0 प्रधानमन्त्री के दौरे के बाद आम पर्यटकों के लिए बदला-बदला ऩजर आएगा दुर्ग

0 किले के चारो तरफ बगैर स्वरूप बदले बनाया जाएगा हरियाली का गलियारा

झाँसी : प्रथम स्वतन्त्रता संग्राम की दीपशिखा वीरांगना महारानी लक्ष्मीबाई के वीरता को पर्यटक व सैलानी अब और ऩजदीक से महसूस कर सकेंगे। आ़जादी के पहले युद्ध में अंग्रे़जों को नाकों चने चबाने के लिए म़जबूर करने वाली रानी झाँसी व उनकी सहेलियों की दास्तान को दुर्ग के अन्दर व बाहर चारों तरफ देखी और समझी जा सकेगी। इसके लिए दुर्ग के चारों तरफ बगैर स्वरूप बदले हरियाली का गलियारा बनाया जा रहा है।

प्रधानमन्त्री नरेन्द्र मोदी 19 नवम्बर को वीरांगना महारानी लक्ष्मीबाई की जन्म-जयन्ती पर जब किले के प्राचीर से राष्ट्र को सम्बोधित करेंगे, तो झाँसी दुर्ग पूरी तरह बदला-बदला होगा। अभी तक पुरातत्व विभाग व अन्य विभागों को पूरा फोकस किले के अन्दर ही रहा है। युद्ध के दौरान रानी लक्ष्मीबाई के अपने पुत्र दामोदर राव को पीठ में बाँधकर किले से उतरने का स्थल दिखाया जाता है, तो लोग बरबस नीचे की तरफ देखकर उस स्थल पर जाकर देखना चाहते हैं, लेकिन इस स्थल को कई वर्षो से बन्द कर दिया गया है। चहारदीवारी होने से लोग वहाँ तक नहीं पहुँच पाते हैं। इस स्थान के आसपास बड़े-बड़े पत्थर तथा ऊबड़-खाबड़ ़जमीन अपने आप में युद्ध मैदान-सी लगती है। खण्डेराव गेट बाहर स्थित इस मैदान के साथ झाँसी दुर्ग के चारों तरफ देखने पर अंग्रे़जों के युद्ध के अवशेष देखे जा सकते हैं। रखरखाव के अभाव में यह स्थल धीरे-धीरे कूड़ा-करकट तथा कँटीली झाड़ियों में बदल गया है। प्रशासन व नगर निगम ने इस स्थल को अब आम लोगों के लिए खोलने का निर्णय लिया है। इसके लिए प्रधानमन्त्री की रैली मील का पत्थर साबित हो रही है।

खण्डेराव गेट बाहर स्थित मैदान में रानी झाँसी के कूदने वाले स्थल को प्रमुखता से उभारा जाएगा। ऐसा इसलिए ताकि पर्यटक वीरांगना के कूदने के स्थल पर खड़े होकर अपने को सन् 1857 की क्रान्ति से जोड़ सकें, युवा व महिलाएं इस स्थल पर खड़े होकर महारानी की वीरता को महसूस कर सकें। इस स्थल व दुर्ग के चारों तरफ स़फाई करायी जा रही है। बाहर खण्डेराव गेट मैदान, कोतवाली के आसपास रामचरित मानस स्थल, मिनर्वा चौराहा से दुर्ग की तरफ जाने वाले बाएँ व दाएँ तरफ की खाली ़जमीन को विशेष तौर पर स़फाई करने के बाद हरियाली रोपित कर गलियारा बनाया जाएगा। इन स्थलों को आपस में जोड़ने के लिए रास्ता भी बनाया जाएगा। इस दौरान झाँसी दुर्ग के आसपास के स्थल के स्वरूप में कोई परिवर्तन नहीं किया जाएगा। किले के चारों तरफ बड़े-छोटे पत्थर, ़जमीन में गड्ढे व हल्की पहाड़ी उसी तरह रहेगी, इसे समतल नहीं किया जाएगा। इससे नैसर्गिकता बनी रहेगी। किले के आसपास यही मौलिकता पर्यटकों के लिए आकर्षण का केन्द्र रहेगी।

फाइल-रघुवीर शर्मा

समय-7.10

14 अक्टूबर 21

Edited By: Jagran