हरदोई: उदाहरण एक: पिहानी विकास खंड के हरैया प्राथमिक विद्यालय में आग बुझाने के सिलिडर तो रखे थे, लेकिन उनकी रिफिलिग कब कराई गई, यह किसी को पता नहीं था। जानकारी ली गई तो शिक्षामित्र सिलिडर उठा लाया और देखने लगा।

उदाहरण दो: पिहानी विकास खंड के प्राथमिक विद्यालय पंडरवा में भी कूड़ेदान के पास आग बुझाने के सिलिडर रखे मिले। न वह संचालित थे और उन्हें कैसा चलाया जाता है इसकी भी किसी को जानकारी नहीं थी।

उदाहरण तीन: कछौना विकास खंड के प्राथमिक विद्यालय हथौड़ा में सिलिडर को रखे मिले, और मार्च में उनकी रिफिलिग कराए जाने की भी बात बताई जा रही थी, पर किसी घटना पर उन्हें कैसे चलाया जाएगा यह किसी को नहीं पता था।

परिषदीय विद्यालयों में बच्चों की सुरक्षा के दावे तो बहुत किए जाते हैं, पर हकीकत उनकी पोल खोल रही है। बिलग्राम कस्बा में मंगलवार को मिड्डे मील बनते समय गैस सिलिडर में लीकेज से आग लग गई और देखते देखते विकराल रूप भी धारण कर लिया था, लेकिन आग बुझाने का कोई इंतजाम नहीं था। यहां हुई घटना के साथ खबर में शामिल तीन विद्यालय को महज समझाने के लिए हैं। अधिकांश विद्यालयों में यही दशा है, जहां आग बुझाने के लिए सिलिडर हैं उनकी रिफिलिग नहीं कराई गई, जहां कराई भी गई है, वहां संचालन नहीं पता है।

देखा जाए तो 3446 परिषदीय विद्यालयों में अग्निशमन के इंतजाम का आदेश है। आग बुझाने के सिलिडर के साथ ही लोहे की बाल्टी में बालू भी रखी होनी चाहिए पर अधिकांश में यह नहीं है और आग लगने की घटना होने पर हाथ मलने के अलावा कुछ नहीं बचता है। आग बुझाने की नहीं है जानकारी

-विद्यालयों में खाना बनाने वाली रसोइया को भी आग बुझाने का प्रशिक्षण देने की बात कही गई थी, पर रसोइया तो दूर की बात अधिकांश विद्यालयों में तो अध्यापक भी प्रशिक्षित नहीं हैं। --सभी विद्यालयों में अग्निशमन संयंत्र का आदेश है। कपोजिट ग्रांट से रखरखाव और रिफिलिग की व्यवस्था है। निरीक्षण में इन्हें भी देखा जाएगा और जहां पर भी खामी है उसमें सुधार कराया जाएगा।--वीपी सिंह बीएसए

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