योगेश शर्मा, हाथरस : सहपऊ ब्लाक के गांव उधैना में पांच करोड़ रुपये की लागत से तैयार हो रही गोशाला अनूठी और स्वावलंबी होगी। गोशाला को स्वावलंबी बनाने के लिए आय का प्लान भी तैयार किया गया है। यह गोशाला पांच करोड़ की लागत से 275 बीघा में बनेगी। मशीन से उपले (कंडे) तैयार कर बिक्री की जाएगी। गोवंश के चारे की पैदावार भी गोशाला में ही होगी। इस गोशाला में दो हजार गोवंश को आश्रय देने की योजना है। मॉडल गोशाला

गांव उधैना में तैयार की जा रही गोशाला कई मायने में यूपी के अन्य जिलों के लिए मिसाल पेश करेगी। जिला विकास अधिकारी अवधेश यादव के मुताबिक माडल गोशाला की नींव रखी जा चुकी है। निर्माण कार्य तेजी से चल रहा है। गोशाला में गोमूत्र व गोबर से विभिन्न उत्पाद तथा दवा बनाकर आमदनी के साधन तैयार करने की योजना है। मशीन से उपले तैयार

कर बेचेंगे बाजार में

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की ड्रीम प्रोजेक्ट में गोशाला भी शामिल है। इसलिए जोर दिया जा रहा है कि गोशाला को स्वावलंबी बनाया जाए। यहां पर गायों से पैदा होने वाले गोबर से मशीन जरिये गोकाष्ठ बनाया जाएगा। इस गोकाष्ठ का प्रयोग ईंधन के रूप में किया जाएगा। इससे होने वाली आय से गोशाला का रखरखाव किया जाएगा। गोशाला में पांच हजार गोवंशीय पशुओं को रखने की व्यवस्था होगी। यहां पर मछली पालन भी होगा और फलदार वृक्ष भी लगाए जाएंगे। मछली पालन से आय होगी और फलदार वृक्ष से गोवंश को भोजन मिल सकेगा। पब्लिक के बोल

गोशाला बनने से क्षेत्र में गोवंश से होने वाला नुकसान कम हो जाएगा। इसके अलावा इतने बड़े प्रोजेक्ट में आसपास के लोगों को रोजगार भी मिलेगा। सरकार को चाहिए कि इस गोशाला के लिए अधिक से अधिक पैसा दिया जाए।

हर प्रसाद गोशाला जिस जगह पर बन रही है वह पहले कभी चरागाह था। जमीन पर तारबंदी करा दी गई है। गोवंश के खाने के एवं रहने के लिए टीनशेड एवं उनके नीचे पक्का खड़ंजा तैयार किया जा रहा है।

अली मुहम्मद गोशाला से क्षेत्र में रोजगार भी बढ़ेगा और मजदूरों को भी मौका मिल सकता है। गोशाला बनने से गोवंश इधर-उधर भटकने नहीं पाएंगे। इससे फसल की सुरक्षा हो सकेगी।

फतेह सिंह, किसान, निवासी उधैना गोशाला के लिए अधिक धन की आवश्यकता पड़ने पर वह जिला पंचायत अध्यक्ष के सामने इस प्रस्ताव को लेकर जाएंगे और उनसे अपील करेंगे कि वह किसानों के हित के लिए सहयोग करें।

श्यामवीर सिंह, प्रधान, उधैना सहपऊ वर्जन

गोशालाओं का निर्माण सरकार की प्राथमिकता में शामिल है। इसलिए स्वावलंबी गोशाला बनाई जा रही है। इसमें दो हजार गोवंश रखने की व्यवस्था की जाएगी। चारा भी परिसर में ही पैदा किया जाएगा। इसका निर्माण शुरू हो चुका है।

अवधेश सिंह, डीडीओ हाथरस

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