संवाद सूत्र, सिरसा कलार : ईंटों पीएचसी में ईसीजी जांच तक की सुविधा नहीं है। जिसकी वजह से मरीज हलकान हो जाते हैं। इसी के साथ कई और जांच सुविधाओं को अभी तक स्थापित नहीं कराया गया है। साथ ही संसाधनों का भी एक अलग रोना रहता है। खास कर गर्भवती महिलाओं को कोरोना काल में अधिक परेशानी उठानी पड़ रही है।

राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के तहत गर्भवती महिलाओं के बेहतर स्वास्थ्य के लिए सभी सरकारी स्वास्थ्य केंद्रों पर दवा मुफ्त में दी जाती है, लेकिन यहां यह मिलना भी मुश्किल है। वहीं चेकअप के लिए आने वाली गर्भवती महिलाओं को आयरन की दवा तक नहीं मिल पाती हैं। अस्पताल में नार्मल खांसी, जुकाम व बुखार की दवा दी जाती है। अन्य दबा के लिए भी मेडिकल स्टोरों पर मरीज जाने के लिए विवश हो जाते है। गंभीर रोगियों के लिए यहां कोई उपचार की व्यवस्था नहीं है। उन्हें कुठौंद या उरई ही जाना पड़ता है। एक अच्छी बात यह है कि अस्पताल में सभी रूम नए और साफ-सुथरे हैं।

2003 में कराया गया था निर्माण

कुठौंद ब्लॉक के ग्रामीण क्षेत्र के मरीजों के लिए करोड़ों की लागत से सन 2003 में पीएचसी का निर्माण कराया गया। 19 साल में भी आज तक स्वास्थ्य अधिकारियों को बढ़ाने पर कोई जोर नहीं दिया। यही कारण है कि अब कोरोना काल में मरीजों को अधिक परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। मरीज निजी अस्पताल जाने को विवश

18 हजार की आबादी इस पीएचसी पर निर्भर है, लेकिन मरीजों को इलाज की सुविधा न होने से मजबूरन प्राइवेट अस्पतालों में जाने को विवश है। जहां मरीज पहले लंबी लाइन और फिर महंगा इलाज कराने में पसीने छोड़ रहे है। डाक्टरों की कमी बनी मुसीबत ग्रामीण लल्लू दुबे ने बताया कि ग्रामीणों की सुविधा के लिए पीएचसी का निर्माण तो कराया गया। लेकिन स्त्री रोग विशेषज्ञ, नेत्ररोग विशेषज्ञ, एनेस्थीसिया, आर्थो सर्जन, नेत्र स्पेशलिस्ट, फिजीशियन व डेंटल रोग विशेषज्ञ की तैनाती अभी तक नहीं की गई है। वहीं स्टाफ नर्स, सफाई कर्मचारी व वार्ड ब्वाय की है। इनके अभाव में अधिक परेशानी उठानी पड़ती है। फिर भी समस्या दूर नहीं हो सकी।

ग्रामीण प्रेम सिंह तोमर का कहना है कि पीएचसी में पैथोलॉजी तक संचालित नहीं हो सकी है। साथ ही अल्ट्रासाउंड, सिटी स्कैन, टीबी जांच, दंत एक्सरे, ब्लड बैंक, अल्ट्रासाउंड, डिजिटल एक्सरे, ईसीजी, सीवीसी व डायलिसिस की सेवाएं उपलब्ध नहीं है। इन जांचों के उपलब्ध न होने के कारण लोगों को निजी चिकित्सालय जाने पर हजारों रुपये फिजूल में खर्च करने पड़ रहे हैं।

Edited By: Jagran