संवाद सहयोगी, हाथरस : जिले के मैंडू रोड पर स्थित प्रतिष्ठित खेतान नेत्र चिकित्सालय का पंजीकरण निरस्त करके सीएमओ ने इसे तत्काल बंद करने के निर्देश दिए हैं। दरअसल, जिस डॉक्टर के नाम से पंजीकरण था, वह आठ माह पहले ही सेवाएं समाप्त करके चले गए। इसके बाद से अस्पताल उसी के नाम से चल रहा था। इसका पंजीकरण अप्रैल 2018 में कराया गया था, जिसे अब सीएमओ ने निरस्त कर दिया है। प्रशासन ने कुछ माह पहले बायोमेडिकल वेस्ट खुले में फेंकने वाले अस्पतालों को नोटिस भेजा था। इनमें खेतान नेत्र चिकित्सालय भी शामिल था। यहां किसी ने भी इस नोटिस को रिसीव नहीं किया। इसके बाद रिकॉर्ड खंगाले गए तो पता चला तो पूरे मामले का पर्दाफाश हुआ। अब सीएमओ डॉ. ब्रजेश राठौर ने प्रबंधक के लिए पत्र लिखा। इसमें कहा गया है कि तत्काल संस्थान में चिकित्सा कार्य को बंद कर दिया जाए। यदि निर्देशों का उल्लंघन किया गया तो विधिक कार्रवाई होगी। हालांकि इस बार भी चिकित्सालय प्रशासन ने पत्र रिसीव नहीं किया है। इसकी प्रति जिलाधिकारी व पुलिस अधीक्षक को भी सौंपी है।

काफी दूर से आते हैं मरीज

खेतान नेत्र चिकित्सालय ट्रस्ट के जरिये संचालित होता है। यहां हाथरस ही नहीं, अन्य जिलों के करीब 60-70 मरीज रोजाना आते हैं। 10 मई 2018 को डॉ. अजय कुलश्रेष्ठ चिकित्सा संस्थान प्रभारी ने अपनी सेवाएं खत्म करते हुए सीएमओ को प्रार्थना पत्र दे दिया। डॉ. अजय कुलश्रेष्ठ के नाम से ही चिकित्सालय का पंजीकरण था। पंजीकरण में भी गड़बड़ी

सीएमओ कार्यालय के अभिलेखों में डॉ. अजय कुलश्रेष्ठ के नाम से पंजीकरण दर्ज है। 30 अप्रैल 2018 को पंजीकरण कराया गया था। शुक्रवार को चिकित्सालय से एक व्यक्ति सीएमओ कार्यालय पहुंचा और खुद को अजय कुलश्रेष्ठ बताया। उन्होंने कहा कि वह चिकित्सक नहीं हैं। मैंने जो आवेदन किया था, उसमें डॉ. नहीं लिखा था, जबकि सीएमओ कार्यालय से जारी पंजीकरण में डॉक्टर शब्द अंकित है। लिपिक बदला तो हुआ पर्दाफाश

पिछले साल 10 मई को सीएमओ कार्यालय को प्रार्थना पत्र देने के बाद चिकित्सालय को पुन: पंजीकरण कराना था। वहीं कुछ माह पूर्व संबंधित लिपिक के सेवानिवृत हो जाने के बाद पटल दूसरे लिपिक पर आया, तब जाकर इस बात का खुलासा हो सका। इनका कहना है

चिकित्सालय बिना लाइसेंस के संचालित हो रहा था। मामला संज्ञान में आने पर अब लाइसेंस को निरस्त कर चिकित्सालय बंद करने के निर्देश दिए गए हैं। चिकित्सालय प्रशासन द्वारा कार्यवाही पत्र न लेने पर अब पुलिस अधीक्षक को अवगत कराया गया है।

डॉ. ब्रजेश राठौर, सीएमओ हाथरस

चिकित्सालय सोसायटी के अधीन संचालित है, जिसमें कई पदाधिकारी हैं। चिकित्सालय के नाम से ही पंजीकरण है। उसी के अंतर्गत पर चिकित्सालय चल रहा है। यदि सीएमओ को कुछ गलत लग रहा है तो मिलकर निस्तारण करा लिया जाएगा।

- विजय खेतान, सेक्रेटरी, खेतान चेरीटेबल ट्रस्ट

Posted By: Jagran

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