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झांसी में कीचड़ में फंसी एंबुलेंस, नवजात को गोद में लेकर 1 किलोमीटर पैदल चलने को मजबूर हुईं महिलाएं

Published: Sun, 04 Oct 2026 01:43 AM (IST)

झांसी के मंजूवारा खिरक में प्रसव पीड़ा से जूझ रही महिला को सड़क न होने के कारण एंबुलेंस तक पहुंचने ...और पढ़ें

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HighLights

  1. प्रसव पीड़ा में महिला को कीचड़ भरे रास्ते से एंबुलेंस तक पहुंचाया।

  2. एंबुलेंस सड़क न होने से एक किलोमीटर पहले ही रुक गई।

  3. नवजात को गोद में लेकर महिलाओं को पैदल घर लौटना पड़ा।

जागरण संवाददाता, बंगरा (झांसी)। एक तरफ प्रसव पीड़ा से कराहती महिला, दूसरी तरफ रास्ते में घुटनों तक कीचड़ और पानी... मदद के लिए पहुंची 102 एंबुलेंस भी सड़क के अभाव में मंजूवारा खिरक से एक किलोमीटर पहले ठहर गई। ऐसे में परिजनों और गांव की महिलाओं ने प्रसव पीड़िता को बाइक पर बैठाकर कीचड़ भरे रास्ते से एंबुलेंस तक पहुंचाया।

बंगरा के सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्र में महिला ने स्वस्थ बच्ची को जन्म दिया, लेकिन घर लौटने की राह भी आसान नहीं हुई। ऐम्बुलेंस फिर उसी स्थान पर रुक गई और नवजात को गोद में लेकर महिलाओं को बाकी रास्ता तय करना पड़ा। आजादी के बाद से सड़क की बाट जोह रहे मंजूवारा खिरक में मूलभूत सुविधाओं की यह तस्वीर जिम्मेदारों के दावों पर सवाल खड़े करती है।

ग्राम पंचायत मगरवारा में रेलवे क्रॉसिंग के पास मंजूवारा खिरक तक आजादी के बाद से अब तक सड़क नहीं बनी है। बारिश के दिनों में कच्चे रास्ते पर कीचड़ और पानी भर जाने से यहां आवागमन मुश्किल हो जाता है। विगत 2 अक्टूबर को खिरक निवासी जयप्रकाश कुशवाहा की पत्नी को प्रसव पीड़ा हुई।

परिजनों ने तत्काल 102 एंबुलेंस को फोन किया। सूचना मिलते ही एंबुलेंस खिरक के लिए रवाना हुई, लेकिन मंजूवारा खिरक से करीब एक किलोमीटर पहले कच्चे रास्ते में कीचड़ और पानी भरा होने के कारण चालक को एंबुलेंस रोकनी पड़ी। इसके बाद परिजनों और ग्राम की महिलाओं ने किसी तरह प्रसव पीड़ित महिला को बाइक से वहाँ तक पहुंचाया और एंबुलेंस में बैठाया।

महिला को सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्र (बंगरा) ले जाया गया, जहां प्रसव के बाद उसने स्वस्थ बच्ची को जन्म दिया। प्रसव के बाद घर लौटते समय भी एंबुलेंस को करीब एक किलोमीटर पहले ही रोकना पड़ा। मजबूरी में महिला को बाइक से और नवजात शिशु को गोद में लेकर महिलाएँ घर पहुंचीं।

वर्षा में कैदी सा जीवन गुजारते हैं ग्रामीण
ग्रामवासियों ने बताया कि खिरक तक सड़क निर्माण के लिए विगत कई वर्षों से लगातार माँग की जा रही है, लेकिन समस्या का समाधान नहीं हुआ। वर्षा के मौसम में कच्चे रास्ते पर कीचड़ और पानी भर जाने के कारण खिरक के निवासी कैदी सा जीवन गुजारने को मजबूर होते हैं।

ग्रामीणों ने बताया कि सड़क न होने से सबसे अधिक परेशानी महिलाओं, बच्चों, बुजुर्गों और बीमार लोगों को उठानी पड़ती है। पूर्व प्रधान हरचरन श्रीवास, अखिलेश कुशवाहा, रामेश्वर कुशवाहा, नीरज कुमार, भानुप्रताप, अनिल कुमार, रामसेवक, लालाराम, कामता प्रसाद, विश्वनाथ, लखनलाल कुशवाहा, ठाकुरदास, दशरथ कुशवाहा, मोतीलाल कुशवाहा, वृन्दावन, मिथलेश कुमार, सुनील कुमार, नन्दराम, बाबूलाल।

भगवानदास, रामकुमार, लक्ष्मण प्रसाद, मुन्नालाल, अशोक कुमार, तिजू कुशवाहा, कालका प्रसाद, पप्पू कुशवाहा, गजेन्द्र कुमार, राकेश कुमार, सुन्दरलाल, जगदीश प्रसाद, सुरेश कुमार आदि द्वारा क्षेत्रीय सांसद, विधायक और जिलाधिकारी से समस्या के निवारण की मांग उठाई है।

पिछले साल भी प्रसव पीड़िता ने झेली थी त्रासदी
ग्राम पंचायत मगरवारा के मंजूवारा खिरक में विगत वर्ष भी चन्द्रभान कुशवाहा की पत्नी को प्रसव पीड़ा होने पर सड़क के अभाव में इसी त्रासदी से गुजरना पड़ा था। मामला संज्ञान में आने के बाद अधिकारियों और कर्मचारियों ने मौके का निरीक्षण कर जल्द सड़क निर्माण का आश्वासन दिया था, लेकिन परिणाम शून्य रहा। और अब एक और प्रसव पीड़िता को उसी परेशानी से गुजरना पड़ा।

बजट स्वीकृत होते ही शुरू होगा निर्माण: डॉ. रश्मि आर्य
मऊरानीपुर विधायक डॉ. रश्मि आर्य ने बताया कि ग्राम पंचायत मगरवारा के मंजूवारा, छिंगेवारा खिरक तक सड़क निर्माण कार्य के लिए कार्ययोजना में प्रस्ताव शासन को भेजा गया है। बजट स्वीकृत होने के बाद निर्माण कार्य शुरू करा दिया जाएगा।

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