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यह एक आर्काइव लेख है, जिसे Aug 11, 2025 को प्रकाशित किया गया था। इसमें दी गई जानकारी वर्तमान समय के लिहाज से पुरानी हो सकती है।

UP floods: बाढ़ ने उड़ाई लोगों की नींद, तेज बहाव के बीच मकानों से टकरा रहा पानी; देखिए इस जिले का हाल

Published: Mon, 11 Aug 2025 03:27 PM (IST)

हापुड़ जनपद में गंगा नदी में आई बाढ़ से कई गांव बुरी तरह प्रभावित हैं। पानी घरों में घुस गया ...और पढ़ें

बाढ़ के कारण मकानों पर मंडराया खतरा। जागरण
बाढ़ के कारण मकानों पर मंडराया खतरा। जागरण

HighLights

  1. गंगा में बाढ़ घरों को खतरा
  2. लोगों का पलायन जारी
  3. फसलें बर्बाद, आर्थिक संकट

संवाद सहयोगी, गढ़मुक्तेश्वर (हापुड़)। हापुड़ जनपद में गंगा की तलहटी में बसे करीब एक दर्जन से अधिक गांवों में बाढ़ ने लोगों की रातों की नींद गायब कर दी है। तेज बहाव के बीच मकानों से टकरा रहे पानी के कारण हर समय कमजोर एवं जर्जर मकानों के गिरने का खतरा मंडरा रहा है। ऐसे में लोगों को जान माल का भय अधिक सता रहा है।

गढ़मुक्तेश्वर के गंगा खादर क्षेत्र में बसे गांवों नयागांव इनायतपुर, गड़ावली, आलमपुर भगवंतपुर, बागड़पुर, कुदैनी की मंढैया, रामपुर न्यामतपुर, शाकरपुर, लठीरा गढ़ खादर, गंगा नगर टापू, नया गांव इनायतपुर, अब्दुल्लापुर, चक लठीरा, नया बांस आदि गांवों के साथ ही तीर्थ नगरी ब्रजघाट के पास गंगा टापू पर बसे गंगानगर में रहने वाले लोगों की जिंदगी इस समय दाव पर लगी हुई है।

गंगा के रौद्र रूप के कारण बाढ़ का पानी अनेक गांवों एवं घरों में घुस चुका है। अभी तक गंगा खादर में दो मकान गिर भी चुके है। गिरने वाले इन दोनों ही मकानों में पशुओं का चारा भरा हुआ था, जबकि परिवार दूसरे मकान में रह रहे थे। ऐसे में जनहानि से लोग बच गए। तेज बहाव के कारण लोग छोटे वाहन अथवा पैदल निकलने से बच रहे हैं। इस समय बाढ़ के कारण लोगों के आवागमन के लिए ट्रैक्टर ही एक सशक्त माध्यम बचा है।

बताया गया कि पानी कम अथवा अधिक होने के कारण नाव का संचालन भी पूर्ण रूप से सफल नहीं हो पा रहा हैं। ऐसे में आपदा के बीच कुछ लोगों ने ट्रैक्टरों को अपना मुख्य साधन बना लिया है। इन्हीं ट्रैक्टरों के माध्यम से गांव से नगर तक का आवागमन हो रहा है।

नक्का कुआं तक पहुंचा पानी

बाढ़ का पानी गांवों एवं जंगलों के बीच से निकलते हुए नक्का कुआं मंदिर से चंद कदम की दूरी तक रह गया है। सबसे बड़ी बात यह है कि नगर का गंदा पानी लेकर जा रहे नाले को बाढ़ के कारण आगे बढ़ने का रास्ता नहीं मिल रहा है।जिसके कारण नाला ओवर फ्लो हो गया है और गंदा पानी बाढ़ के पानी के साथ मिलकर सड़कों एवं आबादी में बह रहा है। इससे लोगों में कई तरह की बीमारी फैलने का खतरा मंडरा रहा है।

अनेक लोगों ने मकान किए खाली

गंगा नगर में बाढ़ के कारण प्रशासन ने 30 से अधिक परिवारों को राहत शिविर में पहुंचा दिया है। वहीं, जर्जर एवं पुराने मकानों में रह रहे लोग अपने सामान को समेट कर सुरक्षित स्थानों की तरफ बढ़ रहे हैं। नगर से गड़ावली की तरफ जाने वाले रास्ते पर एक नई बस्ती पिछले कुछ वर्षो में विकसित हुई है। इस बस्ती में अधिकांश मकान बदहाल हालत में है।

बाढ़ के पानी ने इस बस्ती को चारों तरफ से घेर लिया है। ऐसे में यहां के लोग अपना सामान समेट कर नगर में किराए के मकानों में पहुंच रहे हैं। इसके अतिरिक्त खादर के अन्य गांवों से भी जरूरी सामानों को सुरक्षित स्थानों पर स्वजन पहुंचा रहे हैं।

परिवारों को पालना होगा मुश्किल

बाढ़ की आपदा को देखते हुए इस समय प्रशासन एवं सामाजिक संगठन लोगों की खाने पीने एवं पशुओं के लिए चारे की मदद कर रहे हैं, लेकिन बाढ़ के बाद जो तबाही इनके भूखे पेटों को बेबस करेगी, उसको लेकर वह अभी से चिंतित होने लगे हैं। हजारों हेक्टेयर में खड़ी फसल में जलभराव होने से चारा, धान एवं सब्जी की फसल नष्ट हो जाएगी। ऐसे में किसानों को आने वाले समय में आर्थिक तंगी से जूझना पड़ेगा तो वहीं पशुओं के लिए चारे की व्यवस्था करना उनके लिए बड़ी चुनौती होगी।

शौचालय तक का संघर्ष

गांवों में जलभराव के कारण जहां खाने पीने की असुविधा हो रही है तो वहीं शौच तक के लिए ग्रामीणों का संघर्ष करना पड़ रहा हैं। शौचालयों एवं घरों में पानी भरने के कारण उनकी स्थिति दयनीय हो गई है। ऐसे में लोगों का जीवन नारकीय बन रहा है। बाढ़ के बीच लोग वर्षा नहीं होने की भगवान से प्रार्थना कर रहे हैं। अनेक घरों में जलभराव होने के कारण लोग छतों पर अपना बसेरा किए हुए है।

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इसमें कुछ लोगों के दो मंजिल मकान बने हुए है तो कुछ लोग तिरपाल अथवा पिन्नी डालकर किसी तरह अपने को बचाने का प्रयास कर रहे हैं। ऐसे में वर्षा होने पर लोगों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ता है।