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मां स्कंदमाता की भक्ति में डूबे श्रद्धालु, भक्तों के जयकारों से गूंज उठा मंदिर परिसर

By Harsh AgarwalEdited By: Sachin Jha
Published: Thu, 15 Oct 2026 10:20 AM (IST)

शारदीय नवरात्र के पांचवें दिन हापुड़ में श्रद्धालुओं ने मां स्कंदमाता की विधि-विधान से पूजा-अर्चना की। भक्तों ने परिवार की ...और पढ़ें

मां स्कंदमाता से संतान सुख की कामना कर श्रद्धालुओं ने की पूजा ( एआई इमेज )

मां स्कंदमाता से संतान सुख की कामना कर श्रद्धालुओं ने की पूजा ( एआई इमेज )

HighLights

  1. शारदीय नवरात्र का पांचवां दिन, मां स्कंदमाता की पूजा।

  2. श्रद्धालुओं ने संतान सुख, परिवार की खुशहाली की कामना की।

  3. हापुड़ के मंदिरों में भक्तों की भीड़, मंत्रोच्चार और जयकारे।

हर्ष अग्रवाल, हापुड़। शारदीय नवरात्र का आज पांचवां दिन है। इस दिन मां दुर्गा के पांचवें स्वरूप मां स्कंदमाता की पूजा-अर्चना की जाती है।

धार्मिक आस्था के इस पावन अवसर पर श्रद्धालुओं ने विधि-विधान से पूजन कर परिवार की खुशहाली, संतान सुख और जीवन में उन्नति की कामना की।

मंत्रोच्चार के साथ किए गए अनुष्ठान

देवी के दर्शन के लिए मंदिरों में भक्तों की आवाजाही रही और घरों में भी मंत्रोच्चार के साथ अनुष्ठान किए गए। ज्योतिर्विद पंडित सुबोध पांडेय का कहना है कि पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, मां स्कंदमाता भगवान कार्तिकेय की माता हैं।

उन्होंने कहा कि उनकी गोद में बाल स्वरूप स्कंद विराजमान रहते हैं। देवी का यह रूप मातृत्व, करुणा और त्याग का प्रतीक माना जाता है।

धार्मिक विश्वास है कि सच्चे मन से उनकी आराधना करने पर साधक को मानसिक शांति मिलती है और जीवन की चुनौतियों का सामना करने का संबल प्राप्त होता है।

श्रद्धालुओं ने विधि-विधान से किया पूजन

ज्योतिर्विद पंडित सुबोध पांडेय ने बताया कि श्रद्धालुओं ने पूजा स्थल पर दीप प्रज्वलित कर देवी को पुष्प, फल, धूप और नैवेद्य अर्पित किया। दुर्गा सप्तशती का पाठ व मंत्रों का जाप कर परिवार की सुख-शांति के लिए प्रार्थना की। श्रद्धालु अपनी श्रद्धा के अनुसार व्रत रखकर दिनभर धार्मिक गतिविधियों में भाग लेंगे।

मातृत्व के सम्मान का देती हैं संदेश 

मां स्कंदमाता की आराधना केवल धार्मिक अनुष्ठान तक सीमित नहीं है, बल्कि यह प्रेम, धैर्य और वात्सल्य जैसे मानवीय मूल्यों को अपनाने की प्रेरणा भी देती है।

देवी का स्वरूप बताता है कि परिवार और समाज में संवेदनशीलता व परस्पर सहयोग का विशेष महत्व है। नवरात्र का यह दिन भक्तों को सद्कर्म, सेवा और जरूरतमंदों की सहायता के लिए भी प्रेरित करता है।

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