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हरदोई: पाउडर, डिटर्जेंट और केमिकल्स से बन रहा था नकली दूध, लखनऊ-कानपुर तक फैले तार

Published: Tue, 20 Oct 2026 07:32 AM (IST)

हरदोई के संडीला में नकली दूध बनाने वाले गिरोह का भंडाफोड़ हुआ है, जिसमें डिटर्जेंट, कास्टिक सोडा और अन्य रसायन मिलाए जाते थे।

संडीला दूध डेयरी में पाउडर, अखाद्य घी, रसायन आदि मिलाकर तैयार हो रहे नकली दूध का इंटरनेट मीडिया पर प्रसारित वीडियो का स्क्रीनशॉट

संडीला दूध डेयरी में पाउडर, अखाद्य घी, रसायन आदि मिलाकर तैयार हो रहे नकली दूध का इंटरनेट मीडिया पर प्रसारित वीडियो का स्क्रीनशॉट

HighLights

  1. संडीला में नकली दूध बनाने वाले गिरोह का भंडाफोड़।

  2. दूध में डिटर्जेंट, कास्टिक सोडा जैसे रसायन मिले।

  3. यह दूध बच्चों के स्वास्थ्य के लिए बेहद हानिकारक।

पंकज मिश्र, हरदोई। जिस दूध को बच्चों की सेहत और पोषण का आधार मानकर माता-पिता उन्हें पिला रहे हैं, वही दूध बीमारी की वजह भी बन सकता है। गाय-भैंस का शुद्ध दूध समझकर खरीदे जा रहे दूध में यदि पाउडर, कास्टिक सोडा, डिटर्जेंट और अखाद्य घोल मिला हो तो वह शरीर को पोषण देने के बजाय गंभीर नुकसान पहुंचा सकता है।

संडीला औद्योगिक क्षेत्र की दूध डेयरी में सामने आए नकली दूध के खेल ने लोगों की सेहत से खिलवाड़ का बड़ा मामला उजागर किया है। यहां पानी और पाउडर में रसायन मिलाकर दूध तैयार किया जाता था। दूध को फटने से बचाने के लिए कास्टिक सोडा, गाढ़ापन और मिठास बढ़ाने के लिए लैक्टोज पाउडर, क्रीम जैसा स्वरूप देने के लिए संदिग्ध घोल और झाग बनाने के लिए डिटर्जेंट के इस्तेमाल होती थी।

चिकित्सकों के अनुसार, ऐसे रसायनयुक्त दूध के सेवन से बच्चों की भोजन नली, पेट और पाचन तंत्र को गंभीर नुकसान पहुंच सकता है। चिंता इसलिए भी बढ़ गई है क्योंकि शुरुआती जांच में यहां से लखनऊ, कानपुर समेत पश्चिमी उत्तर प्रदेश में दूध की आपूर्ति होने की जानकारी मिली है। अब पुलिस यह पता लगाने में जुटी है कि नकली दूध का कारोबार कहां तक फैला था और इसमें कौन-कौन शामिल हैं।

संडीला औद्योगिक क्षेत्र में संचालित संडीला दूध डेयरी में खाद्य सुरक्षा विभाग ने एसडीएम नारायणी भाटिया और सीओ श्लोक गौतम के साथ छापेमारी की थी। इसी परिसर में पूनम दूध डेयरी के नाम से भी कारोबार होता था। छापे के दौरान दो टैंकरों और दो ड्रमों में संदिग्ध दूध मिला था। इसके अलावा चार बोरियों में करीब 100 किलोग्राम लैक्टोज पाउडर, दानेदार सामग्री और एक डिब्बे में करीब 15 लीटर संदिग्ध घोल बरामद हुआ था।

झाग बनाने के लिए डिटर्जेंट का हो रहा था इस्तेमाल

सहायक आयुक्त खाद्य कुमार गुंजन के अनुसार, प्रयोगशाला जांच में दानेदार सामग्री सोडियम हाइड्राक्साइड पाई गई। संदिग्ध घोल न घी निकला और न ही वेजिटेबल ऑयल। इसे स्वास्थ्य के लिए हानिकारक पाया गया। अधिकारियों के अनुसार, दूध में क्रीम जैसा स्वरूप देने के लिए इस घोल और झाग बनाने के लिए डिटर्जेंट के इस्तेमाल की बात सामने आई है।

मेडिकल कॉलेज के चिकित्सक डॉ. शेर सिंह के अनुसार, सोडियम हाइड्राक्साइड अत्यधिक क्षारीय रसायन है। पर्याप्त मात्रा में शरीर में पहुंचने पर मुंह, गले, भोजन नली और पेट में रासायनिक जलन पैदा कर सकता है। डिटर्जेंट से उल्टी, दस्त और पाचन तंत्र में जलन हो सकती है।

कई जिलों में हो रही थी दूध की सप्लाई

कुछ अखाद्य तेलों में मौजूद विषैले तत्व यकृत और गुर्दों को नुकसान पहुंचा सकते हैं। लैक्टोज असहिष्णुता वाले बच्चों में इसकी अधिक मात्रा से पेट दर्द, गैस और दस्त हो सकते हैं। हालांकि, खाद्य-ग्रेड लैक्टोज स्वयं जहरीला नहीं होता। नुकसान रसायनों की प्रकृति और मात्रा पर निर्भर करता है।

प्रारंभिक जांच में डेयरी से लखनऊ, कानपुर और पश्चिमी उत्तर प्रदेश में दूध की आपूर्ति की जानकारी सामने आई है। पुलिस अब आपूर्ति से जुड़े कारोबारियों, टैंकरों और अन्य लोगों की भूमिका की जांच कर रही है। पुलिस अधीक्षक अशोक कुमार मीणा ने बताया कि मामले में एफआईआर दर्ज है। पुलिस हर पहलू की जांच कर रही है। नकली दूध के कारोबार से जुड़े पूरे नेटवर्क का पता लगाया जा रहा है।

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