60 साल से बरकरार है हरदोई के संकटे लाल की गुझिया का स्वाद, कई जिलों के दीवाने हैं लोग
हरदोई के भगवंत नगर में संकटे लाल की खोये से भरी गुझिया 60 सालों से अपनी पहचान बनाए हुए है, ...और पढ़ें
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HighLights
संकटे लाल की गुझिया 60 साल पुरानी विरासत।
खोये, इलायची और मेवों से भरपूर स्वाद।
त्योहारों और शादियों में बढ़ती है मांग।
संवादसूत्र, रियाज हुसैन। छाऊकुआं भगवंत नगर की पहचान बन चुकी संकटे लाल की खोये से भरी गुझिया का स्वाद आज कई जिलों के लोगों की जुबान पर चढ़ा हुआ है। करीब छह दशक पहले शुरू हुआ यह सफर आज एक ऐसी मिठाई की पहचान बन चुका है, जो त्योहारों से लेकर वैवाहिक कार्यक्रमों तक की रौनक बढ़ाती है।
खोये की मिठास, इलायची की खुशबू और मेवों से भरपूर इस गुझिया के स्वाद के दीवाने दूर-दूर तक फैले हैं। समय के साथ इसकी लोकप्रियता बढ़ती गई और मल्लावां क्षेत्र में भी इसने अपनी अलग पहचान बना ली। करीब 60 साल पहले 1965 में बिलग्राम से भगवंत नगर आए स्वर्गीय संकटे लाल ने छाऊ कुआं पर गुझिया बनाने और बेचने का काम शुरू किया था। उस दौर में उन्होंने महज 20 पैसे प्रति किलो की दर से गुझिया बेचने की शुरुआत की थी।
धीरे-धीरे लोगों को इसका स्वाद पसंद आने लगा और गुझिया की मांग बढ़ने लगी। इसके बाद उनके पुत्र नंदकिशोर ने मिठाई को और खास बनाने के लिए खोये से भरी गुझिया तैयार करना शुरू किया। इस नए स्वाद ने लोगों के बीच इसकी लोकप्रियता और बढ़ा दी। परिवार की इस परंपरा को अब स्वर्गीय संकटे लाल के पौत्र मनोज कुमार आगे बढ़ा रहे हैं।
वह इस कारोबार का विस्तार करने के साथ गुझिया की पुरानी पहचान और स्वाद को बनाए रखने में जुटे हैं। उनके मुताबिक, गुझिया बनाने में खोया, चीनी, इलायची के दाने, किशमिश और काजू का इस्तेमाल किया जाता है। इसके अंदर भरने के लिए भुने हुए खोये की खास तैयारी की जाती है, जो इसके स्वाद को अलग बनाती है।
हर त्योहार पर बढ़ती है मांग
होली और दीपावली ही नहीं, ईद, बकरीद और रक्षाबंधन जैसे त्योहारों पर भी इस गुझिया की मांग रहती है। इसके अलावा शादी-विवाह और अन्य मांगलिक कार्यक्रमों में भी लोग इसे पसंद करते हैं। भगवंत नगर से शुरू हुआ यह कारोबार अब आसपास के जिलों तक अपनी पहचान बना चुका है। नगर निवासी उप मुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक और पूर्व मंत्री नरेश अग्रवाल सहित कई लोग भी इस गुझिया के स्वाद के मुरीद बताए जाते हैं।
समय के साथ महंगाई और लागत बढ़ने के चलते इसकी कीमत में भी इजाफा हुआ है। कभी 20 पैसे प्रति किलो से शुरू हुई गुझिया की कीमत आज करीब 300 रुपये प्रति किलो तक पहुंच गई है। इसके बावजूद इसके स्वाद और लोकप्रियता का सिलसिला जारी है। संकटे लाल के परिवार की यह मिठाई आज केवल कारोबार नहीं, बल्कि भगवंत नगर की एक खास पहचान और पीढ़ियों से चली आ रही स्वाद की विरासत बन गई है।
