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यूपी में नदी किनारे बसे किसानों को मिलेगी प्राकृतिक खेती की ट्रेनिंग, जौनपुर में फ्री दिए जाएंगे कृषि उपकरण

Published: Fri, 25 Sep 2026 02:46 PM (IST)

जौनपुर में रासायनिक उर्वरकों के दुष्प्रभाव को रोकने के लिए प्राकृतिक खेती को बढ़ावा दिया जा रहा है। जिले के ...और पढ़ें

इस फोटो को एआई टूल की मदद से बनाया गया है।

इस फोटो को एआई टूल की मदद से बनाया गया है।

HighLights

  1. जौनपुर में प्राकृतिक खेती को बढ़ावा देने की विशेष पहल।

  2. 55 गांवों के 6,775 किसानों को मिलेगा प्रशिक्षण और उपकरण।

  3. जीवामृत, घनामृत, बीजामृत बनाने का गुर सिखाया जाएगा।

जागरण संवाददाता, जौनपुर। रासायनिक उर्वरकों व कीटनाशकों के अंधाधुंध प्रयोग से बीमार हो रही मिट्टी तथा मानव स्वास्थ्य पर पड़ रहे प्रतिकूल प्रभाव को रोकने के लिए शासन स्तर विशेष पहल की गई है। जिले में प्राकृतिक खेती को बढ़ावा देने के उद्देश्य से प्रथम चरण में आदि गंगा गोमती के किनारे बसे 10 विकास खंडों के 55 गांवों का चयन किया गया है। इन गांवों के पांच सौ किसानों को कृषि विज्ञान केंद्र पर प्राकृतिक खेती का प्रशिक्षण दिया जाएगा।

जनपद में अभियान से 6,775 किसानों को जोड़कर 3,750 हेक्टेयर क्षेत्रफल में प्राकृतिक खेती कराने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। इसके सुचारू संचालन के लिए 10 क्लस्टर बनाए गए हैं।

चयनित किसानों को प्राकृतिक खेती के गुर सिखाने के साथ ही जीवामृत, घनामृत और बीजामृत तैयार करने का प्रशिक्षण दिया जाएगा। इतना ही नहीं, जैविक इनपुट तैयार करने में सहूलियत के लिए किसानों को आवश्यक उपकरण भी निश्शुल्क उपलब्ध कराए जाएंगे।

उप परियोजना निदेशक (आत्मा) डॉ. रमेश चंद्र यादव ने बताया कि प्राकृतिक संसाधनों के पूर्ण इस्तेमाल से की जाने वाली कृषि ही प्राकृतिक खेती है। यह केवल फसल उत्पादन तक सीमित नहीं है, बल्कि पशुपालन में भी यदि पशुओं को भोजन और दवाएं प्राकृतिक रूप से दी जाएं, तो उनके उत्पाद भी जैविक श्रेणी में आते हैं।

प्राकृतिक खेती के प्रमुख घटक

मृदा स्वास्थ्य सुधार: गर्मी में गहरी जुताई, मल्चिंग और फसल चक्र का पालन।
जैविक पोषण: गोबर की खाद, हरी खाद, वर्मी कंपोस्ट, पीएसबी कल्चर, माइकोराइजा और राइजोबियम का उपयोग।
कीट व रोग नियंत्रण: ट्राइकोडर्मा और ब्यूवेरिया बेसियाना जैसे जैविक नियंत्रकों का प्रयोग।

इन 10 विकास खंडों का हुआ चयन

प्राकृतिक खेती योजना के तहत जिले के बदलापुर, खुटहन, बक्शा, करंजाकला, धर्मापुर, सिरकोनी, मुफ्तीगंज, जलालपुर, केराकत और डोभी ब्लाक को शामिल किया गया है।

ऐसे तैयार होंगे जैविक इनपुट

जीवामृत: गाय का गोबर, गोमूत्र, गुड़, चने का बेसन, बरगद या पीपल के नीचे की मिट्टी और पानी।
बीजामृत: गाय का गोबर, गोमूत्र, चूना (लाइम), गेहूं का दाना, पेड़ के नीचे की मिट्टी और पानी।
घनामृत: गाय का गोबर, गोमूत्र, गुड़ और पानी।
नीमास्त्र: गोमूत्र, नीम की पत्ती और पानी।
ब्रह्मास्त्र: गोमूत्र, नीम, शरीफा (कस्टर्ड सेब), पपीता, अनार व अमरूद के पत्ते और पानी।
आग्नेयास्त्र: गोमूत्र, इपोमोआ (बेशर्म) के पत्ते, हरी मिर्च, लहसुन, नीम के पत्ते और पानी।

जनपद में चयनित 55 गांवों में प्राकृतिक खेती के लिए किसानों को जागरूक करने के साथ ही प्रशिक्षण दिया जा रहा है। इसी क्रम में 28 सितंबर को कृषि विज्ञान केंद्र पर 500 किसानों को प्रशिक्षण दिया जाएगा। इसके साथ ही विभाग के विशेषज्ञ समय-समय पर जाकर उन्हें जैविक उत्पाद बनाने में सहयोग करेंगे। -अश्वनी सिंह, उप निदेशक कृषि।

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