खेल-खेल में सीखा हुनर, 'बैगलेस डे' पर हरदोई के स्कूलों में छाया बच्चों की कला का जादू
हरदोई के परिषदीय विद्यालयों में 'बैगलेस डे' पर बच्चों ने मिट्टी से खिलौने और कलाकृतियां बनाकर अपनी रचनात्मकता का प्रदर्शन ...और पढ़ें

बच्चों ने तैयार की कलाकृतियां।
HighLights
हरदोई के स्कूलों में 'बैगलेस डे' पर मिट्टी की गतिविधियां।
बच्चों ने मिट्टी से बनाए रचनात्मक खिलौने और कलाकृतियां।
स्थानीय कला और शिल्प से जुड़कर सीखा नया हुनर।
जागरण संवाददाता, हरदोई। शनिवार को बैगलेस डे पर परिषदीय उच्च प्राथमिक और कंपोजिट विद्यालयों में बच्चों के हाथों में किताबों की जगह मिट्टी नजर आई। किसी ने मिट्टी से खिलौना बनाया तो किसी ने पक्षी, जानवर और आकर्षक कलाकृतियां तैयार कीं। मिट्टी को मनचाहा आकार देते हुए बच्चों ने जहां अपनी रचनात्मकता दिखाई, वहीं स्थानीय कला और शिल्प से जुड़कर हुनर भी सीखा। विद्यालयों में आयोजित गतिविधियों ने बच्चों के लिए शनिवार को सीखने और सृजन का खास दिन बना दिया।
समग्र शिक्षा के तहत शैक्षिक सत्र 2026-27 में आयोजित होने वाले 10 बैगलेस डे में गतिविधि आधारित और अनुभवात्मक शिक्षा पर जोर दिया जा रहा है। इसी क्रम में 22 अगस्त को आयोजित बैगलेस डे में बच्चों को मिट्टी के खिलौने और कलाकृतियां बनाने की गतिविधि कराई गई। शिक्षकों ने बच्चों को मिट्टी को गूंथने, आकार देने और उसे आकर्षक रूप देने के तरीके बताए।
बच्चों ने अपनी कल्पना के अनुसार अलग-अलग आकृतियां बनाईं और उन्हें सजाया। मिट्टी से खिलौने बनाने के दौरान बच्चों में खासा उत्साह दिखाई दिया। कई बच्चों ने पारंपरिक खिलौनों के साथ पशु-पक्षियों और रोजमर्रा की वस्तुओं के मॉडल भी तैयार किए। गतिविधि में बच्चों ने एक-दूसरे के बनाए खिलौनों को देखकर नए विचार भी सीखे।
शिक्षकों ने बच्चों को बताया कि मिट्टी के खिलौने बनाना केवल मनोरंजन नहीं, बल्कि हाथों के कौशल, धैर्य और रचनात्मक सोच को विकसित करने का माध्यम भी है। जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी प्रभात मिश्र ने बताया कि बैगलेस डे का उद्देश्य बच्चों को गतिविधियों के माध्यम से व्यवहारिक ज्ञान देना है। स्थानीय कला और शिल्प से जोड़कर उनमें श्रम की गरिमा तथा अपने परिवेश के प्रति रुचि विकसित की जा रही है।
उन्होंने बताया कि आने वाले बैगलेस डे में बच्चों को विज्ञान, पर्यावरण, कला, उद्यमिता और आधुनिक तकनीकों से जुड़ी गतिविधियां भी कराई जाएंगी। विद्यालयों में बच्चों द्वारा बनाए गए मिट्टी के खिलौनों और कलाकृतियों की प्रदर्शनी भी लगाई गई, जिसे शिक्षकों और सहपाठियों ने सराहा।
