जालौन: नवाचार बढ़े पर आज भी कमर झुकाकर पढ़ रहे 62 हजार बच्चे, 933 स्कूलों में अब भी है फर्नीचर की कमी
उरई/जालौन के 933 प्राथमिक विद्यालयों में 62 हजार बच्चे आज भी फर्श पर बैठकर पढ़ने को मजबूर हैं, जबकि उच्च ...और पढ़ें
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यह तस्वीर एआई द्वारा बनाई गई है।
HighLights
उरई के 933 प्राथमिक स्कूलों में फर्नीचर नहीं।
62 हजार बच्चे आज भी फर्श पर पढ़ते हैं।
शिक्षा विभाग ने 8 करोड़ के बजट की मांग की।
जागरण संवाददाता, उरई। परिषदीय स्कूलों में शिक्षकों के प्रयास से कई तरह के नवाचार बढ़ गए हैं। उच्च प्राथमिक व कंपोजिट विद्यालयों को अच्छा बजट मिलने से उनमें फर्नीचर, स्मार्ट बोर्ड के साथ कई तरह की सुविधाएं कर दी गई हैं। वहीं प्राथमिक विद्यालयों में पढ़ने वाले 933 स्कूलों के 62 हजार बच्चों को आज भी कक्षों में बैठकर कमर झुकाकर पढ़ना पड़ रहा है। विभाग ने भले ही पांच साल में 15 बार फर्नीचर के लिए बजट मांगा है लेकिन सतत पैरवी न होने के कारण फर्नीचर की सुविधा नहीं मिल सकी। यही कारण कि इस बार भी सर्दी के मौसम में बच्चों को फर्श पर पढ़ाई करनी पड़ेगी।
जिले की भले ही साक्षरता दर आंकड़ों में 76 प्रतिशत दिखाई दे रही हो लेकिन हकीकत कुछ और ही है। परिषदीय विद्यालयों को कई तरह से नए नवाचार कराने का संदेश शासन तक भेजा जाता है। वहीं शासन को विभाग ने पांच साल में 15 बार फर्नीचर के लिए बजट की डिमांड भेजी है। दूसरे विद्यालयों के बच्चों को देखकर सोचते हैं कि काश वह भी फर्नीचर पर बैठकर शान से पढ़ाई करें। सर्दी में जब लोग फर्श पर खड़ा होना पसंद नहीं करते तब बच्चे टाट फट्टी पर शिक्षण कार्य करते हैं। उच्च प्राथमिक के 309 व कंपोजिट के 244 विद्यालयों में बच्चों के अच्छी फर्नीचर पर शिक्षण कार्य कराया जा रहा है।
आठ करोड़ बजट भेजी है डिमांड
शिक्षा विभाग ने आठ करोड़ रुपये की डिमांड भेजी है। अगर विधानसभा चुनाव से पहले बजट स्वीकृत हो जाता है तो बच्चों को नए शिक्षा सत्र में फर्नीचर पर पढ़ाई करने का मौका मिल सकेगा। नहीं तो फिर फर्नीचर का इंतजार और बढ़ जाएगा।
बच्चों को बेहतर परिवेश में अच्छे शिक्षा मिले इसके लिए सतत प्रयास किया जा रहा है। शासन से बजट की मांग की जा सकती है स्वीकृत करना शासन का काम है। बजट मिल जाए तो फर्नीचर लग जाएगा। विकास चौधरी, बीएसए
प्राइवेट विद्यालयों तक में बच्चों को जमीन पर नहीं बैठाया जाता है जबकि सरकारी विद्यालयों में खाना, जूते, किताबें व ड्रेस मिलती हैं लेकिन फर्नीचर नहीं है। गंगा सिंह, अभिभावक
सरकार के साथ जन प्रतिनिधियों को इस समस्या को शासन के समक्ष रखना चाहिए। जिससे कि बच्चों के फर्नीचर के लिए बजट मिल सके। सुनील, अभिभावक
ब्लॉक बार इतने विद्यालयों में नहीं है फर्नीचर
डकोर : 112
जालौन : 85
कदौरा : 106
कोंच : 89
कुठौंद : 97
माधौगढ़ : 110
महेवा : 89
नदीगांव : 121
रामपुरा : 95
जालौन नगर : 06
काली नगर : 14
कोंच नगर : 04
उरई नगर : 05
कुल विद्यालय : 933
