हरदोई : धीरे धीरे चुनावी रंग चढ़ता जा रहा है। गांव का नहीं प्रदेश की सरकार बननी है तो चुनाव में लोग नाली, खड़ंजा, सड़क और नल की बात न करके मुद्दों की बात कर रहे हैं। खासकर युवा वर्ग तो इससे दूर है और विकास पर रोजगार के साथ कानून व्यवस्था की बात कर रहा है। हर राजनीतिक दल ने मतदाताओं को रिझाने के लिए लंबी चौड़ी घोषणाएं कर रहा है। ग्रामीणों का कहना है कि केवल घोषणाएं ही नहीं काम ऐसा होना चाहिए जोकि जमीन पर दिखे भी। ग्रामीण क्षेत्रों में चुनावी रंगत का जायजा लेने के लिए शुक्रवार की सुबह बाइक से हरदोई से बावन तक निकला तो हर तरफ चुनावी चर्चाएं ही होती मिलीं। पेश है लाइव रिपोर्ट.. चारों तरफ लहलहाती सरसों की फसल गांवों की सुंदरता का वर्णन कर रही थी। गेंहू की फसल भी धीरे धीरे बढ़ रही है तो कहीं कहीं आलू भी दिखा। हर खेत में किसान दिखे। कोई सरसों की फसल देख रहा था तो कोई गेंहू की फसल में पानी लगाने की तैयारी में था। आलू को झुलसा रोग लग गया तो किसान परेशान भी दिखे। तत्योरा के पास राजकुमार सब्जी बेचते मिले। सब्जी का मूल्य पूछा तो एक एक करके गिनाने लगे। रेट महंगे बताने पर बोले, भइया सब कुछ महंगा है तो सब्जी भी महंगी है। बिक्री के बारे में पूछा तो बोले भइया बिक खूब रही। जो सस्ती खात हते वई महंगी भी खाई रहे हैं। भिठारी के पास सड़क के किनारे राजकिशोर, प्रेमपाल, राधे गपशप करते दिखे। चुनाव के बारे में पूछा तो बोले अरे अभई ता जब नेतन ने अपने पत्ता नहीं खोले तम हम कइसे खोलि देंहि। खेती किसानी का हाल पूछा तो बोले सब ठीक हई। सरकार की सम्मान निधि मिली चुकी। खाद-पानी मा कोई दिक्कत नहीं भई। हां भइया जानवरन ने जरूर बहुत परेशान करि रखो। सरकार जह समस्या दूरि करि देती ता किसानन का कोई परेशानी नाहीं। हर तरफ अपनी अपनी बात और चर्चाएं सुनते सुनते बावन कस्बा कब आ गया पता ही नहीं चला। सदर बाजार सब्जी मंडी में टिन शेड के नीचे धूप में रामकिशोर, रामनरेश, बालकराम साथियों के साथ चुनावी चर्चा में व्यस्त दिखे। चुनावी हाल पूछा तो बोले भइया सब ठीक सरकार ने बहुत अच्छी काम करे। पर गोरू (जानवर) की बड़ी परेशानी हई। राति राति खेतन मा रहिबे पत्ति। करीब एक घंटा के लाइव में हर व्यक्ति चुनावी चर्चा तो करता मिला लेकिन अपने पत्ते खोलने को कोई तैयार नहीं था।

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