पुणे से ट्रेनिंग लेकर झांसी पहुंचा 'एलेक्स', तस्करों को पकड़ने में पुलिस की बनेगा ताकत
झांसी आरपीएफ में 13 महीने का लेब्राडोर नारकोटिक्स डॉग "एलेक्स" शामिल हुआ है, जिसे मादक पदार्थों की तस्करी रोकने के लिए विशेष रूप से प्रशिक्षित किया गया है।

HighLights
एलेक्स, 13 महीने का लेब्राडोर, झाँसी आरपीएफ में शामिल।
मादक पदार्थों की गन्ध पहचानने में विशेष रूप से प्रशिक्षित।
रेलवे स्टेशन, ट्रेनों में नशीले पदार्थों की तस्करी रोकेगा।
जागरण संवाददाता, झांसी। रेलवे स्टेशन और ट्रेन के जरिए मादक पदार्थों की तस्करी पर नजर रखने के लिए आरपीएफ के डॉग स्क्वॉड को नई ताकत मिली है। झांसी आरपीएफ के बेड़े में 13 महीने का लेब्राडोर नस्ल का नारकोटिक्स डॉग "एलेक्स" शामिल हो गया है। एलेक्स को मादक पदार्थों की गन्ध पहचानने के लिए विशेष रूप से प्रशिक्षित किया गया है।
लगभग एक वर्ष की विशेष ट्रेनिंग पूरी करने के बाद अब उसे झांसी में तैनात कर दिया गया है। एलेक्स को इस तरह प्रशिक्षित किया गया है कि वह अपनी सूंघने की क्षमता के जरिए छिपाए गए मादक पदार्थों का पता लगा सके।
आरपीएफ की ओर से ऐसे प्रशिक्षित श्वान का इस्तेमाल रेलवे स्टेशन, ट्रेन, प्लैटफॉर्म, पार्सल और अन्य सन्दिग्ध स्थानों पर जांच के दौरान किया जायेगा। प्रशिक्षण के दौरान एलेक्स को अनुशासन, हैण्डलर के निर्देशों का पालन करने और मादक पदार्थों की गन्ध पहचानने जैसी क्षमताओं के लिए तैयार किया गया है।
ऐसे ली जायेगी मदद
एलेक्स का मुख्य काम नारकोटिक्स डिटेक्शन है। जाँच के दौरान यदि किसी यात्री के सामान, बैग, पैकेट या किसी स्थान पर मादक पदार्थ छिपाए होने की आशंका होगी तो एलेक्स की मदद ली जा सकेगी। उसकी गंध पहचानने की क्षमता जाँच टीम को सन्दिग्ध सामान तक पहुँचाने में मदद करेगी।
गांजा तस्करी पर रहेगी खास नजर
झाँसी मण्डल से होकर बड़ी संख्या में यात्री ट्रेन गुजरती हैं। ऐसे में ट्रेन और रेलवे परिसरों के माध्यम से मादक पदार्थों की सम्भावित तस्करी की रोकथाम में एलेक्स की भूमिका महत्वपूर्ण होगी। खास तौर पर गाँजा जैसे मादक पदार्थों की तलाश में उसकी सेवाएं ली जाएंगी।
चॉकलेटी रंग के कारण भी अलग पहचान
एलेक्स की एक खास पहचान उसका चॉकलेटी रंग भी है। लेब्राडोर नस्ल के श्वानों में यह रंग देखने को मिलती है, हालाँकि डॉग स्क्वॉड में तैनात श्वानों के बीच एलेक्स की यह रंगत उसे अलग पहचान देती है।
इन्होंने कहा?
झांसी में एलेक्स की तैनाती आरपीएफ के श्वान दस्ते की कार्यक्षमता को एक और आयाम देगी। -जितेन्द्र कुमार शर्मा, वरिष्ठ मण्डल सुरक्षा आयुक्त, रेलवे सुरक्षा बल (झांसी)
बम की गन्ध से लेकर अपराधी के सुराग तक
22 से 27 अक्तूबर तक झांसी मण्डल में अन्तर क्षेत्रीय रेलवे श्वान प्रतियोगिता होने जा रही है। इसमें पूरे देश से आरपीएफ के श्वान हिस्सा लेंगे। प्रतियोगिता में श्वान की क्षमता को परखा जायेगा। पहली बार झांसी में होने वाली इस प्रतियोगिता में देशभर के डॉग स्क्वॉड अपने-अपने प्रशिक्षित श्वानों के साथ झांसी पहुंचेंगे।
यहां अलग-अलग विशेषज्ञताओं में उनकी कार्यक्षमता, प्रशिक्षण और दक्षता को निर्धारित मानकों पर परखा जाएगा। इसमें हर श्वान का टेस्ट होगा कि वह किस तरह से अपराधी पकड़ेगा, कितनी इसकी क्षमता होगी। नारकोटिक्स खोजने की तरीका क्या है और यह श्वान कैसे काम करता है। यदि बम की सूचना मिलती है तो उसे श्वान कैसे ट्रेस करेगा, इसकी क्षमता परखी जाएगी।
इसका सबसे महत्वपूर्ण बिन्दु यह है कि कई बम ऐसे होते हैं कि वह आवाज से ही फट जाते हैं। ऐसे में श्वान बम की जानकारी कैसे देगा, ऐसे ही तमाम अन्य बिन्दुओं पर श्वानों की क्षमता भी परखी जायेगी। आरपीएफ ने प्रतियोगिता की तैयारी शुरू कर दी है।
‘तूफान’ को आगरा की स्वयंसेवी संस्था ने लिया गोद
आरपीएफ से 8 माह पहले श्वान ‘तूफान’ के सेवानिवृत होने के बाद आगरा की पशु प्रेमी स्वयंसेवी संस्था पीपुल्स फॉर एनिमल ने इसे गोद लिया है। लगभग 10 वर्ष तक झाँसी में तैनात रहा ‘तूफान’ आरपीएफ में अपनी अहम भूमिका निभा चुका है। तूफान ने अपने कार्यकाल के दौरान रेलवे स्टेशन, ट्रेन और माल गोदामों में हुई कई चोरियों का खुलासा कराया था। शातिर चोरों तक पहुँचने में उसकी भूमिका निर्णायक रही, जिससे जाँच एजेन्सियों को बड़ी सफलता मिली।
आरपीएफ का श्वान खोजी कुत्ता ‘तूफान’ अपनी तेज सूंघने की क्षमता के कारण सुरक्षा व्यवस्था का मजबूत आधार रहा। अपराधियों की गन्ध पहचान कर सुराग तक पहुँचना उसकी खासियत थी। इससे उसने अपने 10 साल के सेवाकाल में कई जटिल मामलों को सुलझाने में अहम भूमिका निभाई।
ललितपुर में दो वर्ष पहले ट्रेन के कोच से हुई 12 से 14 बैटरियों की चोरी के प्रकरण के खुलासे में उसने अहम भूमिका अदा की थी। उसकी सूझबूझ से आरपीएफ अपराधी के उस ठिकाने तक पहुँच सकी थी, जहाँ उसने माल छिपाकर रखा था। इसी प्रकार बबीना में सिग्नल काटकर चोरी करने के चर्चित मामले के अपराधी को भी पकड़वाने में उसने मदद की थी।
