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खंडहर मकान की जमीन के नीचे मिला खजाना, चांदी के सिक्कों की लिखावट से उठा अकबर के इतिहास का पर्दा

Published: Fri, 02 Oct 2026 11:11 AM (IST)

दतिया के भरतगढ़ में खुदाई के दौरान अकबरकालीन चांदी के चार सिक्के मिले हैं, जो दीन-ए-इलाही से जुड़े महत्वपूर्ण ऐतिहासिक तथ्य उजागर करते हैं।

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HighLights

  1. दतिया में खुदाई के दौरान मिले अकबरकालीन चांदी के चार सिक्के।

  2. सिक्कों पर 'दीन-ए-इलाही' और टकसालों के नाम अंकित हैं।

  3. पुरातत्व विभाग स्थल का निरीक्षण कर आगे की जांच करेगा।

जागरण संवाददाता, झांसी/दतिया। दतिया शहर के मुहल्ला भरतगढ़ में जमीन से मिले चांदी के 4 सिक्कों ने मुगलकाल के इतिहास से जुड़े महत्वपूर्ण तथ्य सामने ला दिए हैं। प्रारम्भिक अध्ययन में इन सिक्कों का सम्बन्ध मुगल सम्राट अकबर के शासनकाल में स्थापित दीन-ए-इलाही से बताया गया है।

सिक्कों पर अंकित फारसी लेख को भोपाल के पुराविद् डॉ. वसीम खान ने पढ़ा है। ऐतिहासिक महत्व सामने आने के बाद इसकी जानकारी ग्वालियर के उपसंचालक पीसी महोबिया और आयुक्त पुरातत्व को भेजी गई है। पुरातत्व विभाग की टीम जल्द ही सिक्के मिलने वाले स्थल का निरीक्षण करेगी।

भरतगढ़ निवासी प्रीतम रजक ने खंडहर मकान नींव की खुदाई कराई थी। 20 सितम्बर को नींव के लिये खोदे गए गड्ढे में उसकी पत्नी अंजू रजक को 4 चांदी के सिक्के मिले। प्रीतम ने सिक्कों को अपने पास रखने के बजाय इसकी सूचना सबसे पहले दतिया विधायक घनश्याम सिंह को दी। विधायक के साथ वह कलेक्टर के पास पहुँचे। इसके बाद प्रीतम लिखित पत्र के साथ चारों सिक्के लेकर दतिया कलेक्टर कार्यालय पहुँचे और उन्हें जमा करा दिया।

तीन प्रमुख टकसालों में ढले थे सिक्के

पुराविद् डॉ. वसीम खान ने सिक्कों पर लिखे फारसी लेख का अध्ययन किया। प्रारम्भिक जानकारी के अनुसार चारों सिक्कों पर एक तरफ 'अल्लाह-हु-अकबर, जल्ले जलालहू' अंकित है। दूसरी तरफ फारसी भाषा में राशि वर्ष के साथ सिक्का जारी करने वाली टकसाल का नाम दर्ज है। इन सिक्कों को अहमदाबाद, आगरा और लाहौर की टकसालों से जारी किया गया बताया गया है।

धार्मिक समन्वय का सन्देश था दीन-ए-इलाही

अकबर ने विभिन्न धर्मों के बीच धार्मिक सद्भाव, सहिष्णुता और एकता की भावना को बढ़ावा देने के उद्देश्य से दीन-ए-इलाही की स्थापना की थी। इसे सामान्य अर्थों में कोई औपचारिक धर्म नहीं, बल्कि नैतिक मूल्यों, दया, दान और सम्राट के प्रति निष्ठा पर आधारित आचार-दर्शन माना जाता है। बीरबल इसके प्रमुख अनुयायियों में शामिल थे।

आयुक्त (पुरातत्व) मदन कुमार नागरगोजे के अनुसार सिक्कों को पढ़ने के बाद उनका ऐतिहासिक महत्व सामने आया है। विभाग की ओर से जल्द ही टीम को मौके पर भेजकर स्थल का निरीक्षण कराया जाएगा। इससे सिक्कों की प्राप्ति वाले स्थान और आसपास के क्षेत्र के पुरातात्विक महत्व का भी आकलन हो सकेगा।

पुरातत्व विभाग की टीम करेगी निरीक्षण

चारों सिक्के दतिया कलेक्टर कार्यालय में जमा कराए जा चुके हैं। सिक्कों पर अंकित फारसी लेख का अध्ययन भी किया गया है। अब पुरातत्व विभाग की टीम उस स्थल का निरीक्षण करेगी, जहाँ से सिक्के मिले हैं। इससे यह पता लगाने में मदद मिलेगी कि वहाँ और भी पुरावशेष मौजूद हैं या नहीं।

आगे आएं शोधार्थी

अपर मुख्य सचिव शिव शेखर शुक्ला ने कहा कि पुरातत्व विभाग 'मध्यप्रदेश को विश्व विरासत प्रदेश' के रूप में स्थापित करने के प्रयासों का हिस्सा है। उन्होंने विद्यार्थी एवं शोधार्थियों से इन रोचक खोजों को और गहराई से जानने, समझने और उन पर शोध करने के लिये आगे आने का आह्वान किया है।

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