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प्रयोगशाला में उगाया ऑयस्टर मशरूम, अब बिस्कुट और नमकीन बनाने की तैयारी

By khalid shah Edited By: Abhishek sharma
Published: Wed, 04 Nov 2026 02:47 PM (IST)

वीर बहादुर सिंह पूर्वांचल विश्वविद्यालय के बीएससी एग्रीकल्चर के छात्रों ने प्रयोगशाला में ऑयस्टर मशरूम का सफल उत्पादन किया। अब ...और पढ़ें

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HighLights

  1. बीएससी एग्रीकल्चर छात्रों ने लैब में उगाए ऑयस्टर मशरूम।

  2. मशरूम से बिस्कुट, नमकीन, समोसा बनाने की तैयारी।

  3. कुलपति ने छात्रों के व्यावहारिक प्रयास की सराहना की।

जागरण संवाददाता, मल्हनी (जौनपुर)। वीर बहादुर सिंह पूर्वांचल विश्वविद्यालय के बीएससी एग्रीकल्चर के विद्यार्थियों ने प्रयोगशाला में ऑयस्टर मशरूम का उत्पादन कर अपनी व्यावहारिक दक्षता का परिचय दिया है। विद्यार्थियों ने कुलपति प्रो. राकेश कुमार सिंह से उनके कार्यालय में मुलाकात कर स्वयं उत्पादित ताजा मशरूम भेंट किया।

इस दौरान उन्होंने उत्पादन की प्रक्रिया, अपनाई गई तकनीक और प्रयोग के अनुभव साझा किए। अब विद्यार्थी मशरूम से बिस्कुट, नमकीन और समोसा जैसे खाद्य उत्पाद तैयार करने की दिशा में प्रयोग करने की योजना बना रहे हैं।

कुलपति प्रो. राकेश कुमार सिंह ने विद्यार्थियों के प्रयास की सराहना करते हुए कहा कि कृषि शिक्षा का उद्देश्य केवल पुस्तकीय ज्ञान तक सीमित नहीं होना चाहिए।विद्यार्थियों को प्रयोगशाला और खेतों में व्यावहारिक गतिविधियों के माध्यम से सीखने के अवसर मिलने चाहिए। ऐसे प्रयासों से उनमें वैज्ञानिक दृष्टिकोण, नवाचार और उद्यमशीलता की भावना विकसित होती है। उन्होंने कहा कि मशरूम उत्पादन कृषि क्षेत्र में स्वरोजगार और उद्यमिता का बेहतर विकल्प है।

कम स्थान और सीमित संसाधनों में भी इसका उत्पादन संभव है। विद्यार्थियों को आधुनिक कृषि तकनीकों को अपनाकर इस क्षेत्र में नए अवसर तलाशने चाहिए।मशरूम का उत्पादन विश्वविद्यालय परिसर स्थित महर्षि पराशर कृषि विज्ञान संस्थान की प्रयोगशाला में किया गया। इसके लिए प्ल्यूरोटस सजोर-काजू और प्ल्यूरोटस फ्लोरिडा प्रजातियों के कुल 63 बैग तैयार किए गए। स्पॉनिंग के लगभग 25 दिन बाद पहली बार मशरूम की तुड़ाई की गई।

विद्यार्थियों ने बताया कि इस प्रयोग से उन्हें कक्षा में सीखे गए सैद्धांतिक ज्ञान को वास्तविक परिस्थितियों में लागू करने और उत्पादन की बारीकियां समझने का अवसर मिला है।डॉ. शुभम सिंह ने बताया कि मौसम के अनुकूल वर्षभर मशरूम की विभिन्न प्रजातियों का उत्पादन किया जा सकता है। सर्दियों में बटन और ऑयस्टर, जबकि गर्मियों में मिल्की और पैडी स्ट्रॉ मशरूम की खेती की जा सकती है।

मशरूम कम कैलरी वाला तथा प्रोटीन और फाइबर से भरपूर खाद्य पदार्थ है। इसमें विटामिन बी-2, बी-3 और बी-5 के साथ पोटैशियम, सेलेनियम, जिंक सहित कई खनिज तत्व पाए जाते हैं। प्रति 100 ग्राम मशरूम में लगभग तीन ग्राम प्रोटीन, 3.28 ग्राम कार्बोहाइड्रेट और तीन मिलीग्राम कैल्शियम पाया जाता है।इस अवसर पर संस्थान के समन्वयक प्रो. गिरिधर मिश्रा,प्रो. मनोज मिश्र,डॉ. जेपी सिंह, डॉ. हरिवंश सिंह, डॉ. प्रदीप कुमार यादव, डॉ. सत्यम प्रजापति एवं डॉ. विपिन उपस्थित रहे।

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