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हरदोई में 200 से ज्यादा गांव बाढ़ प्रभावित, सड़क और खेत डूबे; खतरे के निशान से ऊपर बह रही गर्रा नदी

Published: Tue, 06 Oct 2026 01:03 PM (IST)

कटियारी क्षेत्र में नदियों का जलस्तर घटने के बावजूद 200 से अधिक गांव बाढ़ से प्रभावित हैं, जहां सड़कें और खेत जलमग्न हैं।

बाढ़ के कारण जनजीवन अस्त-व्यस्त।

बाढ़ के कारण जनजीवन अस्त-व्यस्त।

HighLights

  1. कटियारी के 200 से अधिक गांव बाढ़ से प्रभावित।

  2. सड़कें और खेत जलमग्न, आवागमन बुरी तरह बाधित।

  3. गर्रा नदी खतरे के निशान से ऊपर बह रही।

जागरण संवाददाता, हरदोई। कटियारी क्षेत्र में सड़क कहां खत्म होती है और पानी कहां से शुरू होता है, इसका अंदाजा लगाना मुश्किल हो गया है। कहीं मुख्य मार्गों पर दो से तीन फीट पानी की तेज धार बह रही है, तो कहीं घरों की चौखट तक पानी चढ़ चुका है।

आंगन, रास्ते और खेत सब जलमग्न हैं। गंगा, रामगंगा और गंभीरी नदियों के जलस्तर में रविवार रात से गिरावट जरूर दर्ज की गई है, लेकिन ग्रामीणों की मुश्किलें रत्ती भर भी कम नहीं हुई हैं। नदियों का उफान थमने के बाद भी कटियारी के 200 से अधिक गांवों में जनजीवन पूरी तरह अस्त-व्यस्त है।

ग्राम सुदनीपुर की ओर जाने वाले रास्ते पर पानी का तेज बहाव आवागमन को रोक रहा है। ग्रामीण किसी तरह संभलकर पानी से होकर गुजरने को मजबूर हैं, जबकि बच्चों और बुजुर्गों के लिए बाहर निकलना खतरे से खाली नहीं है। रामनगर के जयवीर, मुर्चा के देवेंद्र और भुलभुलिया गांव के सतीश बताते हैं कि नदियों का पानी घटने से कुछ राहत जरूर मिली है, लेकिन संपर्क मार्ग जलमग्न होने के कारण गांव टापू बने हुए हैं।

सुदनीपुर, चंद्रमपुर, बरगदापुरवा, छंगापुरवा, अलीशेरपुरवा, टिक्कापुरवा, पतारपुरवा, तिवारीपुरवा, मठिया, जगन्नाथपुरवा, सुलखामऊ, जसापुरवा, निकामदपुर और जीवनपुरवा सहित दर्जनों मजरों में चारों तरफ पानी का पहरा है। ग्रामीण रामरूप का कहना है कि खेतों में दूर-दूर तक पानी भरा है और खड़ी फसलें डूब चुकी हैं। वास्तविक नुकसान का आकलन पानी पूरी तरह उतरने के बाद ही संभव हो सकेगा।

फिलहाल ग्रामीणों के सामने पशुओं के चारे और पीने के साफ पानी की विकट समस्या खड़ी हो गई है। बेहटा मुड़िया निवासी नसीम बताते हैं कि सुरक्षा कारणों से बिजली आपूर्ति बंद होने के चलते रातें घने अंधेरे में कट रही हैं, जिससे कीड़े-मकोड़ों और जहरीले जंतुओं का डर सता रहा है।

धर्मपुर-सुरजुनपुर, चांदा-महमदपुर और खसौरा-सवायजपुर समेत लगभग दो दर्जन प्रमुख संपर्क मार्ग बाढ़ के पानी में डूबे हैं। मंगलीपुरवा, देवासीपुर, खसौरा, तिथिगांव, कन्नूतुखेड़ा, सुरजुपुर, दुर्जना और बेहटा मुड़िया सहित 200 से अधिक गांवों के ग्रामीण प्रशासनिक राहत और रास्तों से पानी उतरने के इंतजार में दिन काट रहे हैं।

कम हुआ गंगा-रामगंगा नदी का जलस्तर, गर्रा उफान पर

सिंचाई विभाग के अनुसार गंगा नदी का जलस्तर राजघाट पर 125.51 मीटर दर्ज किया गया, जो खतरे के निशान 125.81 मीटर से 30 सेंटीमीटर नीचे है। वहीं रामगंगा नदी का जलस्तर हुल्लापुर में 137.00 मीटर पहुंच गया है, जो खतरे के निशान 137.10 मीटर से महज 10 सेंटीमीटर नीचे है। दूसरी ओर गर्रा नदी का जलस्तर सांडी में 129.86 मीटर दर्ज किया गया है, जो खतरे के निशान 129.65 मीटर से 21 सेंटीमीटर ऊपर बह रही है।

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