जौनपुर में बांस से प्रैक्टिस कर जापान में कांसे पर रोहित यादव ने साधा निशाना, घर वालों ने मोबाइल पर भाला फेंकते देखा
जौनपुर के रोहित यादव ने जापान में एशियन गेम्स की पुरुष भाला फेंक स्पर्धा में कांस्य पदक जीता, जो उनके ...और पढ़ें

जौनपुर के रोहित यादव ने एशियन गेम्स में भाला फेंक में कांस्य पदक जीता।
HighLights
रोहित यादव ने जापान एशियन गेम्स में कांस्य पदक जीता।
जौनपुर के रोहित ने 84.35 मीटर भाला फेंककर पदक हासिल किया।
सीमित संसाधनों के बावजूद रोहित ने कड़ी मेहनत से सफलता पाई।
जागरण संवाददाता, जौनपुर। सपने बड़े हों और हौसले बुलंद तो अभाव भी मंजिल का रास्ता नहीं रोक पाते। कभी घर के आंगन में लकड़ी व बांस के भाले से अभ्यास करने वाला एक ग्रामीण युवक आज विश्व में अपनी मेधा का परचम लहराया है। मीरगंज क्षेत्र के अदारी गांव के रोहित यादव की यह सफलता संघर्ष, धैर्य और परिवार के अटूट विश्वास की प्रेरक कहानी है।
रोहित की सफलता के पीछे उनके पिता सभाजीत यादव का बड़ा योगदान है। स्वयं मैराथन धावक रहे सभाजीत ने बेटे की प्रतिभा को बचपन में ही पहचान लिया था। आर्थिक तंगी के कारण महंगा जैवलिन खरीदना संभव नहीं था, इसलिए वर्ष 2013 में उन्होंने घर पर ही लकड़ी का भाला तैयार किया और उसी से बेटे का अभ्यास शुरू कराया। सीमित संसाधनों के बावजूद परिवार ने कभी रोहित का हौसला टूटने नहीं दिया।
बरेका वाराणसी में खिलाड़ी रहे रोहित के हाथों ने कभी बांस से जौनपुर जैसे खेल के लिहाज से पिछड़े जिले में भाला फेंकने का जौहर साधना शुरू किया था। समय के साथ गरीबी की रेखा को पार कर कदम आगे बढ़े तो भाला फेंकने में नाम भी चमकने लगा और देश के शीर्ष खिलाड़ियों में नाम शामिल एक दिन हो गया। वक्त बदला तो अब जापान में जौनपुर में कभी बांस को भाला बनाकर फेंकने का हुनर काम आया और देश की झोली में एक कांस्य पदक आ गया।
जापान में खेले जा रहे एशियन गेम्स के पुरुष भाला फेंक फाइनल में भारत के रोहित यादव ने 84.35 मीटर के थ्रो के साथ कांस्य पदक अपने नाम किया। वाराणसी से जुड़े रोहित ने फाइनल में अपने दमदार प्रयास से पोडियम पर जगह बनाई। वहीं भारत के ही यशवीर ने 85.72 मीटर की दूरी नापकर रजत पदक हासिल किया। प्रतियोगिता में श्रीलंका के खिलाड़ी ने 88.55 मीटर का भाला फेंकते हुए स्वर्ण पदक पर कब्जा जमाया।
रोहित ने मुकाबले में अपनी तकनीक और अनुभव का इस्तेमाल करते हुए भाले को 84.35 मीटर तक पहुंचाया। उनका यह प्रदर्शन उन्हें एशियन स्तर की इस बड़ी प्रतियोगिता में पदक दिलाने में सफल रहा। फाइनल में भारतीय चुनौती को यशवीर ने भी मजबूत किया। उनके 85.72 मीटर के थ्रो ने उन्हें रजत पदक दिलाया। भारतीय खिलाड़ियों के प्रदर्शन से भाला फेंक में देश को दो पदक मिले।
रोहित का वाराणसी से खास जुड़ाव है। वह बीएलडब्ल्यू में कार्यरत हैं और मूल रूप से जौनपुर के डभिया के रहने वाले हैं। बड़े अंतरराष्ट्रीय मंचों पर देश का प्रतिनिधित्व कर चुके रोहित के लिए यह पदक वापसी के सफर में महत्वपूर्ण उपलब्धि है। रोहित ने इससे पहले भी अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में भारत का प्रतिनिधित्व किया है।
इस सत्र में उनका 87.05 मीटर का प्रदर्शन भी चर्चा में रहा था। एशियन गेम्स के फाइनल में 84.35 मीटर का थ्रो कर कांस्य पदक हासिल करने के साथ उन्होंने अंतरराष्ट्रीय मंच पर फिर अपनी मौजूदगी दर्ज कराई।
रोहित यादव की इस उपलब्धि ने न केवल उनके परिवार को गर्वित किया है, बल्कि पूरे देश को प्रेरित किया है। उनके संघर्ष और मेहनत की कहानी युवा खिलाड़ियों के लिए एक मिसाल बन गई है। अब रोहित का लक्ष्य अगले ओलंपिक में और बेहतर प्रदर्शन करना है। उनके इस सफर से यह संदेश मिलता है कि कठिनाइयों के बावजूद अगर मेहनत की जाए तो सफलता अवश्य मिलती है।
