हरदोई के खेतों में बर्बादी का मंजर, पानी में डूबी साल भर की कमाई; किसान परेशान
हरपालपुर के कटियारी क्षेत्र में गंगा, रामगंगा और गंभीरी नदियों की बाढ़ से सैकड़ों किसानों की धान, बाजरा, मक्का, उड़द ...और पढ़ें
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HighLights
कटियारी क्षेत्र में बाढ़ से सैकड़ों किसानों की फसलें बर्बाद।
धान, बाजरा, मक्का, उड़द, मूंग की फसलें पानी में डूबीं।
किसान आर्थिक संकट में, मुआवजे की मांग कर रहे हैं।
संवादसूत्र, हरपालपुर। किसी ने कर्ज लेकर तो किसी ने जमा पूंजी खर्च कर खेतों में फसल बोई थी। उम्मीद थी कि अच्छी पैदावार होगी तो परिवार की जरूरतें पूरी होंगी और अगली फसल की तैयारी भी हो जाएगी, लेकिन बाढ़ ने किसानों की उम्मीदों पर पानी फेर दिया। गंगा, रामगंगा और गंभीरी नदियों की बाढ़ से कटियारी क्षेत्र में सैकड़ों किसानों की मेहनत की कमाई खेतों में डूब गई। धान, बाजरा, मक्का, उड़द और मूंग की फसलें पानी में डूबकर बर्बादी की कगार पर पहुंच गई हैं।
नदियों का जलस्तर घटने के बावजूद खेतों में पानी भरा है। किसानों को चिंता सता रही है कि फसल की लागत भी नहीं निकल पाएगी। अब परिवार का खर्च कैसे चलेगा और अगली फसल के लिए खाद-बीज का इंतजाम कहां से होगा, यही सवाल उन्हें परेशान कर रहा है। हरपालपुर विकास क्षेत्र के कटियारी इलाके में सुदनीपुर, चंद्रमपुर, बरगदापुरवा, छंगापुरवा, अलीशेरपुरवा, टिक्कापुरवा, पतारपुरवा, तिवारीपुरवा, मठिया, जगन्नाथपुरवा, सुलखामऊ, जसापुरवा, निकामदपुर और जीवनपुरवा समेत दो सौ से अधिक गांवों और मजरों में बाढ़ से खेती प्रभावित हुई है।
खेतों में लंबे समय तक पानी भरा रहने से धान, बाजरा, मक्का, चनहरी, उड़द और मूंग की फसलें सड़ने लगी हैं। किसानों का कहना है कि पानी उतरने तक बची फसलें भी खराब होने की आशंका है। अलीशेरपुरवा निवासी बलराम यादव बताते हैं कि महंगे दामों पर खाद और बीज खरीदकर फसल तैयार की थी। बाढ़ ने सब बर्बाद कर दिया। अब परिवार का गुजारा करना मुश्किल हो रहा है। बेहटा लाखी निवासी मो. नबी का कहना है कि सालभर की मेहनत पानी में डूब गई। लागत निकलने की भी उम्मीद नहीं बची है। इसी गांव के नीरज शर्मा बताते हैं कि धान और उड़द की फसलें सड़ चुकी हैं।
प्रशासन को जल्द सर्वे कराकर प्रभावित किसानों को मुआवजा दिलाना चाहिए। मड़ैया आलमपुर निवासी मूलचंद्र का कहना है कि फसल बर्बाद होने से आर्थिक संकट खड़ा हो गया है। जलभराव से बीमारियों का खतरा भी बढ़ रहा है। किसानों का कहना है कि खेतों से पानी निकलने के बाद ही नुकसान की वास्तविक स्थिति सामने आएगी। फिलहाल उन्हें फसल की बर्बादी के साथ अगली बोआई के लिए खाद, बीज और आर्थिक सहायता की चिंता सता रही है।
