बाढ़-बारिश में खराब हुई फसल, कागजों पर लिखा 'पानी था ही नहीं'; जालौन में फसल सर्वे में बड़ी लापरवाही
जालौन में भारी बारिश से फसलें बर्बाद होने के बावजूद किसानों को मुआवजा नहीं मिल रहा है। लेखपालों पर गलत ...और पढ़ें

यह तस्वीर AI जेनेरेटेड है
HighLights
जालौन में बारिश से हजारों बीघा तिल की फसल नष्ट हुई।
लेखपालों ने गलत सर्वे रिपोर्ट बनाकर किसानों का मुआवजा रोका।
प्रभावित किसानों को डीएम या हेल्पलाइन पर शिकायत करने की सलाह।
जागरण संवाददाता, जालौन। आटा के अखिल तिवारी के खेत में आठ बीघा में तिल बोया था। अधिक बारिश से खेत तालाब बन गया। फसल नष्ट हो गई। जब लेखपाल सर्वे करने पहुंचा तो रिपोर्ट लगा कर चला गया, लेकिन मुआवजा आज तक नहीं मिला। किसान ने पता किया तो बताया गया कि खेत में तो पानी था ही नहीं।
फसल कुछ प्रतिशत ही खराब हुई है इसलिए मुआवजा नहीं मिलेगा। यहीं के अरविंद तिवारी की पांच बीघा की तिल पूरी तरह से नष्ट हो गई लेकिन लेखपाल की नजर में तो वहां पानी भरा ही नहीं है। जनपद में सर्वे को लगाई गई राजस्व विभाग की टीमों ने पूरी तरह से मनमानी कर घर बैठे ही रिपोर्ट लगा दी। ऐसे लेखपालों पर अभी तक कार्रवाई भी नहीं हो सकी है।
25, 26 व 27 सितंबर को 223 मिमी बारिश से 60,767 बीघा तिल में 70 प्रतिशत तक बर्बाद हो गया था। सर्वे के बाद भी बहुत से किसानों को लाभ नहीं मिल सका। आटा इटौरा क्षेत्र में तो करीब पचास ऐसे किसान हैं जिनकी तिल की फसल में ज्वार होने की रिपोर्ट लगा दी गई।
ग्राम अकबरपुर इटौरा के किसान अखिल तिवारी ने मुख्यमंत्री पोर्टल पर शिकायत करके बताया है कि उनकी तिल की फसल को सर्वे में लेखपाल ने ज्वार दर्ज कर दिया। अरविंद ने भी पोर्टल पर शिकायत की है।
किसानों को ऐसे मिलेगा लाभ
एडीएम वित्त एवं राजस्व राजीव राज ने बताया कि तीस टीमें सर्वे में लगी थीं। 34 हजार हेक्टेयर क्षेत्रफल में मूंग, तिल सहित विभिन्न फसलों को नुकसान पहुंचा। 53 हजार किसान प्रभावित हुए। शासन को 29 करोड़ का प्रस्ताव भेजा जिसमें पांच करोड़ की पहली किस्त मिली है। 59 हजार बीमित किसानों को भी फसल बीमा का लाभ मिलना है।
राहत राशि पात्र तक पहुंचाने के लिए पोर्टल पर डाटा फीडिंग और अभिलेखों का सत्यापन हो किया गया। खतौनी सत्यापन के बाद अभी छह हजार किसानों का डाटा पोर्टल पर फीड किया जा चुका है। लेखपाल ने अगर गलत रिपोर्ट लगाई है तो किसान डीएम को प्रार्थना पत्र देकर सूचित करें।
यह भी पढ़ें- जालौन में पत्नी की खुदकुशी के 10 दिन बाद पति ने दी जान, हत्या केस के डर से तनाव में था; तीन साल की बेटी हुई अनाथ
बीमा का लाभ नहीं मिला तो हेल्पलाइन नंबर 14447 पर काल करें। बीमित किसान क्षतिपूर्ति प्राप्त करने के लिए बीमा कंपनी की हेल्पलाइन 14447 पर पंजीकरण अवश्य कराएं।
हमारे खेत में तो पौधा लगाए हैं लेकिन सर्वे में इस तरह गड़बड़ी की कि उसमें फसल होना दिखा दिया है।- श्वेता, किसान
खेत में तिल की फसल पूरी तरह से पानी में भर कर बर्बाद हो गई, राजस्व कर्मचारी ने ज्वार खसरा में चढ़ा दिया है।- जगदीश, राजेपुर।
सर्वे के लिए राजस्व के साथ ब्लाक स्तर पर भी टीमें लगाई गई हैं, हो सकता है कहीं त्रुटि हुई हो, गलत रिपोर्ट की शिकायत सही मिलने पर संबंधित के खिलाफ कार्रवाई होगी।- गगन दीप सिंह, जिला कृषि अधिकारी
