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जालौन में फेरी लगाकर बेची जा रही थीं रेलवे की चादरें, 930 चादरों के साथ 3 आरोपी गिरफ्तार

Published: Thu, 27 Aug 2026 09:14 PM (IST)

जालौन में रेलवे सुरक्षा बल ने अवैध रूप से बेची जा रही 930 रेलवे चादरें बरामद कीं। इस मामले में ...और पढ़ें

रेलवे पुलिस की गिरफ्त में तीनों आरोपित, बरामद चादरें

रेलवे पुलिस की गिरफ्त में तीनों आरोपित, बरामद चादरें

HighLights

  1. जालौन में 930 रेलवे चादरें अवैध बिक्री से बरामद।

  2. उत्तर पश्चिम, दक्षिण, पूर्वोत्तर रेलवे के मार्का वाली चादरें मिलीं।

  3. दो फेरीवाले और एक गोदाम मालिक गिरफ्तार, रेलवे एक्ट में केस।

जागरण संवाददाता, जालौन। रेलवे की चादरों को फेरी लगाकर बेचे जाने की शिकायत पर रेलवे सुरक्षा बल ने कार्रवाई करते हुए जिले के जालौन कोतवाली के अमखेड़ा गांव से 930 चादरें बरामद की हैं। बरामद चादरों पर उत्तर पश्चिम रेलवे, दक्षिण रेलवे और पूर्वोत्तर रेलवे के मार्का लगे हुए थे। इस मामले में दो फेरी लगाने वालों के साथ एक गोदाम मालिक के खिलाफ रेलवे एक्ट में मुकदमा दर्ज किया गया है।

इंटरनेट मीडिया पर बुधवार को मध्य प्रदेश के भिंड-लहार क्षेत्र में रेलवे की चादरों की फेरी लगाकर बिक्री किए जाने की वीडियो प्रसारित किया गया था। मामले को गंभीरता से लेते हुए सहायक सुरक्षा आयुक्त रेलवे सुरक्षा बल ग्वालियर अशोक कुमार त्यागी ने जांच के लिए टीम गठित की।

टीम में निरीक्षक भिंड अभिषेक कुमार यादव, उप निरीक्षक मोठ जयपाल यादव, उप निरीक्षक उरई अंकित कुमार, उप निरीक्षक भिंड धीरेंद्र पाल सिंह, प्रधान आरक्षक उरई धर्मेंद्र कुमार पटेल, प्रधान आरक्षक उरई नरेंद्र कुमार सिंह और आरक्षक मोठ परशुराम शामिल रहे।

टीम ने भिंड-लहार क्षेत्र में रेलवे की चादरों की फेरी करने वालों के संबंध में जानकारी जुटाई। जांच के दौरान जालौन के ग्राम अमखेड़ा निवासी अमरचंद और हेमंत को चिन्हित किया गया।

घर से मिलीं तीन रेलवे जोन की मार्का लगी चादरें

आरपीएफ टीम ने गुरुवार को अमखेड़ा गांव पहुंचकर अमरचंद के घर की जांच की। वहां से नौ गांठों में अलग-अलग रेलवे के मार्का लगी कुल 930 चादरें बरामद हुईं। इनमें उत्तर पश्चिम रेलवे के मार्का वाली 690 चादरें, दक्षिण रेलवे के मार्का वाली 170 चादरें और पूर्वोत्तर रेलवे के मार्का वाली 70 चादरें शामिल हैं।

अमरचंद ने चादरों की खरीद से संबंधित बिल टीम को दिखाए। बिलों के सत्यापन के लिए आरपीएफ टीम उसे उरई स्थित नारायणदास टेक्सटाइल लेकर पहुंची। वहां फर्म संचालक अखिलेश मिला। उसके स्वेच्छा से गोदाम दिखाने पर वहां अलग-अलग रेलवे की काफी मात्रा में रिजेक्टेड चादरें भी मिलीं।

रेलवे मार्का वाली चादरों का बिल नहीं दिखा सके

जांच के दौरान अखिलेश ने बताया कि उसके पास मौजूद चादरों की खरीद से संबंधित बिल कानपुर और आगरा की फर्मों से हैं। हालांकि, बरामद चादरों पर अंकित रेलवे के मार्का से संबंधित बिल वह प्रस्तुत नहीं कर सका। इसके बाद आरपीएफ ने मामले को संदिग्ध मानते हुए अग्रिम जांच शुरू कर दी। मामले में अमरचंद, हेमंत और अखिलेश के खिलाफ रेलवे एक्ट के तहत मुकदमा दर्ज करने के साथ उनको गिरफ्तार कर लिया गया।

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