झासी: महानगर की प्यास बुझाने के लिए शुरू की गई महानगर पेयजल योजना में काम करने वाले पेटी ठेकेदारों का भुगतान इजरायल में अटक गया है। सरकार ने मुख्य कंपनी को पार्ट पेमेण्ट कर दिया है, जबकि कंपनी ने काम के अनुरूप आगे भुगतान नहीं किया, जिससे पेटी ठेकेदारों ने अब हाथ सिकोड़ना शुरू कर दिए हैं। इसका असर महायोजना के अनेक कार्यो पर पड़ने लगा है।

अगले 30 साल तक महानगर को पानी की समस्या से मुक्ति दिलाने के लिए सरकार ने अमृत योजना के तहत महानगर पेयजल योजना की सौगात दी है। लगभग 800 करोड़ की इस योजना में 445 करोड़ का काम इ़जरायल की तहल कन्सल्टिंग एंजिनियर प्राइवेट लिमिटेड को दिया गया है। कंपनी ने सभी कार्यो को अलग-अलग विभाजित कर पेटी ठेकेदारों को काम दे दिया है। जल निगम व शासन के प्रति जबावदेही इजरायल की कंपनी की है। कंपनी द्वारा काम के अनुरूप बिल लगाया जाता है, जिसका भुगतान सीधा शासन स्तर से कर दिया जाता है। शासन द्वारा अब तक कंपनी को 82 करोड़ रुपए का भुगतान किया जा चुका है। सूत्र बताते हैं कि इजरायल की कंपनी ने शासन से भुगतान तो प्राप्त कर लिया है, लेकिन परियोजना पर काम करने वाले पेटी ठेकेदारों का कुछ पैसा रोक लिया है। इससे ठेकेदारों ने काम से हाथ खींचना प्रारम्भ कर दिया है। इसका असर परियोजना पर पड़ने लगा है। बताया गया है कि इजरायल की कंपनी को 9 ओवर हेड टैंक (ओएचटी) का निर्माण कराया जाना है। इसके अलावा बबीना में वॉटर ट्रीटमेण्ट प्लाट की स्थापना, माताटीला बांध में इंटेकवेल का निर्माण भी कराया जाना है। माताटीला बांध से बबीना तक मेन पाइप लाइन बिछाने के साथ ही 288 किलोमीटर सप्लाई लाइन बिछाने का कार्य भी इजरायल की कंपनी को करना है। भुगतान के अभाव में पेटी ठेकेदारों ने इन सभी कार्यो की गति धीमी कर दी है। कुछ ओवर हैड टैंक का काम लगभग रुक गया है, जबकि सप्लाई लाइन भी 288 किलोमीटर में से महज 10 किलोमीटर ही बिछ पाई है। ऐसे में जल निगम के सामने समय पर परियोजना पूरी करने का संकट खड़ा होने लगा है। जल निगम ने कंपनी को पत्र लिखकर काम में तेजी लाने को कहा है। कोट

कंपनी द्वारा बबीना में वाटर ट्रीटमेण्ट प्लाट स्थापित करने के साथ ही माताटीला बांध से मेन पाइप लाइन बिछाने, 288 किलोमीटर सप्लाई लाइन बिछाने, बांध में इंटेकवेल व 9 ओवर हैड टैंक बनाने जैसे कई काम कराए जाने हैं। पाइप की आपूर्ति रुकने से मेन पाइन बिछाने का कार्य ठप हो गया है। कंपनी को पत्र लिखकर कार्य में तेजी लाने को कहा गया है।

हिमांशु नेगी, प्रोजेक्ट मैनेजर, जल निगम

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