हापुड़ समेत पश्चिमी यूपी में अतिक्रमण की मार, सड़कों और सार्वजनिक भूमि पर कब्जे से बिगड़े हालात
हापुड़ और पश्चिमी उत्तर प्रदेश में अवैध निर्माण व अतिक्रमण एक बड़ी समस्या है, जहां सड़कों, नालों और सार्वजनिक भूमि पर लगातार कब्जे हो रहे हैं।
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हापुड़ और पश्चिमी उत्तर प्रदेश में अवैध निर्माण व अतिक्रमण एक बड़ी समस्या।
HighLights
अवैध निर्माण और अतिक्रमण पश्चिमी यूपी में गंभीर समस्या।
अभियानों के बाद नियमित निगरानी की कमी से दोबारा कब्जा।
जिम्मेदार विभागों की उदासीनता से व्यवस्था पर सवाल।
केशव त्यागी, हापुड़। मेरठ में अवैध निर्माण के मामले में सुप्रीम कोर्ट की सख्ती ने पूरे पश्चिमी उत्तर प्रदेश में शहरों की निर्माण व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए हैं। जिले की सड़कें, नाले, फुटपाथ और सार्वजनिक जमीन तक अतिक्रमण के मामले सामने आते रहे हैं।
नगर पालिका से लेकर पुलिस हर साल अतिक्रमण हटाने के अभियान चलते हैं। लेकिन किसी एक सड़क को अतिक्रमण मुक्त कराने के बाद वहां दोबारा कब्जा न हो, इसके लिए नियमित निगरानी नहीं की जा रही है।
सिर्फ बुलडोजर से नहीं रुकेगा अतिक्रमण
शहर में अतिक्रमण के कई रूप हैं। कहीं दुकानदारों ने सड़क की सीमा तक सामान फैला रखा है तो कहीं फुटपाथ पर स्थायी ढांचा खड़ा है। कुछ जगह नाले पाटकर निर्माण किए जाने की शिकायतें हैं तो कहीं सड़क की जमीन तक चबूतरे और सीढ़ियां बढ़ी हुई हैं। अवैध निर्माण और अवैध प्लाटिंग का मामला इससे अलग है।
हाल में पिलखुवा में एचपीडीए ने तीन स्थानों पर करीब 28 हजार वर्गमीटर से अधिक क्षेत्र में अवैध प्लाटिंग के खिलाफ कार्रवाई की थी। इसके बाद भी बिना स्वीकृत मानचित्र के प्लाटिंग और निर्माण धड़ल्ले से किया जा रहा है।
अभियान चला, नहीं की निगरानी
मिनाक्षी रोड से गढ़ गेट पुलिस चौकी तक सड़क पर अतिक्रमण के खिलाफ नगर पालिका ने अभियान चलाया। टीम ने अतिक्रमण करने वाले दुकानदारों के खिलाफ कार्रवाई करते हुए साढ़े 29 हजार रुपये का जुर्माना लगाया और सड़क को अतिक्रमण मुक्त कराया। निगरानी न होने से फुटपाथ पर कब्जा, दुकानों के बाहर सामान, चबूतरे/सीढ़ियां और अभियान के बाद दोबारा कब्जे की स्थिति बनी हुई है।
नाला निर्माण में 18 मकान बने बाधा
मोहल्ला चमरी में सड़क और नाले पर बने अतिक्रमण को लेकर नगर पालिका और लोक निर्माण विभाग की टीम ने 18 मकानों की नपाई की। नाला निर्माण में बाधा बनने वाले इन निर्माणों को लेकर मकान स्वामियों ने विरोध भी किया। मामला इस बात की जांच की की तो अवैध निर्माण की बात सामने आई।
जिम्मेदार विभाग कौन-कौन?
एचपीडीए, नगर पालिका परिषद, लोक निर्माण विभाग, राजस्व विभाग, पुलिस विभाग तहसील/प्रशासन।
जागरण सुझाव
- अतिक्रमण हटाने के बाद उसी स्थान की अनिवार्य दोबारा जांच हो।
- बार-बार कब्जा करने वालों पर केवल जुर्माना के साथ कठोर कार्रवाई की जाए।
- सार्वजनिक भूमि का रिकार्ड और अतिक्रमण सूची सार्वजनिक करें।
- नींव पड़ने के बाद बुलडोजर चलाने के बजाय नोटिस की व्यवस्था हो।
- अवैध प्लाटिंग पर शुरुआती स्तर पर रोक लगे।
- सड़क, बिजली और अन्य सुविधाएं मिलने से पहले अवैध कालोनी पर कार्रवाई हो।
- बार-बार कब्जा मिलता है तो केवल कब्जाधारी ही नहीं अधिकारी पर भी कार्रवाई हो।
बोले जिम्मेदार
अवैध निर्माण व अतिक्रमण के खिलाफ अभियान चालकर समय-समय पर कार्रवाई कराई जाती है। आगे भी कार्रवाई जारी रहेगी। - संदीप सिंह, एडीएम
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