच के लिए पर्याप्त समय था, लेकिन जनपद स्तर पर लिपिकीय त्रुटियों को शुद्ध नहीं किया गया। पर्याप्त समय के बाद भी शुद्धता की जांच न करना कार्य में लापरवाही है। मतदान की तिथि से पहले त्रुटियां सोशल मीडिया पर उजागर होने से आयोग की छवि धूमिल हुई।
