हाथरस में जमानत मिलने के बाद से गायब है जानलेवा हमले का दोषी, 38 साल बाद जमानती को कोर्ट का नोटिस
हाथरस में 38 साल पहले जानलेवा हमले के दोषी छेदी लाल उर्फ छिद्दा को जमानत मिलने के बाद से पुलिस ...और पढ़ें

प्रतीकात्मक तस्वीर।
HighLights
38 साल पहले जानलेवा हमले का दोषी छेदी लाल फरार।
हाईकोर्ट ने एसपी हाथरस को तलाश के निर्देश दिए।
फरार दोषी के जमानती को भी कोर्ट का नोटिस।
अभिषेक तायल, हाथरस। 38 साल पहले जानलेवा हमले के मामले में साढ़े तीन साल की सजा पाने वाला छेदी लाल उर्फ छिद्दा कहां है, इसका जवाब अब पुलिस के पास भी नहीं है। वर्ष 1988 में सजा के खिलाफ हाईकोर्ट में अपील दाखिल हुई और छिद्दा को जमानत मिल गई। इसके बाद वह कहां गया, इसकी जानकारी अब पुलिस को भी नहीं है।
लंबित अपील की सुनवाई में उसकी मौजूदगी जरूरी हुई तो गैर जमानती वारंट जारी हुआ, लेकिन दिए गए पते पर वह नहीं मिला। अब हाईकोर्ट ने एसपी हाथरस की निगरानी में उसकी तलाश कर वारंट तामील कराने के निर्देश दिए हैं।
मूल रूप से रमनपुर के छेदी लाल को उसके मामा सेवानिवृत्त शिक्षक राम प्रकाश शर्मा, निवासी बोहरेजी का नोहरा ने गोद ले रखा था। राम प्रकाश शर्मा का निधन हो चुका है। इससे पहले ही राम प्रकाश ने अपनी पैतृक जमीन छेदी लाल के नाम कर दी थी। इसी जमीन को लेकर लाला का नगला के कुछ लोगों से छिद्दा का विवाद हो गया।
विवाद बढ़ा तो मामला मुकदमेबाजी तक पहुंच गया। सत्र परीक्षण के दौरान प्रथम अपर सत्र न्यायाधीश, अलीगढ़ एमसी जैन ने चार फरवरी 1988 को छेदी लाल को धारा 307 के तहत दोषी ठहराया और तीन साल छह माह के कारावास की सजा सुनाई। वह करीब चार माह जेल में रहा। इसके बाद सजा के आदेश के खिलाफ हाईकोर्ट में अपील दाखिल की गई और उसे जमानत मिल गई।
तब से ही छिद्दा कहां है, यह बड़ा सवाल बना हुआ है। इतने वर्षों में उसके पुराने घर में भी कोई नहीं रहता। समय के साथ रिश्ते, पते और हालात बदलते गए, लेकिन हाईकोर्ट में दाखिल अपील लंबित रही। अब जब अपील सुनवाई के दौर में पहुंची और न्यायालय के समक्ष छिद्दा की मौजूदगी सुनिश्चित करने की जरूरत पड़ी तो पुराने मामले की फाइल के साथ उसकी तलाश भी फिर शुरू हो गई।
नौ फरवरी 2026 को हाईकोर्ट ने उसके खिलाफ गैर जमानती वारंट जारी किया। वारंट की तामील के लिए पुलिस दिए गए पते पर पहुंची, लेकिन वहां छिद्दा नहीं मिला। मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट, हाथरस की 11 मार्च 2026 की रिपोर्ट में बताया गया कि आरोपित दिए गए पते पर नहीं रहता है और इसी वजह से वारंट की तामील नहीं हो सकी। इसके बाद हाईकोर्ट ने 16 मार्च 2026 को दोबारा गैर जमानती वारंट जारी किया।
मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट, हाथरस के माध्यम से वारंट की तामील कराने के निर्देश दिए गए। हाईकोर्ट ने इस बार वारंट की तामील की जिम्मेदारी एसपी हाथरस की निगरानी में कराने और की गई कार्रवाई की विस्तृत रिपोर्ट न्यायालय में पेश करने को कहा है। अदालत ने स्पष्ट किया है कि केवल यह कहकर जिम्मेदारी से नहीं बचा जा सकता कि आरोपित ने अपनी चल या अचल संपत्ति बेच दी है अथवा उसका पता नहीं चल रहा है। छेदी लाल की तलाश और वारंट की तामील के लिए हर संभव प्रयास करने होंगे।
38 साल बाद जमानती को नोटिस
आरोपित के नहीं मिलने के बाद उसके जमानती सासनी निवासी निरंजनलाल शर्मा को भी न्यायालय की प्रक्रिया का सामना करना पड़ रहा है। उन्हें नोटिस देकर आरोपित को न्यायालय में पेश कराने के संबंध में कहा गया है। 14 सितंबर को हाथरस न्यायालय में तारीख लगी थी।
अगली तारीख 18 अक्टूबर निर्धारित की गई है। निरंजनलाल शर्मा का कहना है कि 38 साल बाद उन्हें आरोपित को लेकर परेशान होना पड़ रहा है। जब पुलिस को ही उसका पता नहीं मिल रहा है तो उन्हें उसके वर्तमान ठिकाने के बारे में कैसे पता होगा। उन्होंने कहा कि वह केवल मामले में जमानती हैं और छेदी लाल के वर्तमान ठिकाने की जानकारी उनके पास नहीं है।
न्यायालय ने तय की थी जमानत की शर्त
हाई कोर्ट के आदेश में यह भी कहा गया है कि यदि छेदी लाल मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट के समक्ष उपस्थित होकर जमानत के लिए आवेदन करता है तो उसे 25 हजार रुपये के व्यक्तिगत बंधपत्र और इतनी ही राशि के दो विश्वसनीय जमानतदारों पर जमानत दी जा सकती है। इसके साथ उसे हाई कोर्ट के समक्ष उपस्थित होने का वचन भी देना होगा।
हाईकोर्ट के निर्देश के अनुपालन में आरोपित छेदी लाल की तलाश कराई जा रही है। उसके पुराने पते और संभावित ठिकानों की जानकारी जुटाई जा रही है। वारंट की तामील के लिए पुलिस टीम को आवश्यक निर्देश दिए गए हैं और न्यायालय को रिपोर्ट भेजी जाएगी।
चिरंजीव नाथ सिन्हा, एसपी हाथरस
