जासं, हाथरस : टीटीएसपी (टैंक टाइप स्टैंड पोस्ट) परियोजना को भ्रष्टाचार का जंग खा गया। खारे पानी से निजात के लिए लाई गई परियोजना से तमाम गांवों में लोगों को एक बूंद पानी नहीं मिला। करोड़ों रुपये की लागत वाली यह योजना ज्यादातर गांवों में कागजों में ही चली। इसमें बड़े घोटाले की गंध आ रही है। बशर्ते कि इसकी ईमानदारी से जांच हो। 2010 में हुई थी शुरुआत

आंकड़ों को देखें तो टीटीएसपी योजना की शुरुआत पूरे उत्तर प्रदेश में सबसे पहले सादाबाद ब्लॉक में प्रारंभ हुई थी। यह भी कहा जा रहा है कि सबसे पहली टंकी सादाबाद क्षेत्र के गांव जैतई तथा गोविदपुर में जल निगम ने लगवाई थी। इसके बाद कई अन्य गांवों में भी यह टंकियां लगाई गईं। सबसे पहले करीब एक दर्जन गांवों में लोगों को मीठा पानी उपलब्ध कराने के लिए सात स्थानों पर स्टैंड पोस्ट निर्धारित किया गया था। एक टंकी पर सवा दो लाख का बजट

इस परियोजना के अंतर्गत लगने वाली एक टंकी का बजट सरकार ने सवा दो लाख रुपये निर्धारित किया था। इसमें एक सबमर्सिबल, एक कमरा, उसके ऊपर 10 हजार लीटर का टैंक तथा विद्युत विभाग से 10 केवीए का ट्रांसफार्मर लगाया जाना था। केवल 10-15 टंकी लगने के बाद ही क्षेत्र में यह परियोजना दम तोड़ने लगी। कहीं टंकी लगी तो कनेक्शन नहीं हुए तो कहीं टंकियों की फिटिग नहीं कराई गई। ऐसे ही कई कारणों से किसी भी टंकी पर पूरा काम न हो सका। बाद में सरकार ने बजट बढ़ाकर ढाई लाख रुपये कर दिया था, फिर भी परियोजना को पलीता लग गया। पूर्व विधायक ने किए थे प्रयास

क्षेत्र में खारे पानी की भयावह स्थिति को देखते हुए वर्ष 2007 में चुनाव जीतने के बाद पूर्व विधायक डॉ. अनिल चौधरी ने विधानसभा में लगातार तीन वर्ष तक खारे पानी की समस्या उठाई थी। डॉ. चौधरी के अनुसार प्रदेश सरकार ने एएमयू के इंजीनियरिग विभाग के मॉडल पर इस योजना को अमलीजामा पहनाया। पहले चरण में सादाबाद ब्लॉक के लिए 200 तथा सहपऊ व मुरसान ब्लाक के लिए 175 टंकियां स्वीकृत हुई थीं। टंकियां हुईं जर्जर, फाउंडेशन चटके

जल निगम ने सादाबाद क्षेत्र के 100 गांवों में टंकियां लगाई हैं, लेकिन कोई भी टंकी ऐसी नहीं है जिसका पानी किसी भी ग्रामीण को नसीब हुआ हो। जहां टंकी बनी है वहां सबमर्सिबल नहीं है। कहीं बिजली का कनेक्शन नहीं हुआ। इसीलिए धीरे-धीरे यह टंकियां जर्जर होती गईं। इनके फाउंडेशन भी चटक गए हैं। नगला ढोकला, नगला छत्ती, वनगढ़, आदि में यही हालात है। कागजों में यह टंकियां चालू हैं। अफसरों को नहीं 13 फाइलों की जानकारी

टीटीएसपी योजना के अंतर्गत पिछले दिनों हुई समीक्षा के दौरान कई गांवों के रिकॉर्ड नहीं मिल रहा है। कुल 450 गांवों में यह योजना लागू की गई थी। समीक्षा के दौरान 437 फाइलें ही सीडीओ के सामने आईं। 13 गांवों की फाइलें गायब हैं। यह 13 फाइलें किन गांवों की हैं इसकी जानकारी सीडीओ को भी नहीं है। ग्रामीणों के बोल

2011 में हमारे गांव में यह टंकी बनी थी, लेकिन इस टंकी का कोई भी प्रयोग नहीं हो सका, क्योंकि यहां लगाया गया ट्रांसफार्मर ही फुंक गया था जो सही नहीं हुआ।

-रमेश चंद्र, नगला छत्ती खारे पानी से मुक्ति दिलाने के लिए जो योजना सरकार ने चलाई थी। उसका लाभ किसी भी ग्रामीण को नहीं मिला। टंकियां बनीं लेकिन मीठा तो क्या खारा पानी भी मयस्सर नहीं हुआ।

- रामू चौहान, गुरसौठी जल निगम द्वारा क्षेत्र के गांव नगला ढोकला तथा नगला छत्ती में पानी की टंकी मीठा पानी उपलब्ध कराने को लगाई थी, लेकिन यह टंकी किसी उपयोग में नहीं आई। आज तक इस बात की जानकारी नहीं है कि आखिर यह टंकियां क्यों बनाई गईं।

-विजय पाल सिंह प्रधान, बिसावर।

Posted By: Jagran

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