हरदोई : जिला अस्पताल से रंगीन चादरें नदारद हो गई हैं। कुछ नीली चादरों को छोड़कर सफेद चादरों ने इनकी जगह ले ली है, इनमें से भी कुछ फटेहाल स्थिति में हैं। चादरें कई-कई दिन तक बदलीं नहीं जा रही हैं। मरीजों की शिकायतों को नजरअंदाज कर दिया जाता है।

जिला अस्पताल में लगभग 185 पलंग हैं। स्वास्थ्य विभाग ने एक नियम लागू किया था कि प्रत्येक दिन अलग-अलग रंग की चादर मरीजों के बेड पर बिछाई जाएंगी। इससे पारदर्शिता रहेगी कि रोजाना चादर बदली जा रही हैं। जिला अस्पताल प्रशासन ने चादरें तो खरीदीं, लेकिन उनका आज तक प्रयोग नहीं किया गया। अधिकतर मरीजों के पलंग पर सफेद चादरें ही बिछाई जाती हैं। सबसे खास बात तो यह है कि एक मरीज को जो चादर दी जाती है वह मरीज जब तक अस्पताल में भर्ती रहता है तब तक वही चादर ही बिछी रहती है। जिसमें अधिकतर चादरों में छेद नजर आते हैं।

मरीजों की शिकायतें

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पैरों में घाव हो गया था। जिसके बाद उन्हें वार्ड में भर्ती कर दिया गया। अस्पताल में दवा के नाम पर दो प्रकार की गोलियां दे दी गई। पट्टी कराने के लिए दूसरे वार्ड में जाना पड़ता है। चार दिन पूर्व अस्पताल में भर्ती हुए थे तभी से एक चादर बिछी हुई है।

द्वारिका निवासी बमटापुर 016एचआरडी- 07

सीओपीडी के मरीज हैं। तीन दिनों से वार्ड में भर्ती हैं। चादर बदलने के लिए स्टाफ नर्स से कहा तो उन्होंने कहा कि वार्ड ब्वॉय आएगा तो बदली जाएंगी, तीन दिनों से एक बार भी चादर नहीं बदली गई।

रघुवरी निवासी मझिला 016एचआरडी-08

तबियत खराब होने पर दो दिन पूर्व जिला अस्पताल में भर्ती हुए। अस्पताल में एक चादर नहीं थी जो उन्हें मुहैया कराई जा सकती तो उन्होंने घर से लाए कंबल को ही पलंग पर बिछा लिया। खास बात तो यह थी कि पलंग पर पड़ा गद्दा तक फटा हुआ था।

नन्हेलाल निवासी बाबा मंदिर 016एचआरडी-09

चार दिनों से अस्पताल में भर्ती हैं। चादर काफी गंदी होने के बाद भी नहीं बदली जा रही। शिकायत को अनसुना कर दिया गया। इलाज के लिए मजबूरन उसी चादर पर कंबल बिछाकर लेटे हुए हैं।

रामतीर्थ निवासी कुल्लाहवर बोले जिम्मेदार ..

मेरे कार्यकाल से पहले रंगीन चादरों का नियम लागू हुआ था, लेकिन बार-बार धुलने की वजह से उनका रंग उड़ गया। इसलिए अब ज्यादातर सफेद चादरों का प्रयोग किया जा रहा है। इनको रोजाना बदले का नियम है। ऐसा न करने वाले जिम्मेदारों पर कार्रवाई की जाएगी।

---डा. एके शाक्य, सीएमएस

Posted By: Jagran

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