संवाद सहयोगी, हाथरस : जिले में छोटे स्टाम्प की किल्लत बढ़ने से इनके दाम डेढ़ से दो गुने तक वसूले जा रहे हैं। प्रशासनिक अधिकारियों का ध्यान नहीं है। जिले में 500, 100, 50 व 20 रुपये के स्टाम्प की काफी कमी है। इसीलिए इनपर वेंडर की मनमानी चल रही है।

छोटे स्टाम्प की मांग सबसे अधिक इकरारनामा, वसीयत, शपथ पत्र, एग्रीमेंट आदि में होती है, जिसमें सबसे अधिक 100 रुपये का स्टाम्प प्रयोग होता है। इस समय छोटे स्टाम्प की बेहद कमी है। बीस रुपये से लेकर 500 रुपये मूल्य के स्टाम्प वेंडरों के यहां से गायब हो गए हैं। जिनके पास ये स्टाम्प हैं, वे पहले तो स्टाम्प न होने की जानकारी देते हैं, मगर जब पता चलता है कि स्टाम्प की उसे बेहद जरूरत है तो अधिक कीमत देकर स्टाम्प लाने की बात कहकर लोगों से डेढ़ से दो गुना तक मूल्य वसूले रहे हैं। 100 रुपये के स्टांप की जगह छोटे छोटे स्टाम्प लगाने पर टाइपिस्ट से लेकर अन्य स्थानों पर अधिक खर्च वसूला जाता है, जिससे वादकारियों, लोगों व अधिवक्ताओं में भारी रोष है। वर्जन-

छोटे स्टाम्प की बेहद कमी है। इसकी शिकायत अधिकारियों से की गई है, लेकिन आज तक कोई समाधान नहीं हुआ जिससे अधिक कीमत में स्टाम्प खरीदने को विवश होना पड़ रहा है।

-राजेश शर्मा, अधिवक्ता सासनी सासनी व हाथरस में छोटे स्टाम्प नहीं मिल पा रहे हैं। स्टाम्प वेंडर ऊपर से स्टाम्प की कमी दर्शाकर अधिक कीमत वसूल रहे हैं। इसकी शिकायत के बाद भी इस किल्लत की ओर कोई ध्यान नहीं दिया जा रहा है।

-पंकज गौड़, एडवोकेट सासनी एग्रीमेंट से लेकर इकरारनामा, शपथ पत्र आदि में रोजाना हजारों रुपये के स्टांप की जरूरत रहती है, लेकिन स्टाम्प वेंडरों द्वारा इनकी कमी दिखाकर अधिक कीमत वसूली जा रही है। यह उचित नहीं है।

-योगेश शर्मा, एडवोकेट, सासनी इनका कहना है..

जिले में छोटे स्टाम्प की कोई किल्लत नहीं है। हो सकता है कि इसका कृत्रिम संकट दिखाकर अधिक मुनाफा वसूला जा रहा हो। इसकी जांच कराकर उचित कार्रवाई की जाएगी।

-रेखा एस.चौहान, अपर जिलाधिकारी वित्त एवं राजस्व

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