विदेश में नौकरी का झांसा देकर 19 लाख की ठगी, हरदोई के युवक को झांसा देकर बनाया शिकार
हरदोई के एक युवक को विदेश में नौकरी दिलाने का झांसा देकर साइबर ठगों ने 19.16 लाख रुपये ठग लिए। ...और पढ़ें
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यह तस्वीर एआई द्वारा बनाई गई है।
HighLights
हरदोई युवक से विदेश नौकरी के नाम पर 19.16 लाख ठगे।
साइबर ठगी में विदेश से संचालित नेटवर्क का खुलासा।
मुरैना से दो आरोपी गिरफ्तार, 35 हजार रुपये बरामद।
जागरण संवाददाता, हरदोई। विदेश में अच्छी नौकरी दिलाने का सपना दिखाया। इंटरनेट मीडिया पर दोस्ती की। भरोसा जीतकर पासपोर्ट मंगवाया और फिर 19.16 लाख रुपये ठग लिए। मल्लावां के युवक के साथ हुई साइबर ठगी की जांच में विदेश से संचालित नेटवर्क और देश के विभिन्न राज्यों में फैले बैंक खातों का खेल सामने आया है। ठगी की रकम अलग-अलग खातों में भेजी गई। करीब 15 लाख रुपये फिरोजाबाद से एटीएम और चेक के माध्यम से निकाल लिए गए।
साइबर क्राइम थाना पुलिस ने मध्य प्रदेश के मुरैना से दो आरोपितों को गिरफ्तार किया है। उनके पास से छह मोबाइल और 35,670 रुपये बरामद हुए हैं। मल्लावां के लाला बाजार निवासी मशहूद अली अंसारी ने 20 नवंबर 2025 को साइबर क्राइम थाने में शिकायत की थी। बताया था कि इंटरनेट मीडिया पर मोहम्मद उमर और मोहम्मद अली नाम के व्यक्तियों से परिचय हुआ। दोनों ने विदेश में नौकरी दिलाने का झांसा देकर 19.16 लाख रुपये ठग लिए।
पुलिस ने धोखाधड़ी और आइटी एक्ट के तहत प्राथमिकी दर्ज की। एसपी अशोक कुमार मीणा ने बताया कि विवेचना में सामने आया कि ठगी में प्रयुक्त इंस्टाग्राम आइडी और वाट्सएप नंबर विदेश से संचालित थे। आरोपितों ने विश्वास जीतने के लिए मशहूद का पासपोर्ट तेलंगाना मंगवाया था। पुलिस ने पासपोर्ट बरामद कर पीड़ित को सौंप दिया। रकम भोपाल, आगरा, फिरोजाबाद, बिहार और महाराष्ट्र सहित विभिन्न स्थानों के म्यूल खातों में भेजी गई थी। इनमें अधिकांश रकम फिरोजाबाद से निकाली गई।
पुलिस ने नौ अक्टूबर को मुरैना से फिरोजाबाद के रसूलपुर क्षेत्र के हाजीपुरा निवासी आदिल और आगरा के हरिपर्वत क्षेत्र के सुल्तानगंज निवासी योगराज उर्फ जोनी को गिरफ्तार किया। जांच में दोनों का संबंध मध्य प्रदेश के मंदसौर जिले के शामगढ़ थाने में दर्ज साइबर ठगी के मामले से भी सामने आया। वहां आठ आरोपित पहले गिरफ्तार हो चुके हैं।
पुलिस के अनुसार, गिरोह विदेश से फर्जी विज्ञापन प्रसारित कर लोगों को फंसाता है। ठगी की रकम दूसरे व्यक्तियों के बैंक खातों में मंगाई जाती है। खाताधारकों को इसके बदले दो से तीन हजार रुपये अथवा रकम का कुछ प्रतिशत दिया जाता है। पुलिस नेटवर्क से जुड़े अन्य लोगों की भूमिका खंगाल रही है।
