रैगिंग विवाद के बीच रेडिट ऐप पर छाया झांसी मेडिकल कॉलेज, बैठक और हॉस्टल की व्यवस्थाओं पर उठे सवाल
झांसी मेडिकल कॉलेज में अमेरिकी सोशल मीडिया ऐप 'रेडिट' पर कॉलेज प्रशासन के गोपनीय पत्रों और बैठकों की जानकारी वायरल ...और पढ़ें
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HighLights
रेडिट पर झांसी मेडिकल कॉलेज की गोपनीय जानकारी वायरल।
रैगिंग की शिकायत के बाद ऐप की जानकारी सामने आई।
प्रधानाचार्य ने जांच के आदेश दिए, पुलिस शिकायत की तैयारी।
जागरण संवाददाता, झांसी। मेडिकल कॉलेज में इन दिनों अमेरिकी सोशल मीडिया ऐप 'रेडिट' चर्चा का विषय बना हुआ है। इस ऐप पर मेडिकल कॉलेज प्रशासन की ओर से जारी पत्रों से लेकर कॉलेज में होने वाली बैठकों तक की जानकारियां वायरल होने का मामला सामने आया है। इससे मेडिकल कॉलेज प्रशासन में अफरा-तफरी का आलम है।
कॉलेज के प्रधानाचार्य को फोन पर रैगिंग की शिकायत मिलने पर ऐप की जानकारी सामने आई है। अब रैगिंग कमेटी को मामले की जांच कर रिपोर्ट देने के निर्देश दिए गए हैं। मेडिकल कॉलेज के प्रधानाचार्य डॉ. सुधीर कुमार को 8 अक्टूबर को दोपहर में फोन आया। फोन करने वाले नए एमबीबीएस बैच के छात्र ने अपने सीनियर छात्रों पर रैगिंग करने की शिकायत की।
प्रधानाचार्य के निर्देश पर वॉर्डन ने सीनियर छात्रों से पूछताछ की तो 'रेडिट' ऐप पर चल रही चर्चाओं की जानकारी सामने आई। सीनियर छात्र ने ऐप पर कुछ पोस्ट में जूनियर छात्र पर झूठी शिकायत कर सीनियर छात्रों को फंसाने के आरोप लगाए जाने के पोस्ट भी दिखाए। इसके बाद अन्य छात्रों से भी पूछताछ की गई।
जांच के दौरान यह जानकारी भी सामने आई कि इस ऐप पर मेडिकल कॉलेज प्रशासन की ओर से जारी किए गए पत्र और कॉलिज में होने वाली बैठकों से जुड़ी जानकारियाँ भी साझा की जा रही हैं। जाँच के बाद पत्र जारी होने पर पुलिस प्रशासन से शिकायत करने की बात कही गई है।
ऐप पर मेरठ का युवक बोला- 'अभी देखो-आगे-आगे होता है क्या'
रेडिट पर एक युवक के मेरठ का निवासी होने की बात कहते हुए उसके द्वारा पोस्ट करने की जानकारी सामने आई है। पोस्ट में कथित तौर पर युवक ने लिखा कि "अभी कुछ नहीं हुआ है, आगे देखिए क्या होता है।" साथ ही कॉलेज में होने वाली बैठक का जिक्र करते हुए कुछ लोगों के फँसने की बात भी कही गई है। पोस्ट की सत्यता और उसके पीछे की मंशा की जाँच की जानी बाकी है।
हॉस्टल और रैगिंग को लेकर उठाए सवाल
r/indianmedschool कम्युनिटी में एक यूजर ने कॉलेज के हॉस्टल, खानपान, साफ-सफाई और खेलकूद की सुविधाओं पर सवाल उठाए हैं। पोस्ट में हॉस्टल की स्थिति खराब होने और स्वच्छता व्यवस्था औसत से कम होने का दावा किया गया है। वहीं, रैगिंग को लेकर कहा गया है कि 2024 बैच के विद्यार्थियों को अधिक परेशानी का सामना करना पड़ा, जबकि 2025 बैच के विद्यार्थियों ने अपेक्षाकृत कम रैगिंग का अनुभव किया।
एक अन्य पोस्ट में नीट में लगभग 14,500 रैंक पाने वाले अभ्यर्थी ने कॉलेज में प्रवेश लेने से पहले हॉस्टल, रैगिंग और शैक्षणिक माहौल के बारे में जानकारी माँगी है। हालांकि, इन दावों की स्वतन्त्र पुष्टि नहीं हुई है।
पोस्ट में डॉक्टर पर लगाए गम्भीर आरोप
पोस्ट करने वाले ने दावा किया कि हड्डी रोग विभाग के जूनियर रेजिडेण्ट डॉक्टर से 24 घण्टे काम कराया जाता है। उन्हें पर्याप्त नींद लेने और खाना खाने तक का समय नहीं मिलता। पोस्ट में सर्जरी विभाग में भी जूनियर डॉक्टर के उत्पीड़न का आरोप लगाया गया है। हालाँकि, इन आरोपों की भी पुष्टि नहीं हुई है।
यह है रेडिट ऐप
रेडिट (Reddit) एक अमेरिकी सोशल मीडिया प्लैटफॉर्म है, जहां लोग अपनी रुचि के अनुसार विभिन्न समुदायों (कम्युनिटि) से जुड़कर जानकारी, अनुभव, सवाल और विचार साझा करते हैं। इन समुदायों को सबरेडिट (Subreddit) कहा जाता है। उदाहरण के लिए, मेडिकल शिक्षा से जुड़े समुदाय में विद्यार्थी कॉलेज, हॉस्टल, पढ़ाई और रैगिंग जैसे विषयों पर चर्चा कर सकते हैं।
यूजर अपनी पहचान छिपाकर भी अकाउण्ट बना सकते हैं और पोस्ट या कमेण्ट कर सकते हैं। दूसरे यूजर पोस्ट को अपवोट या डाउनवोट कर सकते हैं। पोस्ट पर लाइक के बजाय वोटिंग की व्यवस्था होती है। रेडिट पर साझा की गई जानकारी सार्वजनिक हो सकती है, लेकिन हर पोस्ट की सत्यता की गैरण्टि नहीं होती।
रैगिंग कमिटी जांच कर रही है। उनकी रिपोर्ट मिलते ही पुलिस प्रशासन में शिकायत करते हुए जांच कराकार आरोपी के खिलाफ कार्यवाही कराई जाएगी।'- डॉ. सुधीर कुमार प्रधानाचार्य, मेडिकल कॉलेज (झांसी)
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