हरदोई में बेटियों के बीच बैठे अफसर, सुनी मन की बात और सपनों को दी उड़ान
हरदोई के कस्तूरबा गांधी आवासीय विद्यालयों में अधिकारियों ने छात्राओं से संवाद कर उनकी पढ़ाई और सपनों को जाना, साथ ...और पढ़ें

HighLights
अधिकारियों ने कस्तूरबा गांधी विद्यालयों का निरीक्षण कर व्यवस्थाएं परखीं।
छात्राओं से बातचीत कर उनके सपने और मन की बात सुनी।
सहभोज, सांस्कृतिक कार्यक्रम और खेलकूद से बेटियों को प्रेरित किया।
जागरण संवाददाता, हरदोई। कस्तूरबा गांधी आवासीय बालिका विद्यालयों में 20 अगस्त का दिन बेटियों के लिए कुछ अलग रहा। अधिकारी निरीक्षण करने पहुंचे थे। लेकिन माहौल सिर्फ निरीक्षण का नहीं रहा। अधिकारी छात्राओं के बीच बैठे। उनसे बातचीत की। पढ़ाई पूछी। मन की बात सुनी। सपनों के बारे में जाना। जिलाधिकारी अनुनय झा के निर्देश पर जनपद के सभी 20 कस्तूरबा गांधी आवासीय बालिका विद्यालयों में जनपद और ब्लाक स्तरीय अधिकारियों ने पहुंचकर व्यवस्थाओं का जायजा लिया।
छात्रावास देखा। रसोईघर देखा। भोजन की गुणवत्ता परखी। स्वच्छता, सुरक्षा, स्वास्थ्य, पेयजल और बिजली की व्यवस्था भी देखी। इसके बाद अधिकारी बेटियों के बीच बैठ गए। बातचीत का सिलसिला शुरू हुआ। किसी से पढ़ाई के बारे में पूछा। किसी से पसंदीदा विषय जाना। किसी से भविष्य का लक्ष्य पूछा। छात्राओं ने भी बेझिझक अपनी बात रखी। अपनी समस्याएं बताईं। अपने सपने साझा किए।
कहीं कोई डॉक्टर बनना चाहती थी। कोई शिक्षक। कोई अधिकारी बनने का सपना देख रही थी। अधिकारियों ने हर बेटी को आगे बढ़ने के लिए प्रेरित किया। कहा कि मेहनत और आत्मविश्वास से कोई भी लक्ष्य दूर नहीं। इस मुलाकात में अपनापन भी था। अधिकारियों ने छात्राओं के साथ तिथि सहभोज किया। एक साथ बैठकर खाना खाया। यह पल छात्राओं के लिए खास रहा। औपचारिकता की दूरी कम हुई। चेहरे पर मुस्कान आई।
संवाद और सहज हुआ। इसके बाद विद्यालयों में सांस्कृतिक कार्यक्रमों का रंग बिखरा। स्वागत गीत गूंजे। समूह गान हुआ। लोकनृत्य और देशभक्ति प्रस्तुतियों ने माहौल को जीवंत कर दिया। छात्राओं ने लघु नाटक भी प्रस्तुत किए। अधिकारियों ने तालियों से उनका उत्साह बढ़ाया। कला और सृजनात्मकता भी दिखाई दी। रंगोली बनी। चित्र सजाए गए। विज्ञान मॉडल और हस्तशिल्प की प्रदर्शनी लगी। छात्राओं की प्रतिभा देखकर अधिकारियों ने खूब सराहना की।
खेल मैदान में भी उत्साह कम नहीं था। खो-खो, बैडमिंटन, रस्साकशी और दौड़ में बेटियों ने बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया। अधिकारियों ने भी उनका हौसला बढ़ाया। यह सिर्फ निरीक्षण नहीं था। यह बेटियों तक पहुंचने की पहल थी। उन्हें सुनने की पहल थी। उनके सपनों को समझने की पहल थी। इस दिन अधिकारियों ने व्यवस्थाएं भी देखीं और बेटियों के मन को भी जाना। यही इस पहल की सबसे खूबसूरत तस्वीर रही।
