जासं, हाथरस : कोरोना क‌र्फ्यू में बाजारों के शटर गिरने के साथ शराब और बीयर की दुकानें भी बंद थीं, मगर मदिरा के शौकीनों बहुत दिक्कत नहीं हुई, क्योंकि बैक डोर से शराब बिकती रही।

सरकार ने शनिवार रात आठ बजे से रविवार तक पूर्ण लाकडाउन के आदेश दिए थे। सिर्फ आवश्यक वस्तुओं की दुकानें जैसे दूध, सब्जी और दवाओं के अलावा पेट्रोल पंप खुले थे। मदिरा के शौकीनों को उम्मीद थी की शराब की दुकानें खुली रहेंगी मगर ऐसा नहीं हुआ। उनका भ्रम रात आठ बजे के बाद तब टूट गया जब शराब की दुकानें भी बंद हो गईं। तमाम पियक्कड़ों को वह सभी ठिकानें मालूम थे जहां बंदी में शराब अधिक रेट से सही, मगर मिलती जरूर है। फिर बैकडोर से शराब खरीदी गई।

अलीगढ़ रोड पर शराब के ठेके के पास कुछ ग्राहकों की भीड़ देखी गई। उनको संकेत मिल चुके थे कि उनकी व्यवस्था गुपचुप हो जाएगी। हाथरस जंक्शन कोतवाली क्षेत्र के कस्बा हाथरस जंक्शन और उसके आसपास कोरोना क‌र्फ्यू के बावजूद होटल, ढाबे से शराब बेचे जाने की सूचना मिली है। भूखे नहीं रहें बेसहारा पशु मंडी में चारे की व्यवस्था

संस, हाथरस: कोरोना क‌र्फ्यू के चलते चारों तरफ सन्नाटा पसरा हुआ था। ऐसे में शहर में घूमने वाले बेसहारा पशुओं के लिए चारा-पानी की व्यवस्था मंडी परिसर के साथ बाजारों में की गई।

मंडी समिति में रविवार को कोरोना क‌र्फ्यू के चलते सब्जी मंडी के साथ गल्ला मंडी भी बंद रही। मंडी में लोगों के लिए रोजगार के साथ बेसहारा पशुओं के लिए पेट भरने का भी एक माध्यम है। इनके लिए मंडी प्रशासन ने चारे व पानी की व्यवस्था की। जगह-जगह हौदियों में पानी भरवा दिया। वहीं फल व सब्जियां जो दूसरे दिन खराब हो सकती थीं, पशुओं लिए मंडी में डलवा दी गई। इसके अलावा शहर में नगर पालिका ने पशुओं के लिए चारे पानी की व्यवस्था की है। चेयरमैन आशीष शर्मा ने बताया कि शहर में इधर-उधर भटकने वाले गोवंश के लिए पूर्व में भी कोरोना काल के समय एक अभियान चलाया गया था। इनका अब भी ध्यान रखा जा रहा है।

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