नौपेड़वा (जौनपुर): गुरुवार आधी रात के बाद चन्द्रमा के इर्द-गिर्द बना विशाल गोल घेरा लोगों को अचंभित कर रहा था। अद्भुत आकाशीय नजारा देखने हेतु लोगों ने अपने परिजनों को जगाया। रात दो बजे से चार बजे तक दिखा घेरा धीरे-धीरे स्वत: समाप्त हो गया। चन्द्रमा के बिल्कुल करीब वृहस्पति ग्रह भी स्पष्ट रूप से चमक रहा था। इस बारे में अपने पैत्रिक आवास चुरावनपुर बक्शा में छुट्टियां बिताने आए विज्ञान संचारक डा.अरविन्द मिश्र ने बताया कि यह एक दुर्लभ आकाशीय घटना है। जो प्राय: किसी आने वाले तूफान का आभास देता है।

डा.मिश्र ने बताया कि अमेरिका में आए हुए सैन्डी तूफान के ठीक पहले 28 अक्टूबर को पूर्वी तट के निवासियों ने एक ऐसा ही आकाशीय नजारा देखा था। वैज्ञानिक इस आकाशीय घटना को चन्द्र छल्ला 'ल्यूनर हालो' अथवा मूल रिंग का नाम देते हैं।

वैज्ञानिकों का यह भी मानना है कि जब आसमान में एक खास प्रकार के बादल जिसे सिर्रस बादल कहा जाता है जो बहुत ऊंचाई पर होते हैं तथा बर्फ के क्रिस्टल बनते हैं तो चन्द्रमा के प्रकाश के परावर्तन से चन्द्र छल्ले का बनना दिखलाई देता है। लोक कथाओं में ऐसे चन्द्र छल्ले का बनना दिखना किसी तूफान के आने का संकेत माना जाता है जिसे वैज्ञानिक भी पुष्ट करते हैं। सैंडी तूफान के आने के ठीक पहले एक विशाल चन्द्र छल्ले का दिखना इसका प्रमाण है। आकाश में गुरुवार की रात इस छल्ले को तमाम लोग देखे जिसे लेकर तरह-तरह की चर्चाएं रही।

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