झाँसी : ऐतिहासिक किले की तलहटी में 19 नवम्बर को आयोजित 'राष्ट्ररक्षा समर्पण पर्व' कार्यक्रम को सम्बोधित करते सीडीएस जनरल बिपिन रावत (फाइल फोटो)।

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झाँसी : भारत के पहले सीडीएस (चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ) जनरल बिपिन कुमार रावत की दुखद मृत्यु देश के लिए एक बड़ा सदमा है। कुछ दिन पहले ही तो उन्होंने वीरांगना की धरती झाँसी से पूरे देश को सम्बोधित करते हुए रानी लक्ष्मीबाई की वीरता का बखान किया था। अपने स्वागत भाषण के दौरान जनरल रावत ने यहाँ कहा था कि 'रानी झाँसी का बलिदान नारी शक्ति में साहस देता है।' पहली बार झाँसी आए जनरल रावत के यह शब्द अब उनके जाने के साथ ही झाँसी की धरती से अमर हो गए हैं।

राष्ट्र सेवा के लिए अपना पूरा जीवन देश के नाम कर चले जाने वाले सीडीएस जनरल बिपिन कुमार रावत आज से ठीक 20 दिन पहले (19 नवम्बर) राष्ट्र रक्षा समर्पण पर्व में झाँसी पहुँचे थे। यह उनका पहला झाँसी दौरा था जो अब अन्तिम दौरे की याद बनकर रह गया है। किले की तलहटी में आयोजित राष्ट्र रक्षा समर्पण पर्व पर झाँसी की धरती से प्रधानमन्त्री नरेन्द्र मोदी, रक्षा मन्त्री राजनाथ सिंह व अन्य अतिथियों का स्वागत करते हुए चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ जनरल बिपिन रावत ने कहा था कि महारानी लक्ष्मीबाई ने झाँसी को विशेष पहचान दिलायी है। रानी की प्रेरणा से नारी शक्ति में साहस आता है, जो तिरंगा के सम्मान और नैशन फ‌र्स्ट का सन्देश देता है। रानी का बलिदान देश की एकता, अखण्डता व वीरता की भावना जगाता है। रानी की गाथाएं इतिहास में दर्ज हैं, जिन्होंने अपने अदम्य साहस व वीरता से अंग्रेजों को अचम्भित कर दिया।

फाइल : वसीम शेख

समय : 08 : 00

Edited By: Jagran