यह एक आर्काइव लेख है, जिसे Dec 23, 2016 को प्रकाशित किया गया था। इसमें दी गई जानकारी वर्तमान समय के लिहाज से पुरानी हो सकती है।
रुला गए सादाबाद के कुंवर साहब
हाथरस : सादाबाद : आजादी के बाद सादाबाद क्षेत्र की राजनीति में परचम लहराने के साथ प्रदेश सरकार में लो

हाथरस : सादाबाद : आजादी के बाद सादाबाद क्षेत्र की राजनीति में परचम लहराने के साथ प्रदेश सरकार में लोक निर्माण राज्यमंत्री रह चुके कुंवर जावेद अली खां अब नहीं रहे। यह सूचना कोठी से बाहर आते ही कांग्रेसियों के साथ-साथ उनके समर्थकों में भी शोक की लहर दौड़ गए। हर कोई उनकी कोठी की ओर दौड़ पड़ा।
सादाबाद की रियासत के नवाब कुंवर अशरफ अली खां के ज्येष्ठ पुत्र कुंवर जावेद अली खां ने विरासत में मिली राजनीति में अहम मुकाम हासिल किया था। कुंवर अशरफ अली के जाने के बाद जावेद अली खां ने भी अवाम के दिलों में अहम मुकाम बनाया था। जावेद अली खां नगर में कुंवर साहब के नाम से जाने जाते थे। 1980 में विश्वनाथ प्रताप सिंह की सरकार में लोक निर्माण राज्य मंत्री बनाया गया था। 1983 में मध्यावधि चुनाव के चलते कुंवर साहब करीब तीन-चार साल राज्य मंत्री रहे थे। इसके बाद उन्हें कांग्रेस पार्टी में मुरादाबाद मण्डल का प्रभारी बनाया गया। साथ ही प्रदेश कार्यकारिणी में उन्हें उपाध्यक्ष का ओहदा दिया गया था। इसके बाद दो वर्ष पहले कुंवर साहब कांग्रेस कमेटी के सदस्य बने रहे। करीब डेढ़ दशक पूर्व कुंवर साहब ने लोकसभा का चुनाव भी लड़ा था, लेकिन उन्हें जीत नहीं मिली। शिक्षा के क्षेत्र में अग्रसर हाइवे पर स्थित सादाबाद इंटर कालेज में नए आयाम स्थापित किए। इस कालेज की स्थापना उनके मरहूम पिता कुंवर अशरफ अली खां ने आजादी के बाद की थी। वर्तमान में कुंवर साहब यहां प्रबंध समिति के अध्यक्ष पद का कार्यभार संभाले हुए थे। कुंवर जावेद अली खां के बेटे महमूद अली खां इन दिनों सिकंदराराऊ विधानसभा सीट से कांग्रेस से टिकट के लिए दावेदारी पेश कर रहे हैं। गुरुवार शाम जैसे ही कुंवर साहब के इंतकाल की इत्तला कोठी से बाहर आई समर्थक, कांग्रेसियों में शोक की लहर दौड़ गई।
शोक संवेदना व्यक्त
सिकदंराराऊ में काग्रेसजनों की एक बैठक यशोदा भवन स्थित कार्यालय पर हुई जिसमें पूर्व मंत्री जावेद अली खा के निधन पर गहरी शोक संवेदना व्यक्त की गई। उनके निधन को अपूरणीय क्षति बताया गया। सेवादल जिला चीफ जगतवर्ती पाठक ने कहा कि कुंवर जावेद अली खा पार्टी के पुराने सिपाही थे। उन्होंने जीवन पर्यत काग्रेस की नीतियों का प्रचार प्रसार किया। शोक व्यक्त करने वालों में जहीरूद्दीन पीरजादा, अनिल वाष्र्णेय, मुनेश चतुर्वेदी, इश्त्याक अहमद सैफी, फकीर मोहम्मद अब्बासी, राजीव वाष्र्णेय, संतोष वाल्मीक, हसीन खा, नवेद अहमद खा, अखलाक भारती, माशे अल्ला, शाकिर अली, नवील अहमद, गौरव वर्मा, हीरो हाफिज, शहनाज वानो, निखिलवर्ती पाठक, आदित्य बघेल, दीपक बघेल, प्रशात चौहान, अवनीश राजू आदि मौजूद थे।
