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विश्व के शीर्ष पांच प्रतिशत वैज्ञानिकों में पूर्वांचल विश्वविद्यालय की कुलपति और प्राध्यापक शामिल

By Khalid ShahEdited By: Abhishek sharma
Published: Sun, 07 Jun 2026 11:42 AM (IST)

वीर बहादुर सिंह पूर्वांचल विश्वविद्यालय की कुलपति प्रो. वन्दना सिंह और प्राध्यापक डॉ. विक्रांत भटेजा को एससीआई आधारित वैश्विक रैंकिंग ...और पढ़ें

पूर्वांचल विश्वविद्यालय के कुलपति और प्राध्यापक विश्व के शीर्ष वैज्ञानिकों में शामिल।

पूर्वांचल विश्वविद्यालय के कुलपति और प्राध्यापक विश्व के शीर्ष वैज्ञानिकों में शामिल।

HighLights

  1. कुलपति व प्राध्यापक शीर्ष 5% वैज्ञानिकों में शामिल।

  2. विश्वविद्यालय की शोध क्षमता को वैश्विक पहचान मिली।

  3. युवा शोधार्थियों को उत्कृष्ट कार्य हेतु प्रेरणा मिलेगी।

जागरण संवाददाता, मल्हनी (जौनपुर)। वीर बहादुर सिंह पूर्वांचल विश्वविद्यालय ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर एक महत्वपूर्ण उपलब्धि हासिल की है। विश्वविद्यालय की कुलपति प्रो. वन्दना सिंह और इंजीनियरिंग संकाय के प्राध्यापक डॉ. विक्रांत भटेजा का नाम एससीआई (साइंस सिटेशन इंडेक्स) आधारित वैश्विक रैंकिंग में विश्व के शीर्ष पांच प्रतिशत वैज्ञानिकों की सूची में शामिल किया गया है।

इस उपलब्धि ने विश्वविद्यालय की शोध क्षमता और अकादमिक उत्कृष्टता को वैश्विक मंच पर नई पहचान दी है। यह रैंकिंग ओपनएलेक्स डाटाबेस के आधार पर विश्वभर के एक करोड़ से अधिक सक्रिय शोधकर्ताओं के वैज्ञानिक योगदान का बिब्लियोमेट्रिक विश्लेषण कर तैयार की जाती है। इसमें शोध पत्रों की संख्या, उनकी गुणवत्ता, उद्धरणों की संख्या तथा शोध कार्यों के प्रभाव जैसे मानकों को आधार बनाया जाता है।

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प्रो. वन्दना सिंह इससे पूर्व स्टैनफोर्ड विश्वविद्यालय और एल्सेवियर द्वारा जारी विश्व के शीर्ष दो प्रतिशत वैज्ञानिकों की सूची में भी स्थान प्राप्त कर चुकी हैं। पॉलिमर विज्ञान और नैनो प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में उनके शोध कार्यों को राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय स्तर पर व्यापक मान्यता मिली है। कुलपति के रूप में, वह विश्वविद्यालय में शोध, नवाचार और गुणवत्तापूर्ण शैक्षणिक वातावरण को प्रोत्साहित करने के लिए निरंतर प्रयासरत हैं।

वहीं, डॉ. विक्रांत भटेजा जैव-चिकित्सीय संकेत प्रसंस्करण, चिकित्सा छवि विश्लेषण, मशीन लर्निंग तथा कृत्रिम बुद्धिमत्ता के क्षेत्र में उल्लेखनीय शोध कर रहे हैं। उनके शोध पत्र आईईईई, स्प्रिंगर और एल्सेवियर जैसे प्रतिष्ठित अंतरराष्ट्रीय जर्नलों में प्रकाशित हो चुके हैं। उन्होंने 100 से अधिक शोध पत्रों तथा अनेक संपादित पुस्तकों का प्रकाशन किया है।

विश्वविद्यालय प्रशासन ने इसे संस्थान ही नहीं, बल्कि प्रदेश और देश के शैक्षणिक जगत के लिए भी गौरवपूर्ण उपलब्धि बताया है। उनका कहना है कि इस सम्मान से विश्वविद्यालय में शोध और नवाचार को नई गति मिलेगी तथा युवा शोधार्थियों को उत्कृष्ट कार्य के लिए प्रेरणा प्राप्त होगी।

यह उपलब्धि केवल व्यक्तिगत सम्मान नहीं, बल्कि पूर्वांचल विश्वविद्यालय के समूचे शोध परिवेश और अकादमिक उत्कृष्टता की पहचान है। विश्वविद्यालय में गुणवत्तापूर्ण शोध, नवाचार और अंतरराष्ट्रीय स्तर की शैक्षणिक संस्कृति विकसित करने के लिए निरंतर प्रयास किए जा रहे हैं। यह सम्मान हमारे शोधार्थियों और युवा वैज्ञानिकों को नए आयाम स्थापित करने के लिए प्रेरित करेगा। भविष्य में भी हम शोध की गुणवत्ता और वैश्विक सहयोग को और सशक्त बनाने के लिए प्रतिबद्ध रहेंगे।

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