असंतुलित उर्वरकों के प्रयोग से बिगड़ी मिट्टी की सेहत, यूपी के 12 ब्लॉकों में जैविक कार्बन 0.25% से कम
हरदोई के 12 ब्लॉकों में मृदा परीक्षण में जैविक कार्बन की मात्रा 0.25% से भी कम पाई गई है, जिससे ...और पढ़ें

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HighLights
हरदोई के 12 ब्लॉकों में जैविक कार्बन 0.25% से कम मिला।
यूरिया-डीएपी के असंतुलित प्रयोग से मिट्टी की सेहत बिगड़ी।
जैविक खाद व हरी खाद का प्रयोग बढ़ाने की सलाह।
जागरण संवाददाता, हरदोई। मिट्टी की सेहत सुधारने के लिए कृषि विभाग की ओर से किसानों को जैविक खाद के प्रयोग और संतुलित रासायनिक उर्वरकों के इस्तेमाल के लिए जागरूक किया जा रहा है। इसके बावजूद खेतों में यूरिया और डीएपी के असंतुलित प्रयोग का असर मिट्टी की सेहत पर पड़ रहा है।
हाल में कराए गए मृदा परीक्षण में जिले के 12 ब्लाकों की मिट्टी में जैविक कार्बन की मात्रा 0.25 प्रतिशत से भी कम मिली है। इसे निम्न श्रेणी माना जाता है। इससे मिट्टी की उर्वरा शक्ति प्रभावित होने के साथ ही भविष्य में फसल उत्पादन पर भी असर पड़ने की आशंका है।
जनपद में 19 ब्लाक हैं। वित्तीय वर्ष 2026-27 में कृषि विभाग को आठ हजार मिट्टी के नमूनों की जांच का लक्ष्य मिला था। इसके तहत प्रत्येक ब्लाक से 421-421 नमूने लिए गए। जांच रिपोर्ट में संडीला, भरावन, शाहाबाद, सुरसा, कछौना, बेनीगंज, पिहानी, टोडरपुर, टड़ियावां, हरियावां, कोथावां और अहिरोरी ब्लाक में जैविक कार्बन की मात्रा कम मिली है।
कौन से मेन कारण आए सामने?
वहीं, बावन, सांडी, हरपालपुर, बिलग्राम, मल्लावां, माधौगंज और भरखनी में इसकी स्थिति सामान्य पाई गई है। रिपोर्ट में सभी ब्लाकों की मिट्टी में नाइट्रोजन की कमी भी सामने आई है। भूमि परीक्षण प्रयोगशाला के अध्यक्ष प्रभात वर्मा ने बताया कि 12 ब्लाकों में जैविक कार्बन की मात्रा 0.25 प्रतिशत से भी कम पाई गई है, जो निम्न श्रेणी में आता है। 0.50 प्रतिशत तक मध्य और इससे अधिक होने पर उच्च श्रेणी में शामिल है।
बताया कि जैविक कार्बन फसलों के लिए पोषक तत्वों की उपलब्धता बढ़ाने, मिट्टी में नमी बनाए रखने और उसकी संरचना को बेहतर रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। इसकी कमी से मिट्टी की उर्वरा शक्ति प्रभावित हो सकती है।
उन्होंने यह भी बताया कि मिट्टी की जांच के उपरांत किसानों को मृदा स्वास्थ्य कार्ड का वितरण किया जा रहा है और मिट्टी में आई कमी के बारे में अवगत कराया जा रहा है। अब तक छह हजार से अधिक मृदा स्वास्थ्य कार्ड का वितरण किया जा चुका है।
यूरिया-डीएपी के असंतुलित इस्तेमाल से बढ़ी समस्या
कृषि विज्ञान केंद्र के वरिष्ठ वैज्ञानिक डा. एके तिवारी ने बताया कि खेतों में नाइट्रोजन, फास्फोरस और पोटाश का संतुलित इस्तेमाल नहीं होने से मिट्टी का पोषक संतुलन बिगड़ रहा है। यूरिया और डीएपी के अत्यधिक इस्तेमाल से समस्या और बढ़ रही है।
इससे मिट्टी की संरचना और उसमें होने वाली जैविक गतिविधियां प्रभावित होती हैं। बताया कि धान और गेहूं की कटाई के बाद फसल अवशेष जलाने से मिट्टी की ऊपरी परत में मौजूद जैविक पदार्थ और उपयोगी सूक्ष्मजीव नष्ट होते हैं।
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गोबर की खाद, कंपोस्ट और ढैंचा-सनई जैसी हरी खाद के प्रयोग में कमी से भी मिट्टी में जैविक पदार्थ की मात्रा घट रही है। उन्होंने बताया कि ग्रीष्मकालीन गहरी जोताई करनी चाहिए।
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इसके अलावा जैविक और गोबर की खाद, हरी खाद के प्रयोग के साथ फसल अवशेषों का उचित प्रबंधन किया जाना चाहिए, जिससे मिट्टी की सेहत में सुधार किया जा सकता है।
