जासं, हाथरस : कोयले की किल्लत से बहुत सारी चीजों के दाम लगातार बढ़ते जा रहे हैं। इसका असर बिल्डिग मैटेरियल पर साफ दिख रहा है। सरिया, गार्डर व सीमेंट के दाम बढ़ गए हैं। लागत बढ़ने से 15 से 25 फीसद तक दाम बढ़े हैं। आने वाले समय में ईंट के दाम भी बढ़ सकते हैं। निर्माण की लागत बढ़ने से अपने घर का सपना देखने वालों के लिए और मुसीबत खड़ी हो सकती है।

लगभग एक महीने से कच्चे कोयले की किल्लत चल रही है। इसके चलते कोयले के दाम लगातार बढ़ रहे हैं। ईंट भट्ठे वालों को 10 से 11 हजार रुपये प्रति टन मिलने वाला कोयला 18 से 20 हजार रुपये प्रति टन मिल रहा है। वहीं सरिया मिलों को भी कोयला महंगा मिल रहा है। इसका असर बिल्डिग मैटेरियल के उत्पादन पर पड़ रहा है। कम कोयला होने की वजह से बिजली उत्पादन करने वाली इकाइयां नहीं चल पा रही हैं। इससे फ्लाई एश(उड़न राख) भी नहीं मिल पा रही है। फ्लाई एश का प्रयोग सीमेंट बनाने में किया जाता है। सुप्रीम कोर्ट व एनजीटी के आदेश के बाद फ्लाई एश का प्रयोग अनिवार्य हो गया है। जानकार बताते हैं कि सरकार ने बिजली उत्पादन करने वालों के अलावा अन्य उत्पाद करने वाली इकाइयों को कोयले की सप्लाई पर प्रतिबंध लगा दिया है। इससे कोयले की कालाबाजारी भी हो रही है।

गार्डर व सरिया पर असर : कोयला महंगा होने से सरिया, एंगल, पत्ती, चादर व गार्डर के उत्पादन पर असर पड़ा है। पहले से महंगाई बढ़ गई है। टाटा, स्टील अथारिटी आफ इंडिया (सेल) जैसी ब्रांडेड कंपनियों के भी 20-25 फीसद तक दाम बढ़े हैं।

ईंट भट्ठों पर असर : कोयले से पकने वाली ईंटों की लागत बढ़ने से ईंटे महंगी हो सकती हैं, क्योंकि कोयला महंगा हो गया है। ईंट भट्ठा संचालकों का कहना है कि फिलहाल ईंट के दाम नहीं बढ़े हैं, लेकिन आगे चलकर बढ़ाना मजबूरी होगी। इस समय ईंट के दाम प्रति हजार पांच हजार रुपये चल रहे हैं। यह दाम भट्ठा पर है। यहां से ले जाने पर प्रति हजार भाड़ा अलग से देना पड़ता है। इस तरह बढ़े हैं भाव

वस्तु, भाव तब, अब

गार्डर, 60, 70

सरिया, 52-65

(भाव रुपये प्रति किलो।)

सीमेंट, 300-350

(भाव रुपये प्रति 50 किलो) वर्जन

कोयला पहले से काफी महंगा हो गया है। सरकार ने जीएसटी भी बढ़ा दी है। इसका असर भट्ठा चलाने पर पड़ रहा है। आने वाले समय में ईंट के दाम बढ़ सकते हैं।

अंबरीश माहेश्वरी, ईंट भट्ठा कारोबारी लागत बढ़ने से ब्रांडेड व अन्य कंपनियों के सरिया, गार्डर व अन्य लोहे के सामान के दाम बढ़े हैं। इसका असर थोक से लेकर फुटकर भाव पर पड़ रहा है।

सुधीर अग्रवाल, ब्रांडेड कारोबारी

Edited By: Jagran