एआरएस आजाद, हाथरस : यात्रियों की भीड़ निकलने के बाद भी रोडवेज घाटे में क्यों है? इसका जवाब बेहद आसान है मगर विभाग अनजान बना रहता है। जिन रूटों पर घाटा दिखाकर कम बसों का संचालन किया जा रहा है, उन्हीं रूटों पर डग्गेमार वाहन मालामाल हो रहे हैं। डग्गेमार वाहन चेकिग में भी फर्राटा भरते हुए निकल जाते हैं, जबकि रोडवेज बसों के चालान काटकर उनपर दबाव बनाया जा रहा है।

ऐसा लग रहा है कि रोडवेज को उबारने की बजाय उसे घाटे में जान-बूझकर धकेला जा रहा है। पेट्रोल के बढ़ते भाव के चलते सार्वजनिक परिवहन का उपयोग बढ़ गया है। यात्रियों की संख्या में लगातार इजाफा हो रहा है। उसके बाद भी रोडवेज की बसों के लिए यात्रियों की कमी बताई जाती है। सामान्य दिनों में रोडवेज की आय नौ लाख और त्योहारी सीजन में यही 15 लाख रुपये प्रतिदिन तक पहुंच जाती है। इस समय दीपावली का सीजन चल रहा है। उसके बाद भी रोडवेज की आय छह लाख रुपये प्रतिदिन पर सिमटी हुई है। मथुरा-बरेली मार्ग पर सर्वाधिक डग्गेमार वाहन

हाथरस डिपो की मथुरा-बरेली मार्ग पर बसों की संख्या बहुत कम है। अलीगढ़-आगरा के बीच भी करीब 80 डग्गेमार वाहन संचालित हैं। वहीं मथुरा-बरेली के बीच 120 से अधिक डग्गेमार वाहन चल रहे हैं। इनमें करीब 100 बसें, 50 ईको व 50 मैजिक व अन्य वाहन हैं। रोडवेज बसों को नहीं उठाने देते यात्री

यह डग्गेमार वाहन दिन-रात चलते हैं। रोडवेज की बसों के आने-जाने की इन पर सूचना रहती है। रोडवेज की बसों के आगे डग्गेमार बसें लगा देते हैं। शहर में हतीसा पुल, तालाब चौराहा, सासनीगेट, मेंडू, हाथरस जंक्शन, बस्तोई, रति का नगला सहित सभी लोकल स्टाप से रोडवेज बसों को डग्गेमार वाहन संचालक सवारी नहीं उठाने देते। विरोध करने पर मारपीट तक करते हैं। प्रति माह हो रहे 120 के

चालान, डर रहे चालक

रोडवेज बसों का सबसे बड़ा दुश्मन इन दिनों चालान बने हुए हैं। अलीगढ़ में बस स्टैंड, गांधीपार्क, सासनीगेट और आगरा में भगवान टाकीज, वाटरव‌र्क्स, हाथरस डिपो की बसों के पुलिस की ओर से धड़ाधड़ चालान काटे जा रहे हैं। प्रति माह करीब 120 चालान कटने से चालकों में डर बना हुआ है। चालान की धनराशि 1000 से 5000 रुपये तक होती है जो चालक को ही भरनी पड़ती है।

चेकिग में भी फर्राटे

डग्गेमार वाहन के एक चालक ने नाम न छापने की शर्त पर बताया कि पुलिस व परिवहन विभाग की चेकिग में भी डग्गेमार बसें, ईको व अन्य छोटे वाहन तेजी से निकल जाते हैं। दूसरे चालक ने बताया कि चौराहा या स्टापेज वाली जगह से यात्रियों को लेने के लिए रुकते ही उनका पीछे से मोबाइल द्वारा फोटो खींचकर चालान कर दिया जाता है। चालान जमा करने में कई दिन और आर्थिक नुकसान झेलना पड़ता है। इससे बचने के लिए चेकिंग वाली जगह से तेजी से निकल जाते हैं। रोडवेज की बसों की नकल भी

आगरा-अलीगढ़, मथुरा-बरेली सहित इगलास, जलेसर जैसे लोकल रूटों पर रोडवेज की तरह डिजाइन और रंग की डग्गेमार बसें खुलेआम दौड़ रही हैं। यात्री बताते हैं कि बिना रूट परमिट, ड्राइविग लाईसेंस व अनुमति के ये वाहन दौड़ रहे हैं। संबंधित जिलों में चौकी, थाना, एआरटीओ स्तर पर इन डग्गेमार वाहनों से परिवहन व पुलिस विभाग द्वारा मासिक सुविधा शुल्क बंधा हुआ है।

इनका कहना है

पुलिस द्वारा रोडवेज बसों के बहुत चालान किए जा रहे हैं। चालान से चालकों को दिक्कतें झेलनी पड़ती हैं। इसके लिए उच्चाधिकारियों को भी अवगत करा दिया गया है।

- शशीरानी, एआरएम रोड पर बसों व छोटे वाहनों को बिना रूट परमिट व संबंधित प्रमाण के चलने का अधिकार नहीं है। परिवहन विभाग द्वारा चेकिग में ऐसे वाहनों को पकड़कर चालान काटकर कार्रवाई की जाती है।

-नीतू सिंह, एआरटीओ प्रशासन

Edited By: Jagran