जागरण संवाददाता, हाथरस :गांवों में कूड़े से अब कमाई का रास्ता निकाला जाएगा। हाथरस समेत प्रदेशभर में कूड़ा निस्तारण के लिए प्रभावी योजना बनी है। इसके लिए पहले फेज में हाथरस के 283 गांवों का चयन किया गया है। गांवों से कूड़े का संकलन कर उससे पालीथिन और अन्य अपशिष्ट को अलग किया जाएगा। इसके बाद निस्तारण किया जाएगा। कूड़ा निस्तारण के लिए गांवों में प्लांट लगाए जाएंगे। हर ब्लाक स्तर पर 16 लाख रुपये से कूड़ा निस्तारण प्लांट लगाया जाएगा। सर्वे के अनुसार हाथरस जनपद के गांवों से प्रतिदिन 50 हजार किलो कूड़ा निकलता है। कूड़ा निस्तारण के बाद खाद बनाकर उसकी बिक्री की जाएगी जिसकी कमाई से सफाई व्यवस्था को चलाया जाएगा। कचरा निस्तारण की योजना

शासन के निर्देश पर पंचायती राज विभाग हाथरस की इस वर्ष की कार्य योजना के अनुसार डोर-टू-डोर कूड़ा कलेक्शन किया जाएगा। सूखे और गीले कूड़े को अलग-अलग एकत्रित करके उनको पंचायतों के गड्ढों में निस्तारण के लिए रखा जाएगा। हर पंचायत पर स्वच्छता संसाधन केंद्र बनाए जाएंगे। कार्ययोजना के अनुसार गांव वाले जो प्लास्टिक कूड़े के साथ फेंक रहे हैं उन्हें जागरूक कर एक जगह एकत्रित करने को कहा जाएगा ताकि उसको बाजार में बेचकर गांव की साफ-सफाई पर पैसा खर्च किया जा सके। अक्सर लोग प्लास्टिक के बिजली बोर्ड या अन्य बेकार प्लास्टिक उपकरण कूडे़ के साथ फेंक देते हैं उसे भी बाजार में बेचा जाएगा। गोबर से जैविक खाद पैदाकर आय की संभावनाएं तलाशी जाएंगी।

कचरे से आय बढ़ेगी तो गांव का विकास भी होगा। इसको लेकर पंचायती राज विभाग ने पूरा प्लान तैयार कर लिया है। अब अनुपयोगी कचरा आने वाले समय में आय का प्रमुख जरिया बनेगा। इसके लिए ही यह कवायद चल रही है। पंचायती राज विभाग के अधिकारियों की मानें तो पहले फेज में हाथरस के 283 गांवों का चयन किया गया है। गांव से कूड़े का संकलन कर उससे पालीथिन और अन्य अपशिष्ट को अलग किया जाएगा। एएसएलआर सेंटर में बनेगी जैविक खाद : जनपद की चयनित की गई ग्राम पंचायतों में कचरे एकत्रित करने के बाद स्वयं सहायता समूह की 50 महिलाएं एसएलआरएम (सालिड लिक्विड रिसोर्स मैनेजमेंट) पहुंचेगी। यहां सूखे व गीले कचरे को अलग किया जाएगा। गीले कचरे से जैविक खाद बनाई जाएगी। यहीं कचरे को सड़ाने की प्रक्रिया भी होगी। लेयर बनाकर गोबर घोल, कचरे को मिक्स किया जाएगा, जो जैविक खाद बनेगी। प्रोसेसिग प्लांट में सूखा कचरा

सूखे कचरे को एसएलआरएम सेंटर से प्रोसेसिग यूनिट प्लांट भेजा जाएगा। जहां प्लास्टिक, कांच का टुकड़ा, पीतल, बाटल, डिस्पोजल को अलग किया जाएगा। इसके बाद उसके बाजार में बेचा जाएगा। वहीं गीले कचरे से जैविक खाद बनेगी। अब तक कचरे का कोई उपयोग ग्राम पंचायत स्तरों पर नहीं हो रहा है जिससे जगह जगह गंदगी के ढेर नजर आते हैं। मगर कचरे का निदान होगा तो फिर गांव के मुहाने पर कूड़े और कचरे के ढेर नजर नहीं आएंगे। वर्जन--

गोबर से जैविक खाद पैदाकर आय की संभावनाएं तलाशी जाएंगी। इसके लिए पहले फेज में हाथरस की 283 गांवों का चयन किया गया है। गांव से कूड़े का संकलन कर उससे पालीथिन और अन्य अपशिष्ट को अलग किया जाएगा। इसके बाद निस्तारण किया जाएगा।

जीडी जैन, डीपीआरओ हाथरस

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