रामबाबू यादव, हाथरस : देश आजादी के 75 साल पूरे होने पर जोर-शोर से अमृत महोत्सव मना रहा है, मगर सिकंदराराऊ तहसील क्षेत्र के कुछ गांव और मजरे ऐसे हैं जहां विकास का सूरज पहुंचा ही नहीं। वे इस उत्सव में शामिल हों भी तो कैसे।

यह गांव तहसील मुख्यालय से तीस किलोमीटर दूर है। ग्राम पंचायत नीजरा गोकुलपुर में मजरा नगला नीजरा को आज तक पक्की सड़क नहीं मिली। इस गांव के लोग पगडंडी से होकर आज भी निकलते हैं।

हालात : लगभग दो सौ मतदाताओं और करीब तीस परिवार इस गांव में निवास करते हैं। दो परिवार कश्यप समाज से हैं और बाकी लोधी राजपूत समाज से हैं। लगभग चार साल पहले मनरेगा से मिट्टी डालकर कच्चा रास्ता बना दिया गया जो कि अब बारिश से जगह जगह मिट्टी बह जाने से क्षतिग्रस्त हो गया है। नीजरा से नगला नीजरा को जाने वाले रास्ते में जगह-जगह पानी भरने से दल-दल हो गया है। यहां पर जल निकासी का भी कोई इंतजाम नहीं है, जिससे ग्रामीणों को निकलने में भारी दिक्कत होती है। कभी-कभी तो बाइक सवारों के कीचड़ में गिर कर कपड़े भी खराब हो जाते हैं। ग्रामीणों का कहना है कि जब चुनाव नजदीक आते हैं तो हर पार्टी के प्रत्याशी आश्वासन देकर चले जाते हैं। प्रदेश में चाहे किसी भी पार्टी की सरकार रही हो, लेकिन किसी भी जनप्रतिनिधि ने आजतक इस ओर ध्यान नहीं दिया। हर बार ग्रामीणजन अपने को ठगा हुआ महसूस करते हैं। बोले ग्रामीण

हमारा गांव हमेशा से ही विकास कार्यों से अछूता रहा है चाहे किसी भी पार्टी की सरकार रही हो। हमारे गांव की तरफ किसी ने भी ध्यान नहीं दिया।

भीमसेन, ग्रामीण हमारा गांव आज भी मूलभूत सुविधाओं से महरूम है। न तो गांव में कोई पक्की सड़क बनी है और न विकास जैसी कोई बात न•ार आती है। रास्ता ़खराब होने की वजह से हमारे गांव में कोई भी आना पसंद नहीं करता है।

जितेंद्र कुमार, ग्रामीण गांव में चुनाव प्रचार में सब पार्टियों के प्रत्याशी वोट मांगते समय तो कह देते हैं कि हमारी सरकार बनी तो हम पक्की सड़क बनवाएंगे लेकिन चुनाव खत्म होते ही सब भूल जाते हैं।

संजय सिंह, ग्रामीण हमारा गांव जिला मुख्यालय से लगभग साठ किलोमीटर दूर जिला अलीगढ़ के अंतिम छोर पर स्थित होने के कारण किसी भी विकास कार्य योजना का लाभ नहीं मिल पाता है।

जीत वर्मा, ग्रामीण

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