हरदोई : ''निज भाषा उन्नति अहै, सब उन्नति को मूल''महान गद्यकार भारतेंद्र हरिश्चंद्र की यह पंक्तियां हिदी भाषा के महत्व को समेटे हुए हैं, लेकिन उस समय भारतेंद्र हरिश्चंद्र ने शायद ही यह सोचा हो कि भारत जैसे देश में मातृ भाषा का यह हश्र होगा जो आज हो रहा है।

वंचितों को शिक्षा प्रदान कर रहे एआइसीएपीडी (आल इंडिया सिटीजन एलायंस फॉर प्रोग्रेस एण्ड डेवलपमेंट) के महुईपुरी इनोवेशन मॉडल स्कूल में हिदी दिवस पर कार्यक्रम में संस्थान निदेशक संदीप राजपूत ने एआइसीएपीडी के अधिकारियों एवं कर्मचारियों का आह्वान किया कि पत्राचार हिदी में करें। वहीं चिता जाहिर की कि मातृभाषा के साथ राजभाषा होने के बाद भी सरकारी कार्यालयों के कामकाज की भाषा अभी भी हिदी नहीं बन सकी है। यह विडंबना ही है कि सरकारी कार्यालयों में अधिकांश कार्य एवं पत्राचार अंग्रेजी में ही होते हैं। कहा कि चीन में अपनी भाषा 'मंदरिन' में कार्य करने एवं बोलने में गर्व महसूस करते है। जबकि हमारे देश में अंग्रेजी बोलने वाला ज्यादा विद्वान माना जाता है।

कहा कि सरकारी कार्यालयों के साथ-साथ कॉरपोरेट एवं प्राइवेट सेक्टर को भी हिदी में कामकाज को बढ़ावा देना चाहिए। कॉरपोरेट सेक्टर में हिदी की कोई जगह ही नहीं बची है, जो चिता का विषय है। ग्लोबलाइजेशन के युग में अंग्रेजी सीखना, बोलना एवं लिखना जरूरी है, लेकिन इसे स्टेटस सिबल नहीं मानना चाहिए। हिदी प्रतियोगिताओं के विजयी प्रतिभागियों को पुरस्कृत किया गया। सामाजिक कार्यकर्ता एवं युवा लेखक गोविद सिंह ने बच्चों को उत्साहवर्धन किया।

Posted By: Jagran

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