ब्रजघाट में नियमों की अनदेखी, NGT के प्रतिबंध के बावजूद गंगा में दौड़ रहीं मोटरबोट; डॉल्फिन पर भी संकट
गढ़मुक्तेश्वर के ब्रजघाट में एनजीटी के आदेशों की अनदेखी कर गंगा में सैकड़ों मोटरबोट धड़ल्ले से चल रही हैं, जिससे ...और पढ़ें

तीर्थ नगरी ब्रजघाट में रामसरसाइट में खड़ी मोटरबोट। जागरण
HighLights
एनजीटी के आदेशों के बावजूद ब्रजघाट में मोटरबोट का संचालन जारी।
सैकड़ों मोटरबोट से श्रद्धालुओं की जान और डॉल्फिन को खतरा।
हाल ही में तीन श्रद्धालु गंगा में फंसे, नाविकों पर कार्रवाई।
ध्रुव शर्मा, गढ़मुक्तेश्वर (हापुड़)। कोर्ट के आदेशों की अनदेखी एवं नियमों को ताक पर रखने का कोई उदाहरण आपको देखना हो तो तीर्थ नगरी ब्रजघाट चले आइए। यहां एनजीटी के आदेश के बावजूद गंगा में धड़ल्ले से सैकड़ों की संख्या में मोटरबोट का संचालन किया जा रहा है।
इसमें कई बार लोगों की जान खतरे में पड़ी है तो विलुप्त हो रही डाल्फिन के अस्तित्व को भी खतरे में डाला जा रहा है।
हस्तिनापुर से लेकर नरौरा तक करीब 84 किलाेमीटर लंबा गंगा क्षेत्र रामसर साइट घोषित है। यह क्षेत्र डाल्फिन, घडियाल, कछुओं आदि के लिए संरक्षित हैं। यहां कोर्ट ने गंगा के दोनाें तरफ दो किलोमीटर के दायरे में रेत खनन, मछली मारना, पालेज लगाना, मोटरबोट संचालित करना एवं प्रदूषण फैलाना पूर्ण रूप से प्रतिबंधित किया हुआ है।
लेकिन अधिकारियों की अनदेखी अथवा मिलीभगत के कारण यहां अधिकांश कार्य धडल्ले से हो रहे हैं। तीर्थ नगरी ब्रजघाट में ही अकेले करीब 300 से 400 मोटर बोट का संचालन धडल्ले से हाे रहा है। यह लोग श्रद्धालुओं को मोटर बोट में बैठाकर तेज गति से भगाते हैं, जिसमें कई बार दुर्घटना तक हो चुकी हैं।
मंगलवार की रात तो राजस्थान के तीन श्रद्धालुओं को बैठाकर नाविक मोटर बोट के माध्यम से गंगा के मध्य में ले गया, जहां जाकर मोटरबोट का तेल समाप्त हो गया। जिसके बाद गंगा में आई बाढ़ के बीच बहते हुए जनपद अमरोहा के हसनुपर क्षेत्र के दयावली गांव के सामने पहुंच गई।
वहां जाकर मोटर बोट एक टापू पर रूक गई। अंधेरी रात, तेज आवाज के साथ उठती गंगा की लहरे एवं घनघोर जंगल में यात्रियों की जान हलक में अटक गई। पुलिस ने करीब चार घंटे बाद किसी तरह सभी को सकुशल बाहर निकाला।
कई श्रद्धालु हो चुके हैं घायल
हालत यह है कि पालिका द्वारा चप्पु से चलने वाली 152 नावों का रजिस्ट्रेशन किया गया है। लेकिन जांच की जाए तो यहां बामुश्किल दस नाव चप्पु से संचालित मिलेंगी। जबकि शेष नाव मोटर से संचालित हो रही हैं। इतना ही नहीं आपदा विभाग के अधिकारी
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इन नाव संचालकों की जांच किए बिना इनको लाइफ जैकेट वितरित कर गए। यह नाविक इतनी तेज बोट को भगाते हैं कि कई बार यह श्रद्धालुओं के लिए जान का खतरा पैदा कर उनको घायल तक कर चुके है। इन मोटर बोट के नीचे लगे ब्लेड से कई बार श्रद्धालु गंभीर रूप से घायल हो चुके हैं।
इतना ही नहीं इनमें से अनेक अप्रशिक्षित युवा मोटरबोट का संचालन कर रहे हैं, जिसके कारण लोगों का जीवन संकट में पड़ रहा है।
जलीय जीवों को खतरा
तीर्थ नगरी ब्रजघाट में अक्सर विलुप्त होती डाल्फिन अठखेलियां करते हुए देखी जाती है। श्रद्धालुओं द्वारा इनका वीडियो बनाकर समय- समय पर इंटरनेट मीडिया पर प्रसारित किया जाता रहा है। लेकिन मोटर से संचालित इन बोट एवं इनके नीचे लगे ब्लेड के कारण डाल्फिन के जीवन पर संकट पैदा हो रहा है।
करीब एक वर्ष पूर्व यहां घायल अवस्था में घडियाल का शव बहता दिखाई दिया था। ऐसे में यह मोटर बोट यहां रहने वाले जीवों के लिए भी खतरा पैदा कर रही हैं।
पालिका द्वारा हाथ यानि चप्पु से चलने वाली 152 नावों का रजिस्ट्रेशन किया गया है। बिना रजिस्ट्रेशन किसी भी नाव को नहीं चलने दिया जाएगा। इसके लिए कई बार अभियान भी चलाया गया है।- पवित्रा त्रिपाठी, पालिका अधिशासी अधिकारी
नियमों के विरुद्ध किसी को भी कार्य नहीं करने दिया जाएगा। एक नाविक को जेल भेजा गया है तो वहीं चार अन्य नाविकों के खिलाफ भी पुलिस द्वारा कार्रवाई की गई है।- देवेंद्र सिंह बिष्ट, कोतवाली प्रभारी
