जासं, हाथरस : शुक्रवार की रात बूंदाबांदी से और अधिक बारिश होने की उम्मीद लगाए बैठे किसानों को निराशा मिली। शनिवार को दिन भर आसमान में बादल छाए रहे, लेकिन बरसे नहीं। धूप तेज नहीं थी लेकिन गर्मी ने हाल बेहाल कर दिया। बारिश न होने से किसानों को नलकूप से फसलों की सिचाई और धान की रोपाई करनी पड़ रही है।

जून के दूसरे सप्ताह में धान की रोपाई का सीजन शुरू हो जाता है लेकिन जरूरत के हिसाब से बारिश नहीं हुई है। इससे किसानों को अधिक नुकसान हो रहा है। समय पर रोपाई नहीं हो पा रही है। वहीं, नलकूप और डीजल पंप सेट से सिचाई करना महंगा साबित हो रहा है। जिन किसानों ने जैसे-तैसे अपने खर्च से धान की रोपाई कर ली है वे दोबारा पानी नहीं लगा पा रहे हैं। लगातार धूप पड़ने से धान में लगा हुआ पानी सूख भी रहा है। वहीं अन्य फसलों के लिए सिचाई जल्दी-जल्दी करनी पड़ रही है। नहरों और रजबहा में भी जरूरत के हिसाब से पानी नहीं मिल रहा है।

बोले किसान

डीजल इंजन चला कर पानी भरा है। धान की पौधों तैयार हो गई थी। बरसात हो नहीं रही है। आगामी उम्मीद लेकर धान की रोपाई करा रहे है। अगर 15 दिन में बारिश नहीं होती है तो आसमान छूते डीजल के दामों के कारण धान की फसल पैदा करना बहुत ही कठिन काम होगा।

विनीत कुमार, जरैरा

जब पौध तैयार हो जाएगी तो रोपाई तो करनी ही पडे़गी। वर्षा नहीं होगी तो बंबा के पानी व ट्राली चलाकर फसल तैयार करेंगे। जो कुछ पैदा होगा,देखा जाएगा। अगर बारिश नहीं हुई तो धान की फसल साधन संपन्न पैदा कर पाएंगे।

प्रताप सिंह, जरैरा

Edited By: Jagran