वोटर लिस्ट से नाम हटवाने के लिए फॉर्म-7 में गलत जानकारी देना पड़ेगा भारी, होगी एक साल की जेल
हरदोई में मतदाता सूची से नाम हटाने या आपत्ति दर्ज कराने के लिए फॉर्म-7 में झूठी जानकारी देना अब महंगा पड़ेगा।

प्रतीकात्मक तस्वीर
HighLights
फॉर्म-7 में झूठी जानकारी देने पर अब होगी सख्त कार्रवाई।
दोषी पाए जाने पर एक साल तक की जेल और जुर्माना।
यह लोक प्रतिनिधित्व अधिनियम, 1950 के तहत दंडनीय अपराध।
जागरण संवाददाता, हरदोई। मतदाता सूची से नाम हटाने या किसी प्रविष्टि पर आपत्ति दर्ज कराने के लिए फॉर्म-7 में झूठी अथवा मनगढ़ंत जानकारी देना अब भारी पड़ सकता है।
जिला मजिस्ट्रेट व जिला निर्वाचन अधिकारी राहुल पांडे ने जनपद के समस्त निर्वाचक रजिस्ट्रीकरण अधिकारियों और सहायक निर्वाचक रजिस्ट्रीकरण अधिकारियों को ऐसे मामलों में सख्त कानूनी कार्रवाई सुनिश्चित करने के निर्देश जारी किए हैं।
भारत निर्वाचन आयोग के निर्देशों का हवाला देते हुए जिला निर्वाचन अधिकारी राहुल पांडे ने स्पष्ट किया है कि यदि जांच में यह पाया जाता है कि फॉर्म-7 के माध्यम से की गई शिकायत या आपत्ति झूठी अथवा आधारहीन है, तो जानबूझकर गलत घोषणा करने वाले आवेदक के विरुद्ध विधि सम्मत कार्रवाई की जाएगी।
लोक प्रतिनिधित्व अधिनियम, 1950 की धारा 31 के अनुसार, यदि कोई व्यक्ति निर्वाचक नामावली की तैयारी, पुनरीक्षण, शुद्धि अथवा किसी नाम को जोड़ने या हटाने के संबंध में जानबूझकर कोई ऐसा लिखित कथन या घोषणा करता है जो मिथ्या (असत्य) है, तो यह दंडनीय अपराध है।
इस अपराध के लिए दोषी को एक वर्ष तक के कारावास, जुर्माने या फिर दोनों से दंडित किया जा सकता है। अधिकारियों को निर्देशित किया है कि इन प्रावधानों का कड़ाई से अनुपालन सुनिश्चित किया जाए और ऐसा कोई भी मामला सामने आने पर तत्काल कार्रवाई कर रिपोर्ट कार्यालय को भेजी जाए।
