विज्ञापन हटाएंसिर्फ खबर पढ़ें

विधायक विनोद चतुर्वेदी ने थामा भाजपा का दामन, अब बदलेगा कालपी-उरई विधानसभा सीटों का सियासी गणित

Published: Wed, 14 Oct 2026 03:21 PM (IST)

सपा विधायक विनोद चतुर्वेदी अब भाजपा में शामिल हो गए हैं, जिससे जालौन की कालपी और उरई विधानसभा सीटों के राजनीतिक समीकरण बदल गए हैं।

विनोद चतुर्वेदी, कालपी विधायक

विनोद चतुर्वेदी, कालपी विधायक

HighLights

  1. सपा विधायक विनोद चतुर्वेदी भाजपा में शामिल।

  2. मुख्यमंत्री योगी के संकेत हुए अब सच।

  3. कालपी, उरई विधानसभा समीकरण बदले।

जागरण संवाददाता, जालौन। 25 अगस्त को मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने उरई दौरे के दौरान मंच से विनोद चतुर्वेदी का नाम लेकर सभी को चकित कर आगे भविष्य की तरफ शायद जो इशारा किया था बुधवार को वह सच साबित हो गया। अब विनोद चतुर्वेदी जब भाजपा के हो चुके हैं तो जालौन जनपद की कालपी और उरई विधानसभा क्षेत्रों के समीकरण भी बदलेंगे।

यहां एक साल से टिकट के लिए जिन नामों की चर्चा तेज थी उनमें इनका नाम सबसे आगे था। ऐसे में उन दावेदारों की चिंता बढ़ सकती है जो अभी तक कालपी में पूरजोर दावेदारी पेश कर रहे थे। वर्तमान में विनोद चतुर्वेदी कालपी सीट से विधायक हैं। वह इसके पहले 2007 में कांग्रेस से उरई सदर सीट से विधायक रह चुके हैं।

कालपी विधानसभा क्षेत्र से सपा से विधायक चुने गए विनोद चतुर्वेदी को बीच में ही पार्टी के विरोध में जाना पड़ा था। वह राज्यसभा में पार्टी प्रत्याशी के पक्ष में मतदान करने गए तभी से राजनीति के नए समीकरण शुरु हो गए थे।

अब उन्होंने गौरीगंज स्थित कार्यक्रम में प्रदेश अध्यक्ष पंकज चौधरी के समक्ष भाजपा की सदस्यता ले ली है। अब कालपी विधानसभा सीट से टिकट की दावेदारी करने वालों के लिए दावेदारी ठोकना आसान नहीं रहेगी। क्योंकि विनोद चतुर्वेदी भी अब टिकट के दावेदारों में सबसे आगे हैं।

2007 में कांग्रेस के टिकट पर चुनाव लड़े

कांग्रेस पार्टी से राजनीतिक की शुरुआत करने वाले विनोद चतुर्वेदी अभी कालपी विधानसभा क्षेत्र से सपा के विधायक हैं। 2024 में उन्होंने राज्यसभा चुनाव के दौरान भाजपा के पक्ष में अपना मत किया तो उसी समय से कयास लगने लगे कि वह जल्द ही भाजपा में शामिल हो जाएंगे। वह पहले 2007 में कांग्रेस से उरई विधानसभा क्षेत्र से विधायक चुने गए।

2022 में सपा से कालपी विधानसभा क्षेत्र से विधायक हैं। वह कांग्रेस पार्टी में चार बार जिलाध्यक्ष रहे जिससे उनका राजनीतिक सफर काफी लंबा रहा है। कांग्रेस में प्रियंका गांधी के सलाहकार भी रह चुके हैं। उन्हें पार्टी की सलाहकार परिषद का सदस्य भी बनाया गया था।

2007 में वह सदर सीट से कांग्रेस के टिकट पर चुनाव लड़े और जीत हासिल की थी। 2017 में उनके पुत्र ने नगर पालिका का चुनाव भी लड़ा लेकिन जीत नहीं मिली। वह विधानसभा 2022 के चुनाव से पहले सपा में शामिल हो गए और कालपी विधानसभा क्षेत्र से उन्हें टिकट मिला।

उन्होंने निषाद पार्टी के छोटे सिंह को हराकर जीत हासिल की। राज्यसभा के चुनाव 2024 में भाजपा के पक्ष में वोट किया तभी से तय हो गया था कि वह जल्द ही भाजपा में शामिल हो सकते हैं। क्रास वोटिंग किए जाने के बाद भी सपा ने उनको पार्टी से निकाला नहीं लेकिन विनोद चतुर्वेदी भाजपा के सभी कार्यक्रमों में शामिल होते रहे।

बीते अगस्त में मुख्यमंत्री के कार्यक्रम में उन्हें मंच पर स्थान मिला और उनका नाम मुख्यमंत्री ने मंच से लिया था। अब उन्होंने 14 अक्टूबर को भाजपा में शामिल होने की घोषणा कर दी है। इससे राजनीतिक गलियारों में हलचल तेज है। कालपी विधानसभा सीट से जो टिकट के दावेदार थे वह सकते में आ गए हैं।

भाजपा के पक्ष में वोट करने बाद से ही उन्हें सुरक्षा भी मुहैया करा दी गई थी। उनके पुत्र आशीष चतुर्वेदी ने 2024 में ही भाजपा की सदस्यता ग्रहण कर ली थी। विनोद चतुर्वेदी अब गौरीगंज में हुए कार्यक्रम में स्मृति ईरानी व प्रदेश अध्यक्ष के समक्ष भाजपा में शामिल हो गए हैं।

टिकट के दावेदारों में बढ़ी हलचल

भाजपा से जो अब तक टिकट की दावेदारी कर रहे थे उन उम्मीदवारों में हलचल बढ़ गई है। उन्हें लगने लगा है कि अब विनोद चतुर्वेदी जो अब तक सपा से विधायक थे पार्टी में शामिल हो गए हैं तो उनका कहीं न कहीं टिकट कट सकता है और विनोद को टिकट मिल सकता है।

इसके अलावा अगर समाजवादी पार्टी आने वाले समय में किसी ठाकुर पर अपना दांव लगाती है तो बसपा ने हाल ही में ठाकुर समाज का प्रत्याशी घोषित किया तो वोटरों का रुझान सबसे अहम रहेगा। क्योंकि क्षेत्र में सबसे अधिक वोटर निषाद, ठाकुर समाज के हैं जबकि ब्राह्मण समाज के सबसे कम वोटर हैं। भाजपा में शामिल हुए विनोद चतुर्वेदी अब टिकट के मजबूती से दावेदारी करेंगे।

यह भी पढ़ें- यूपी के शाहजहांपुर से गुजरी बांग्लादेश की ट्रेन, देखने के लिए लोगों की उमड़ी भीड़