हरदोई के अस्पताल में प्रसूता की मौत, जीवित बताकर लखनऊ कर दिया रेफर
हरदोई के एक निजी अस्पताल में ऑपरेशन से बच्चे को जन्म देने के कुछ घंटे बाद एक प्रसूता की संदिग्ध ...और पढ़ें
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HighLights
हरदोई के निजी अस्पताल में प्रसूता की मौत।
स्वजनों ने अस्पताल पर लापरवाही, मौत छिपाने का आरोप लगाया।
पुलिस ने जांच का आश्वासन देकर मामला शांत कराया।
जागरण संवाददाता, हरदोई। निजी अस्पताल में आपरेशन से बेटे को जन्म देने के कुछ घंटे बाद प्रसूता की संदिग्ध परिस्थितियों में मौत हो गई। स्वजन का आरोप है कि अस्पताल में ही प्रसूता की मौत हो चुकी थी, लेकिन चिकित्सक और कर्मचारी उसे जीवित बताकर गुमराह करते रहे। उपचार के नाम पर एंबुलेंस से लखनऊ भेज दिया, जहां निजी अस्पताल में चिकित्सकों ने मृत घोषित कर दिया। इसके बाद साथ गए अस्पताल के लोग भी भाग निकले।
शव लेकर हरदोई लौटे स्वजन को अस्पताल में ताला लटकता मिला। इससे आक्रोशित स्वजन अस्पताल के बाहर धरने पर बैठ गए और हंगामा शुरू कर दिया। पुलिस ने कार्रवाई का भरोसा देकर उन्हें शांत कराया और शव पोस्टमार्टम के लिए भेजा। स्वजन ने अस्पताल प्रबंधन पर उपचार में लापरवाही और प्रसूता की मौत छिपाने का आरोप लगाते हुए कार्रवाई की मांग की है।
सुरसा थाना क्षेत्र के पोथेपुरवा निवासी सुनील की 32 वर्षीय पत्नी ज्योति को प्रसव के लिए 23 अक्टूबर की दोपहर शहर कोतवाली क्षेत्र के सांडी रोड स्थित शिव शक्ति अस्पताल में भर्ती कराया गया था। 24 अक्टूबर को आपरेशन से ज्योति ने बेटे को जन्म दिया। बच्चे के जन्म के कुछ घंटे बाद उनकी तबीयत बिगड़ने लगी। मृतका के रिश्तेदार रामसज्जन का आरोप है कि तबीयत बिगड़ने पर अस्पताल की महिला कर्मचारियों ने स्वजन से दुर्व्यवहार किया।
चिकित्सक को बुलाने में भी देरी की गई। चिकित्सक के इंजेक्शन लगाने के बाद ज्योति की हालत और बिगड़ गई। इसके बाद अस्पताल प्रबंधन ने लखनऊ ले जाने की बात कही। स्वजन के अनुसार, अस्पताल की ओर से एंबुलेंस के साथ भेजा गया युवक लखनऊ चुंगी पर ही उतर गया। विरोध करने पर प्रसूता को लखनऊ के दुबग्गा स्थित निजी अस्पताल ले जाया गया, जहां चिकित्सकों ने मृत घोषित कर दिया।
आरोप है कि हरदोई के अस्पताल से साथ गए लोगों ने रुपये देकर मामला शांत कराने का प्रयास किया और फिर वहां से चले गए। रविवार को शव लेकर हरदोई पहुंचे स्वजन ने संबंधित अस्पताल में ताला लगा देखा। अस्पताल के संचालक और कर्मचारी वहां नहीं मिले। इससे नाराज स्वजन अस्पताल के बाहर धरने पर बैठ गए। हंगामे की सूचना पर पहुंची पुलिस ने कार्रवाई का आश्वासन देकर उन्हें शांत कराया। नोडल अधिकारी डा. मनोज सिंह ने बताया कि अस्पताल का पंजीकरण है। मौत क्यों हुई इसकी जांच कराई जाएगी।
