जागरण संवाददाता, जौनपुर: पापा..पापा दशहरा है, नए कपड़े दिला दीजिए। बेटा फिर कभी। इस महीने तनख्वाह नहीं मिली है। यह हालत किसी एक नहीं बल्कि जिले में तैनात 260 ग्राम विकास व ग्राम पंचायत अधिकारियों की है। जनपद के ओडीएफ यानी खुले में शौच से मुक्त न होने के कारण इन सभी का सितंबर महीने का वेतन भुगतान हुक्मरानों ने रोक दिया है। इसे लेकर उनमें भारी आक्रोश व्याप्त है। वे वेतन नहीं तो काम नहीं का मन बना रहे हैं। एक-दो दिन में इसका ऐलान कर सकते हैं।

बता दें, स्वच्छ भारत मिशन के तहत जिले के सभी राजस्व गांवों में 4,14,594 शौचालय बनवाकर बीते दो अक्टूबर अर्थात गांधी जयंती तक सभी गांवों को ओडीएफ घोषित किया जाना था। जिले में फिलवक्त 4,01,489 शौचालय बन सके हैं अभी 13,105 शौचालयों का निर्माण होना है। इससे प्रदेश में जिले की स्थिति खराब हो गई है। इसी का हवाला देते हुए नौकरशाहों ने ग्राम सचिवों का वेतन भुगतान रोक दिया है लेकिन अपना वेतन ले लिया है। इसी को लेकर ग्राम सचिवों में गुस्सा है।

ग्राम पंचायत सचिवों का कहना है कि यह उनकी मेहनत का नतीजा है कि चार लाख से अधिक शौचालय बन गए हैं। हकीकत तो यह है कि बजट की कमी, बारिश और लाभार्थियों की उदासीनता के चलते इतने भी शौचालयों का निर्माण असंभव था। लक्ष्य को पूर्ण करने के लिए जनपद को 358 करोड़ रुपये मिलने चाहिए थे जबकि अब तक इस मद में सिर्फ 238 करोड़ रुपये मिले हैं। ग्राम विकास अधिकारी संघ के अध्यक्ष डा. प्रदीप ¨सह व ग्राम पंचायत अधिकारी संघ के अध्यक्ष डा. फूलचंद कन्नौजिया, मंत्री रामकृष्ण पाल, केके मिश्र, संजय श्रीवास्तव, सतीश ¨सह आदि का कहना है कि उच्चाधिकारियों द्वारा वेतन भुगतान रोका जाना मनमाना, अविवेकपूर्ण और अन्यायपूर्ण है। वह भी ऐसे समय जबकि तो भारतीय संस्कृति से जुड़े दो बड़े पर्व सिर पर हैं। जिलाधिकारी को ई-मेल भेजकर वस्तुस्थिति से अवगत करा दिया गया है। जल्द ही उच्चाधिकारी वेतन का भुगतान नहीं करते हैं तो ओडीएफ का कार्य रोक दिया जाएगा।

Posted By: Jagran

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